Lockdown Second Day in Jharkhand: गांव में बाहरी की एंट्री पर रोक, ट्रक में भरकर पहुंच रहे हैं लोग

Author Amitabh Kumar|Edited by Prabhat Khabar
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Lockdown Second Day in Jharkhand: झारखंड में लॉकडाउन का असर आज कई जिलों में नजर आ रहा है. कोरोना वायरस के प्रसार को लोग गंभीरता से ले रहे हैं.

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रांची : झारखंड सरकार महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ने की तैयारी में जुट गयी है. कई लोग तो प्रशासन के आदेश को मान रहे हैं तो कई इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. लॉकडाउन के दूसरे दिन भी झारखंड में ऐसा नजारा दिख रहा है जो चिंता बढाने का काम कर रहा है. झारखंड के इटखोरी से आज सुबह खबर आयी कि लोग यहां दूसरे राज्यों से ट्रकों में भरकर पहुंच रहे हैं.

ट्रेन रद्द होने के बाद भी एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों के आने का सिलसिला जारी है. महाराष्ट्र से ट्रकों में बैठकर लोग अपने घर आ रहे हैं. मंगलवार को महाराष्ट्र से चार ट्रकों में भरकर लोग इटखोरी पहुंचे. सभी मुंबई में काम करते हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण फैक्ट्रियों व कंपनियों में काम बंद हो गया है जिसके कारण वे अपने घर पहुंचे हैं. ट्रक में बैठे लोगों में महामारी का तनिक भी भय नहीं नजर आया, वे बेपरवाह एक दूसरे से बिना दूरी बनाये बैठे थे.

यहां बाहरी के एंट्री पर रोक

झारखंड के हजारीबाग जिले के दारू प्रखण्ड के दारू खरिका गांव से एक अच्छी तसवीर आज सुबह सामने आयी. यहां कोरोना वायरस से बचने के लिए बाहरी व्यक्ति के गांव में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गयी है. आपको बता दें कोरोना वायरस बहुत ही तेजी से एक मरीज से दूसरे में फैलता है.

दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए कमेटी

झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिन इलाकों से श्रमिकों का ज्यादा पलायन हुआ है, वहां से लौटे हुए श्रमिकों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाये. सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए अधिकारियों की कमेटी बनाने का फैसला किया है. जमाखोरी को देखते हुए भी सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया. इधर, सरकार के निर्देशानुसार दूसरे राज्यों से रांची पहुंचे करीब 2000 प्रवासी मजदूरों को खादगढ़ा बस स्टैंड से बसों द्वारा गंतव्य तक भेजा गया.

दाल-भात केंद्रों पर मिलेगा भोजन, वहां खा नहीं सकते

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के सभी 377 दाल-भात केंद्रों को तीन दिनों के अंदर क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया है. इन केंद्रों में सिर्फ भोजन मिलेगा. लेकिन यहां बैठकर खाना नहीं है, लोग भोजन घरों में खा सकेंगे. इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों के घर पर भोजन की होम डिलीवरी कराने का निर्देश दिया गया है.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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