कोर्ट के फैसले नहीं करेगा AI, सुप्रीम कोर्ट ने तय की सीमाएं, जनता से मांगे सुझाव

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 04 Jun 2026 6:34 PM

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अदालतों में AI की एंट्री / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

अदालतों में एआई का उपयोग बढ़ाने की तैयारी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नए मसौदा नियम जारी किए हैं. फैसले सुनाने पर रोक रखते हुए शोध, अनुवाद और दस्तावेज प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है.

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कृत्रिम मेधा (एआई) तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है और अब भारतीय न्यायपालिका भी इसके जिम्मेदार उपयोग के लिए स्पष्ट नियम तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में एआई के इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत मसौदा नियमावली जारी की है. इस मसौदे का उद्देश्य तकनीक की मदद से न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक आधुनिक और कुशल बनाना है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि न्यायिक फैसलों की बागडोर पूरी तरह इंसानों के हाथ में ही रहे. अदालत ने साफ किया है कि कोई भी फैसला केवल एआई या एल्गोरिद्म के आधार पर नहीं लिया जा सकता.

न्यायिक फैसलों में AI की भूमिका पर स्पष्ट सीमा

पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी मसौदे में एआई के लिए एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींची गई है. प्रस्तावित नियमों के अनुसार एआई केवल सहायक उपकरण के रूप में काम करेगा और किसी भी न्यायिक अधिकारी की स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति का स्थान नहीं ले सकेगा. कानून की व्याख्या, तथ्यों का विश्लेषण और अंतिम फैसला सुनाने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास ही रहेगा. मसौदे में कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया में मानव नियंत्रण और जवाबदेही सर्वोपरि रहेगी.

किन कामों में हो सकेगा AI का इस्तेमाल

न्यायपालिका का मानना है कि एआई अदालतों के बढ़ते कामकाज को संभालने में उपयोगी साबित हो सकता है. इसी वजह से मसौदे में कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जहां एआई का उपयोग किया जा सकेगा. इसमें अदालत की कार्यवाही का ट्रांसक्रिप्शन तैयार करना, कानूनी दस्तावेजों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद करना, कानूनी शोध में सहायता देना, पुराने फैसलों की खोज करना, दस्तावेजों और आदेशों का सारांश तैयार करना तथा वादियों की मदद के लिए गाइडेड चैटबॉट्स का उपयोग शामिल है. इससे अदालतों में काम की गति बढ़ने और प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने की उम्मीद जताई जा रही है.

इन क्षेत्रों में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा AI

मसौदा नियमों में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को एआई के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है. किसी मुकदमे का फैसला सुनाना, सजा तय करना, गवाहों की विश्वसनीयता का आकलन करना या न्यायिक निष्कर्ष निकालना एआई के लिए प्रतिबंधित रहेगा. अदालत का मानना है कि ऐसे मामलों में मानवीय समझ, संवेदनशीलता और विवेक की आवश्यकता होती है, जिसे कोई मशीन पूरी तरह नहीं समझ सकती.

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर

सुप्रीम कोर्ट ने मसौदे में डेटा सुरक्षा को भी प्रमुख स्थान दिया है. प्रस्ताव के अनुसार किसी भी व्यक्ति के निजी डेटा का इस्तेमाल एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने, उसकी जांच करने या उसे बेहतर बनाने के लिए बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा. जहां आवश्यक होगा, वहां डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन करना भी अनिवार्य होगा. इसका उद्देश्य नागरिकों की गोपनीयता की रक्षा करना और न्यायिक डेटा के दुरुपयोग को रोकना है.

20 जून तक मांगे गए सुझाव

एआई समिति ने इस मसौदे पर न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों से 20 जून तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं. इन सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय न्यायपालिका को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के साथ-साथ न्याय की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगी.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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