बिना स्थल निरीक्षण के ही योजनाओं की मिली प्रशासनिक स्वीकृति, दो इंजीनियर्स समेत रोजगार सेवक पर उठे सवाल

Updated at : 21 Feb 2022 3:49 PM (IST)
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बिना स्थल निरीक्षण के ही योजनाओं की मिली प्रशासनिक स्वीकृति, दो इंजीनियर्स समेत रोजगार सेवक पर उठे सवाल

jharkhand news: धनबाद जिला के गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत आसनबनी पंचायत-1 में मनरेगा कार्य में गड़बडी का मामला सामने आया है. बिना स्थल निरीक्षण किये योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति देने के मामले में दो इंजीनियर्स की लापरवाही का मामला सामना है. वहीं, ट्रांसफर के बाद भी रोजगार सेवक प्रभार नहीं दे रहे हैं.

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Jharkhand news: धनबाद जिला अंतर्गत गोविंदपुर प्रखंड के आसनबनी पंचायत- 1 में मनरेगा के तहत कई योजनाओं को प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति बगैर स्थल निरीक्षण के ही दे दिया गया. वैसे स्थल पर समतलीकरण योजनाएं स्वीकृत की गयी, जो इसके लिए उपयुक्त नहीं था या जहां इसकी जरूरत नहीं थी. साथ ही वहां के रोजगार सेवक रवि की भूमिका भी संदेहास्पद पायी गयी है. तबादले के डेढ़ माह बाद भी रोजगार सेवक ने अपना प्रभार नहीं सौंपा है.

क्या है पूरा मामला

प्रभात खबर ने गत 4 एवं 6 दिसंबर, 2021 को आसनबनी पंचायत-1 में मनरेगा तथा पीएम आवास में गड़बड़ी का मामला उठाया था. इसके बाद डीसी संदीप सिंह ने डीआरडीए के निदेशक (लेखा प्रशासन) मुमताज अली अहमद के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनायी गयी. टीम में डीआरडीए के परियोजना पदाधिकारी मनोज कुमार तथा सहायक अभियंता रोबिन मंडल शामिल थे. टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी है.

जांच टीम ने मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ियां पकड़ी

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में प्रभात खबर द्वारा उठाये गये मामले जांच में सही पाया गया. खासकर मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ियां पकड़ में आयी. गोविंदपुर प्रखंड के कई अधिकारियों एवं कर्मियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाये गये हैं. वहीं, जांच टीम ने मनरेगा के तहत चल रही दो योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया. इसके तहत आसनबनी-खंडेरी-सरस्वती विद्या मंदिर के जमीन समतलीकरण भाग-1 में पाया गया कि उक्त स्थान पहले से ही समतल है, जबकि यहां पर भी समतलीकरण के लिए योजना स्वीकृत की गयी. इसी स्थान पर समतलीकरण योजना भाग-2 में पाया गया कि यह समतलीकरण लायक है ही नहीं.

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बिना स्थल पर गये तैयार हुआ प्राक्कलन

जांच टीम ने पाया कि वहां के जूनियर इंजीनियर ने बिना स्थल पर गये ही प्राक्कलन तैयार किया. इसी आधार पर असिस्टेंट इंजीनियर ने तकनीकी स्वीकृति दे दी गयी. इन दोनों इंजीनियर्स की कार्यशैली पर सवाल उठाया गया है. कहा कि यह घोर लापरवाही है.

पांच माह तक मुखिया के लॉगइन में पेंडिग रही योजनाएं

जांच टीम ने पाया कि पंचायत की मुखिया ममता देवी के लॉगइन में इन योजनाओं को लगभग 5 माह तक पेंडिंग रखा गया. पंचायत के एक लाभुक जानकी महतो ने मुखिया पति हुबलाल महतो पर योजनाओं को स्वीकृति देने की एवज में दो-दो हजार रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया था. जांच टीम के सामने भी लाभुक ने अपने आरोपों को दोहराया, जबकि मुखिया पति ने इससे इनकार किया. जांच टीम के अनुसार, जब योजना संबंधी अभिलेखों की मांग की गयी, तो वहां के रोजगार सेवक रवि ने कई बहाने बनाये. वह जांच टीम के समक्ष हाजिर नहीं हुए. कहा कि अवकाश पर हैं.

रोजगार सेवक की कार्यप्रणाली सही नहीं

जांच टीम ने पाया कि रोजगार सेवक रवि की कार्यप्रणाली सही नहीं है. उनका तबादला पहले ही दूसरे पंचायत में हो चुका है. इसके बावजूद रोजगार सेवक ने अपना प्रभार नहीं सौंपा है. उनकी कार्यप्रणाली भी सरकारी मापदंड के अनुरूप नहीं है. उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने की बात भी कही गयी है. राज्य सरकार के गाइडलाइंस का भी हवाला दिया गया है.

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रिपोर्ट : संजीव झा, धनबाद.

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