Durga Puja 2021: शस्त्र पूजन के साथ सरायकेला राजघराने में दुर्गोत्सव की धूम, वर्षों की परंपरा आज भी जारी

सरायकेला में दुर्गोत्सव की धूम है. राजघराने के सदस्य राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने महासप्तमी के अवसर पर शस्त्र पूजन किया. वर्षों से चली आ रही परंपरा को राजघराने के सदस्य आज भी निभा रहे हैं. वहीं, माता के महंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
Durga Puja 2021 (प्रताप मिश्रा, सरायकेला) : या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता……. के मंत्रोच्चार के साथ कलानगरी सरायकेला में माता दुर्गा की आराधना शुरू हो गयी. मंगलवार को महासप्तमी तिथि पर माता के सातवें स्वरूप माता कालरात्री की पूजा अर्चना किया गया. इस दौरान शस्त्र पूजन भी हुआ. वहीं, माता के महंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
खरकई नदी के माजणाघाट में हथियारों की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा- अर्चना किया गया. इसके बाद शंख ध्वनि, ढोल के साथ माता दुर्गा (खंड़ाधुवा) का पूजन करते हुए माता का आह्वान किया गया. राजघराने के वंशज राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव के नेतृत्व में राजघराने के सदस्य अस्त्र-शस्त्र लेकर नदी किनारे पहुंचे व वहां पर शस्त्र धोने के बाद विधिवत पूजा किया गया एवं वापस राजघराने व पब्लिक दुर्गा पूजा मंदिर लाया गया, जहां पर हथियारों को स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू किया गया.
इधर सरायकेला, सीनी, महालिमोरुप, कोलेबिरा दुगनी, चमारू, गोविंदपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में मंगलवार को माता भगवती के 7वें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गयी. सरायकेला पब्लिक दुर्गापूजा, हंसाउडी दुर्गापूजा, सरकारी दुर्गापूजा, धर्मशाला रोड व इंद्रटांडी में भी माता के 7वें स्वरूप की आराधना की गयी.
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सरायकेला पब्लिक दुर्गापूजा समिति द्वारा तांत्रिक मतानुसार पूजा अर्चना किया जाता है. सरकारी स्तर से आयोजित मंदिर में माता भगवती की वैष्णव मत से होती है. इसके अलावे सार्वजनिक दुर्गापूजा हंसाउडी, सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति इंदट्रांडी व दुर्गापूजा कमिटी इंदट्रांडी में भी वैष्णव मतानुसार पूजन किया जाता है.
कोरोना संक्रमण को देखते हुए पूजा कमेटी द्वारा दुर्गापूजा गाइडलाइन का पालन करते हुए सोशल डिस्टैंसिंग के साथ पूजा अर्चना किया गया. सरायकेला में एकमात्र पब्लिक दुर्गापूजा मंदिर में तांत्रिक मतानुसार पूजा होती है. यहां दुर्गापूजा करीब 350 वर्षों से हो रही है.
पहले यहां राजघराने द्वारा पूजा किया जाता था. बाद में स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग से पूजा किया जाता है. इसके बाद कमिटी द्वारा माता भगवती का भव्य मंदिर का निर्माण किया गया. मंदिर में ही भव्य प्रतिमा भी स्थापित किया गया है. पूजा समितियों द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन का भी पालन किया जा रहा है.
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Posted By : Samir Ranjan.
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