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Australian Open: एक जीत से बदल गई सुमित नागल की किस्मत, बैंक में थे 80000, अब हैं 98 लाख रुपये

Updated at : 16 Jan 2024 4:44 PM (IST)
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Australian Open: एक जीत से बदल गई सुमित नागल की किस्मत, बैंक में थे 80000, अब हैं 98 लाख रुपये

Sumit Nagal of India celebrates after defeating Alexander Bublik of Kazakhstan in their first round match at the Australian Open tennis championships at Melbourne Park, Melbourne, Australia, Tuesday, Jan. 16, 2024. (AP/PTI)(AP01_16_2024_000132A)

भारत के सुमित नागल ने दुनिया के 27वें नंबर के खिलाड़ी कजाखस्तान के अलेक्जेंडर बुबलिक को सीधे सेटों में हराकर अपने कैरियर में पहली बार आस्ट्रेलियाई ओपन के दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया. उन्होंने 31वीं वरीयता प्राप्त बुबलिक को दो घंटे 38 मिनट तक चले मैच में 6-4, 6-2, 7-6 से मात दी.

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भारत के स्टार टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने ऑस्ट्रेलियाई ओपन में दुनिया के 27वें नंबर के खिलाड़ी कजाखस्तान के अलेक्जेंडर बुबलिक को सीधे सेटों में हराकर सभी को चौंका दिया. उन्होंने अपने कैरियर में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन के दूसरे दौर में प्रवेश किया. 26 वर्ष के नागल क्वालीफायर के रास्ते मुख्य ड्रॉ में पहुंचे हैं. इस जीत के साथ ही मीडिया में उनके संघर्ष की कहानी आने लगी है. उनकी गरीबी उनके खेल में सबसे बड़ी बाधा रही, जो अब दूर होने वाली है. क्योंकि इस जीत के बाद नागल को कम से कम 98 लाख रुपये जरूर मिलेंगे. कुछ ही महीने पहले की बात है जब उन्होंने कहा था कि उनके बैंक खाते में केवल 80 हजार रुपये बचे थे और वह 2023 में जर्मनी में अपनी पसंदीदा ननसेल टेनिस अकादमी में प्रशिक्षण लेने से चूक गए थे. पुरुष एकल में नंबर भारत के नंबर वन रैंक वाला खिलाड़ी अपने कोच को फंड देने और अपना प्रशिक्षण जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा था.

एटीपी टूर के लिए खिलाड़ी को चाहिए प्रायोजक

एटीपी टूर पर रहने और खेलने के लिए एक खिलाड़ी को एक प्रायोजक की आवश्यकता होती है. सुमित नागल के पास कोई प्रायोजक नहीं था. वह एक निजी फिजियो का खर्च भी नहीं उठा सकते थे. 2023 की शुरुआत में उनके लिए चीजें ज्यादा नहीं बदलीं, लेकिन ऑस्ट्रेलियन ओपन की एक जीत से काफी कुछ बदल गया है. वह किसी तरह कुछ दोस्तों की मदद से जर्मनी में प्रशिक्षण लेने में कामयाब रहे, लेकिन पेशेवर खेल में उन्हें अखिल भारतीय टेनिस संघ से झटका लगा. संघ ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया में साल के पहले ग्रैंड स्लैम के लिए वाइल्ड कार्ड एंट्री नहीं दी, क्योंकि उन्होंने डेविस कप से हटने का फैसला किया था.

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नागल क्वालीफाइंग राउंड में खेलकर पहुंचे यहां

सुमित नागल को क्वालीफाइंग राउंड में खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा. क्वालीफाइंग राउंड में भाग लेने वाले खिलाड़ी के लिए पुरस्कार राशि 31,250 डॉलर थी. पहला क्वालीफाइंग मैच जीतने पर खिलाड़ी को 44,100 डॉलर और दूसरा जीतने पर 65,000 डॉलर मिलते हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन 2024 के मुख्य दौर में प्रवेश करने के लिए लगातार तीन कठिन मैच जीते. इससे उन्हें कम से कम 120,000 डॉलर की पुरस्कार राशि मिली.

सुमित नागल विश्व रैंकिंग 137वें नंबर पर हैं

26 वर्षीय खिलाड़ी विश्व के 137वें नंबर के गैरवरीय खिलाड़ी हैं और उन्होंने विश्व के 27वें नंबर के खिलाड़ी को ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर कर दिया. वह 35 वर्षों में ग्रैंड स्लैम में किसी वरीयता प्राप्त एथलीट को हराने वाले पहले भारतीय पुरुष टेनिस खिलाड़ी बन गए. 2013 में सोमदेव देववर्मन के बाद यह पहली बार था जब कोई भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलियन ओपन में पुरुष एकल के दूसरे दौर में पहुंचा हो. इस ऐतिहासिक जीत ने नागल के लिए 180,000 डॉलर की पुरस्कार राशि भी सुनिश्चित की.

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ऑस्ट्रेलियन ओपन के पुरस्कार राशि में किया गया है संशोधन

इस वर्ष ऑस्ट्रेलियन ओपन के लिए पुरस्कार राशि में संशोधन किया गया है. 2024 ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन को पिछले वर्ष की तुलना में पुरस्कार राशि में 5.9 फीसदी की वृद्धि मिलेगी. उपविजेता को 6.15 फीसदी की बढ़ोतरी मिलेगी. शुरुआती दौर में हारने वालों के लिए सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिली है. पहले दौर में हारने वालों को 2023 की तुलना में 12.94 फीसदी अधिक राशि मिलेगी. नागल दूसरे दौर में पहुंच गए हैं तो उन्हें 2023 में खिलाड़ियों को जो मिला था, उससे 13.31 फीसदी अधिक राशि मिलेगी. पुरुष एकल के दूसरे दौर में नागल का मुकाबला चीन के वाइल्डकार्ड जुनचेंग शांग से होगा. यदि वह उसे हरा देते है तो उन्हें कम से कम 2,55,000 डॉलर मिलेंगे. एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी के रूप में नागल को इस रकम से काफी मदद मिलेगी.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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