वाहनों में 'फ्रंट व्यू मिरर' की मदद से 'ब्लाइंड स्पॉट' से होनेवाली दुर्घटना को रोकेगी पुलिस

लालबाजार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैसे तो सड़कों पर पहले की तुलना में सड़क हादसों में काफी कमी आयी है, लेकिन ब्लाइंड स्पॉट से होनेवालीं दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा पा रहा है. बेहला में हुई बच्चे की मौत भी ब्लाइंड स्पॉट के कारण ही हुई थी.
कोलकाता, विकास कुमार गुप्ता : महानगर के विभिन्न इलाकों में ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (वाहन चालकों की ड्राइवर सीट के बाहर सामने की तरफ नीचे की जगह) के कारण सड़क हादसे हो रहे हैं. उदाहरणस्वरूप अगर कोई व्यक्ति या साइकिल बड़े वाहन के सामने से गुजरती है, तो वह स्टीयरिंग व्हील पर बैठे ड्राइवर को नजर नहीं आता. इस कारण महानगर में कई दुर्घटनाएं होती हैं. इसे रोकने के लिए कोलकाता ट्रैफिक पुलिस की तरफ से पहल की गयी है. पुलिस की तरफ से चालकों को इस समस्या से मुक्ति दिलवाने के लिए वाहनों में ‘फ्रंट व्यू मिरर’ लगवाया जा रहा है.
महानगर के विभिन्न इलाकों में ट्रैफिक गार्ड के पुलिसकर्मी अपने इलाकों में प्राइवेट बस स्टैंड पर जाकर बसों में ‘फ्रंट व्यू मिरर’ लगवा रहे हैं. यह नजारा उत्तर कोलकाता बागबाजार स्थित प्राइवेट बस स्टैंड पर देखा गया, जहां पुलिसकर्मी बसों में फ्रंट व्यू मिरर लगवा रहे हैं. इस आइने से सभी वाहनों में चालक की सीट पर बैठने पर बाहरी हिस्से में नीचे कौन आवाजाही कर रहा है, यह चालकों को आसानी से नजर आयेगा.
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लालबाजार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैसे तो सड़कों पर पहले की तुलना में सड़क हादसों में काफी कमी आयी है, लेकिन ब्लाइंड स्पॉट से होनेवालीं दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा पा रहा है. बेहला में हुई बच्चे की मौत भी ब्लाइंड स्पॉट के कारण ही हुई थी. इस कारण काफी विचार कर ब्लाइंड स्पॉट से होनेवाले सड़क हादसों को रोकने के लिए ””फ्रंट व्यू मिरर”” का सहारा लिया जा रहा है. धीरे-धीरे महानगर के विभिन्न ट्रैफिक गार्ड व थाने की तरफ से वाहनों में यह ग्लास लगवाया जा रहा है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि इसे लगाने के बाद चालकों की ब्लाइंड स्पॉट से होनेवाली समस्या खत्म हो जायेगी. इस कारण सड़क हादसों में भी कमी आयेगी.
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महानगर के बेहाला चौराहा इलाके में सड़क दुर्घटना में एक छात्र की मौत होने के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में ट्रैफिक विभाग के अधिकारी ऑटो, बस, टैक्सी चालकों को ड्राइविंग करने से जुड़ी ट्रेनिंग दे रहे हैं. विभिन्न इलाकों में किसी कम्यूनिटी हॉल में मूल रूप से यह ट्रेनिगं दी जा रही है. इस ट्रेनिंग में शहर के विभिन्न सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग से लेकर वाहन की गति को लेकर चालकों को जागरूक किया जा रहा है. ड्राइवरों को इस बात से अवगत कराया जा रहा है कि ओवरटेक करना कितना खतरनाक हो सकता है.
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इस ट्रेनिंग के दौरान चालकों को बताया जा रहा है कि कभी भी स्कूल, अस्पताल, या किसी ऑफिस प्लेस एवं व्यसतम चौराहों पर हमेशी धीमी रफ्तार से वाहन चलानी चाहिये. इसके अलावा ट्रेनिंग में यह भी कहा जा रहा है कि जब वाहन चालक किसी स्कूल के आसपास से वाहन लेकर जा रहे हैं तो वहां पर कतई ओवरटेक न करें. ऐसे में दुर्घटना होने के खतरा बना रहता है. पुलिस की तरफ से चालकों को यह भी बताया जा रहा है कि ट्रैफिक चौराहे पर सिग्नल लाल मिले तो खुद की गाड़ी को हमेशा जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे रखना चाहिये.
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प्रत्येक प्राइवेट बस, स्कूल बस, लॉरी जैसे बड़े वाहन को हमेशा अपने चालक सीट के सामने हमेशा फ्रंट व्यू मिरर लगाना होगा. जिससे उनकी गाड़ी में ब्लाइंड स्पॉट की समस्या उन्हें फेस न करना पड़े. इस ट्रेनिंग में भाग लेनेवाले कुछ चालकों का कहना है कि उनकी सुविधा के लिए यह ट्रेनिंग सत्र का आयोजन किया गया है. इसमें शामिल होकर कई नयी जानकारी एवं ड्राइविंग के लिए नया तरीका सीखने को मिला. ड्राइविंग के समय इस ट्रेनिंग में शामिल होने का उन्हें फायदा मिलेगा.
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