Coronavirus: झारखंड में भी बंद होंगे शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा सीएम को पत्र, भाजपा ने किया हमला

Author Amitabh Kumar|Edited by Prabhat Khabar
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Coronavirus: झारखंड में भी शैक्षणिक संस्थान, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, म्यूजियम, पार्क, जैव विविधता पार्क और इको-पार्क 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिये जाएंगे.

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रांची : कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्‍या भारत में 100 के पार पहुंच गयी है. देश के कई राज्यों ने एहतियातन कई कदम उठाये हैं और स्कूल-कॉलेज सहित कई संस्थाओं को बंद कर दिया है. इसी बीच झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मांग की है कि सूबे के शैक्षणिक संस्थान, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, म्यूजियम, पार्क, जैव विविधता पार्क और इको-पार्क 31 मार्च तक के लिए तत्काल प्रभाव से बंद कर दिये जाएं.

इधर, सुस्त रवैये को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर हमला किया है. पार्टी नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि कोरोना वायरस को लेकर जहां पूरी दुनियां सचेत दिख रही है वहीं झारखंड सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है. झारखंड सरकार की सर्तकता केवल बयानबाजी व बैठकों तक ही सीमित नजर आ रही है. कोरोना को लेकर सजगता इस कदर है कि देश के 12 राज्यों में स्कूल-कॉलेज तक बंद कर दिये गये हैं परंतु झारखंड सरकार इस मामले में अब भी उदासीन है.

भाजपा नेता मरांडी ने और क्या कहा

भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि सूचना है कि झारखंड में कोरोना की जांच के लिए एक भी केन्द्र उपलब्ध नहीं है. सरकारी-गैरसरकारी अस्पतालों में मरीजों की बात तो दूर, वहां पदस्थापित चिकित्सकों व कर्मियों के लिए मास्क तक उपलब्ध नहीं है. इससे सरकार की तैयारी का अंदाजा लगाया जा सकता है. कोरोना को हल्के में लेना उचित नहीं है. हम झारखंड सरकार से पुनः आग्रह करते हैं कि सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में अविलंब आकलन कर मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भय का वातावरण समाप्त हो.

झारखंड सरकार सजग

झारखंड के मुख्य सचिव डीके तिवारी ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर राज्य सरकार सतर्क है. स्थिति पर नजर रखी जा रही है. हर दो दिनों पर सभी जिलों के डीसी के साथ समीक्षा की जायेगी. शुक्रवार को भी सभी डीसी से बात की गयी है. राहत की बात यह है कि झारखंड समेत पूर्वी भारत में अभी तक कोरोना का कोई केस नहीं मिला है. फिर भी सरकार ने एहतियातन सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द करने का फैसला लिया है. जनता को भी पैनिक होने की जरूरत नहीं है. हां सावधानी बरतना जरूरी है. जहां तक हो सके, सार्वजनिक कार्यक्रमों और भीड़-भाड़वाली जगहों से लोग बचें. स्कूल-कॉलेज की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है. फिलहाल बंद करने पर फैसला नहीं लिया गया है. अगली समीक्षा बैठक सोमवार को होगी, तभी कोई निर्णय लिया जा सकता है.

असर

-कोरोना को लेकर झामुमो केंद्रीय समिति की बैठक स्थगित

-आइआइएम रांची का दीक्षांत समारोह स्थगित, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आना था

-बीआइटी हॉस्टल में रहनेवाले छात्र-छात्राअों के कैंपस से बाहर जाने पर प्रतिबंध

-अब ट्रेनों में मांगने पर ही मिलेगा कंबल, एसी कोच के पर्दे हटाये गये

-जमशेदपुर एमजीएम में मलयेशिया से आये बारीडीह के वृद्ध की जांच करायी गयी थी. उनमें संक्रमण नहीं मिला. रांची से आये दो संदिग्धों के नमूने नेगेटिव पाये गये.

-स्वास्थ्य मंत्री ने शिक्षण संस्थानों, पार्क व सिनेमा हॉल को बंद करने के लिए सीएम से मांगा निर्देश

-डेढ़ से तीन रुपये में बिकनेवाला मास्क 30 से 50 रुपये में बेचा जा रहा है. इधर जिला प्रशासन ने आदेश जारी किया है कि मास्क व सेनेटाइजर की कालाबाजारी करनेवालों पर होगी कार्रवाई

-उधर बिहार में कई शहरों में धारा 144 लागू कर लोगों के एक जगह जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

-पॉलिटेक्निक कॉलेजों की परीक्षाएं स्थगित

-झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने 16 व 17 मार्च से आरंभ हो रही डिप्लोमा प्रथम व पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा स्थगित कर दी है.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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