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Smartphone Etiquette: पब्लिक प्लेस में स्मार्टफोन की समझदारी दिखाइए बदतमीजी नहीं

Smartphone Etiquette: भारत में बढ़ते स्मार्टफोन इस्तेमाल के बीच सही शिष्टाचार की कमी बड़ी चुनौती है. जानिए घर, दफ्तर और सार्वजनिक जगहों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल के न्यूनतम नियम जो हर यूजर को अपनाने चाहिए

Smartphone Etiquette: भारत में दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ और तेज 5G रोलआउट ने स्मार्टफोन को हर वर्ग की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है. लेकिन बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही सही व्यवहार और शिष्टाचार की कमी अब एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन रही है. यह रिपोर्ट बताती है कि घर, दफ्तर और सार्वजनिक जगहों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय किन न्यूनतम नियमों का पालन करना जरूरी है. खासकर उन यूजर्स के लिए, जो रोजमर्रा की जिंदगी में मोबाइल को बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करते हैं.

स्मार्टफोन मैनर्स की ट्रेनिंग जरूरी

भारत में OTT टेल्को कंपनियां लगातार सस्ते डेटा और फ्री बेनिफिट्स देकर यूजर्स को जोड़ रही हैं. नतीजा यह है कि स्मार्टफोन अब हर उम्र और हर वर्ग के हाथ में है. लेकिन इस तेज डिजिटल आदत अपनाने के बीच एक अहम कमी साफ दिखती है- यूजर्स को सही स्मार्टफोन मैनर्स, यानी शिष्टाचार की ट्रेनिंग नहीं दी गई. ट्रेन, बस या सार्वजनिक जगहों पर लोग बिना हेडफोन के वीडियो चलाते हैं, कॉल पर जोर-जोर से बातें करते हैं और दूसरों की प्राइवेसी का ध्यान नहीं रखते. यही वजह है कि अब स्मार्टफोन मैनर्स को लेकर चर्चा जरूरी हो गई है.

छोटी-छोटी आदतों का बड़ा असर

सार्वजनिक जगहों पर बिना हेडफोन के ऑडियो चलाना न सिर्फ दूसरों को परेशान करता है बल्कि माहौल को भी असहज बना देता है. दफ्तर में मीटिंग के दौरान बजते रिंगटोन या नोटिफिकेशन टीमवर्क को प्रभावित करते हैं. घर में देर रात नोटिफिकेशन की आवाज परिवार की नींद खराब कर सकती है. इन छोटी-छोटी आदतों का असर बड़ा होता है- लोगों की प्राइवेसी टूटती है, सामाजिक असुविधा बढ़ती है और यूजर की छवि भी नकारात्मक बनती है.

“यूजेज एटीकेट गाइडलाइन” प्रमोट करें कंपनियां

स्मार्टफोन प्लैटफॉर्म्स में पहले से ही ऐसे फीचर मौजूद हैं जो मैनर्स को आसान बना सकते हैं. जैसे “डू नॉट डिस्टर्ब” मोड, कस्टम नोटिफिकेशन प्रोफाइल और हेडफोन-डिटेक्शन सिस्टम. लेकिन समस्या यह है कि यूजर्स इन फीचर्स का इस्तेमाल नहीं करते. कंपनियां डेटा पैक और OTTबंडलिंग पर ध्यान देती हैं, लेकिन यूजर्स को सही व्यवहार सिखाने पर नहीं. अगर टेलीकॉम और स्मार्टफोन ब्रांड्स मिलकर “यूजेज एटीकेट गाइडलाइन” को प्रमोट करें तो स्थिति बेहतर हो सकती है.

डिजिटल साक्षरता सिर्फ ऐप यूजेज तक सीमित

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत में डिजिटल साक्षरता सिर्फ ऐप इस्तेमाल तक सीमित है, व्यवहारिक शिष्टाचार तक नहीं पहुंची. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स अक्सर सार्वजनिक जगहों पर वीडियो शूट करते हैं और दूसरों की प्राइवेसी को नजरअंदाज करते हैं. यही ट्रेंड आम यूजर्स तक पहुंच रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियां और सरकारें मिलकर “डिजिटल बिहेवियर कैंपेन” चलाएं तो आने वाले समय में स्मार्टफोन शिष्टाचार को सामाजिक मानक बनाया जा सकता है.

सुविधा, माहौल और प्राइवेसी का ख्याल रहे

जैसे-जैसे 5G और सस्ते डेटा से नये यूजर्स जुड़ेंगे, स्मार्टफोन शिष्टाचार की अहमियत और बढ़ेगी. भविष्य में यूजर्स को ध्यान रखना होगा कि घर में परिवार की सुविधा, दफ्तर में प्रोफेशनल माहौल और सार्वजनिक जगहों पर दूसरों की प्राइवेसी का सम्मान करना ही स्मार्टफोन इस्तेमाल का न्यूनतम नियम है. अगर यह आदतें अभी से विकसित की जाएं तो डिजिटल इंडिया का चेहरा और भी सभ्य और संतुलित दिखेगा.

पब्लिक प्लेसेज पर स्मार्टफोन यूजेज मैनर्स

जब आप किसी पब्लिक प्लेस में स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हों, तो ध्यान रखें कि आपकी आदतें दूसरों को परेशान न करें.

  • अगर आपको गाने सुनने हैं, वीडियो देखना है या वीडियो कॉल करनी है, तो हमेशा हेडफोन का इस्तेमाल करें.
  • अपने फोन का साउंड प्रोफाइल माहौल के हिसाब से चुनें- जैसे साइलेंट या वाइब्रेट, ताकि दूसरों को दिक्कत न हो.
  • कॉल उठानी पड़े तो कोशिश करें कि किसी शांत जगह पर जाकर बात करें, जोर-जोर से बोलने या हंसने से बचें.
  • पब्लिक स्पेस में पर्सनल या प्रोफेशनल बातें जोर से करने से बचें, क्योंकि यह दूसरों को असहज कर सकता है.
  • अगर कोई प्राइवेट बातचीत करनी है, तो ध्यान रखें कि आपकी बातें आसपास के लोगों तक न पहुंचें.
  • फोटो या वीडियो बनाते समय कोशिश करें कि दूसरे लोग फ्रेम में न आएं. अगर unavoidable हो तो उनकी इजाजत जरूर लें.

आसान भाषा में कहें तो, सार्वजनिक जगहों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय दूसरों की सुविधा और प्राइवेसी का उतना ही ध्यान रखें जितना आप अपनी सुविधा और प्राइवेसी का रखते हैं. यही असली स्मार्टफोन मैनर है.

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Rajeev Kumar
Rajeev Kumar
राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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