पंजाब चुनाव में सिद्धू और चन्नी में से कोई नहीं होगा सीएम का चेहरा, सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी कांग्रेस

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो लंबे समय से सिद्धू की तल्खियत की बड़ी वजह चुनाव में नेतृत्व संभालने की मंशा रही है. पार्टी आलाकमान के इस फैसले से उनके मंसूबे को गहरा आघात लगा है.
चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित होने की बाट जोह रहे कांग्रेसी नेताओं को पार्टी आलाकमान ने तगड़ा झटका दिया है. कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित करने का फैसला किया है. पार्टी आलाकमान के इस कदम से पार्टी के दलित चेहरा और वर्तमान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एवं पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को गहरी चोट पहुंची है.
समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से ट्वीट किया है, ‘कांग्रेस पंजाब में किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करेगी और सामूहिक नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी.’ पार्टी आलाकमान की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद मीडिया की रिपोर्ट्स में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस नेतृत्व ने नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी की आपसी जंग के बीच दोनों को साधे रखने के लिए यह फैसला किया है.
कांग्रेस पंजाब में किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करेगी और सामूहिक नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी: सूत्र pic.twitter.com/CbMW3nec5O
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 24, 2021
नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल से ही तल्ख तेवर अपनाए हुए थे, जो अब भी बरकरार है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो लंबे समय से सिद्धू की तल्खियत की बड़ी वजह चुनाव में नेतृत्व संभालने की मंशा रही है. पार्टी आलाकमान के इस फैसले से उनके मंसूबे को गहरा आघात लगा है. इसके साथ ही, मीडिया में इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि पार्टी आलाकमान ने ‘एक परिवार, एक टिकट’ का नियम लागू करके मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी तगड़ा झटका दिया है.
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई डॉ मनोहर सिंह बस्सी पठाना से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. इसके अलावा, कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत अपने बेटे को सुल्तानपुर लोधी सीट से चुनाव लड़वाना चाहते थे. वहीं, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रताप सिंह बाजवा भी अपने भाई को भी चुनावी समर में उतारने की तैयारी में जुटे हुए थे. यही नहीं, वरिष्ठ नेता राजिंदर कौर भट्टल और ब्रह्म मोहिंद्रा भी बेटों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे थे.
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