AC की जरूरत नहीं पड़ेगी, अगर सही कूलर चुन लिया तो आराम से कटेगा गर्मी का मौसम

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 07 Jun 2026 1:31 PM

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कूलर खरीदने जा रहे हैं? पहले जान लें ये जरूरी बातें / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

घर के लिए नया कूलर खरीदने की सोच रहे हैं? जानिए पर्सनल और डेजर्ट कूलर में क्या अंतर है, किस कमरे के लिए कौन बेहतर रहेगा और ठंडी हवा पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

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गर्मी से राहत चाहिए लेकिन एसी पर हजारों रुपये खर्च नहीं करना चाहते? ऐसे में एयर कूलर आज भी लाखों भारतीय परिवारों की पहली पसंद बना हुआ है. हालांकि बाजार में मौजूद अलग-अलग तरह के कूलर अक्सर लोगों को कन्फ्यूज कर देते हैं कि उनके घर के लिए पर्सनल कूलर सही रहेगा या फिर डेजर्ट कूलर. गलत चुनाव करने पर न सिर्फ ठंडी हवा का मजा कम हो सकता है, बल्कि बिजली और मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ सकता है. ऐसे में कूलर खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझ लेना फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

कमरे के हिसाब से चुनें सही कूलर

कूलर खरीदते समय सबसे पहले कमरे का आकार देखना जरूरी है. अगर आपका कमरा छोटा है या आप किसी एक जगह बैठकर काम करते हैं, तो पर्सनल कूलर बेहतर विकल्प हो सकता है. यह सीमित एरिया में ठंडी हवा पहुंचाने के लिए डिजाइन किया जाता है. छोटे कमरे, स्टडी रूम या व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए यह काफी उपयोगी माना जाता है.

वहीं बड़े कमरे, हॉल या ऐसे स्थान जहां कई लोग मौजूद रहते हैं, वहां डेजर्ट कूलर ज्यादा असरदार साबित होता है. इसकी हवा का दायरा बड़ा होता है और यह अधिक मात्रा में ठंडी हवा फेंकने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि कई घरों, दुकानों और छोटे ऑफिसों में डेजर्ट कूलर का इस्तेमाल किया जाता है.

डेजर्ट कूलर क्यों देता है ज्यादा कूलिंग?

डेजर्ट कूलर में बड़े ब्लोअर या एग्जॉस्ट फैन के साथ बड़ी पानी की टंकी और ज्यादा क्षमता वाली मोटर दी जाती है. यह बाहर की गर्म हवा को अंदर खींचकर पानी से भीगी कूलिंग पैड्स के जरिए ठंडा करता है. पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर इसकी कूलिंग क्षमता काफी बेहतर हो जाती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर घर की खिड़कियां और हवा की आवाजाही सही है तो डेजर्ट कूलर कई बार एसी जैसी राहत का एहसास भी दे सकता है. खासकर शुष्क और गर्म इलाकों में इसकी परफॉर्मेंस बेहतर देखने को मिलती है.

पानी की क्वाॅलिटी भी करती है बड़ा असर

कई लोग कूलर खरीदते समय सिर्फ उसके आकार और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन पानी की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर देते हैं. हार्ड वॉटर यानी ज्यादा टीडीएस वाला पानी कूलर की मोटर और कूलिंग पैड्स पर असर डाल सकता है. समय के साथ मोटर जाम होने और पैड्स पर सफेद परत जमने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.

अगर आपके इलाके में पानी की गुणवत्ता खराब है तो हनीकॉम्ब पैड्स का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है. साथ ही समय-समय पर टैंक की सफाई और पानी बदलना भी जरूरी है ताकि कूलिंग बनी रहे और बदबू की समस्या न हो.

मेंटेनेंस में लापरवाही पड़ सकती है भारी

कूलर की अच्छी परफॉर्मेंस सिर्फ खरीदने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसकी नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है. टैंक की सफाई, कूलिंग पैड्स की धुलाई और मोटर की जांच समय-समय पर करते रहना चाहिए. बारिश के मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बन सकता है.

सफाई या पानी भरने से पहले हमेशा बिजली का प्लग निकाल देना चाहिए. साथ ही घर की अर्थिंग व्यवस्था भी सही होना जरूरी है ताकि किसी तरह की इलेक्ट्रिकल समस्या से बचा जा सके.

खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आपका कमरा 150 वर्गफुट तक का है और इस्तेमाल सीमित है तो पर्सनल कूलर पर्याप्त हो सकता है. वहीं बड़े परिवार, बड़े कमरे या ज्यादा कूलिंग की जरूरत होने पर डेजर्ट कूलर बेहतर विकल्प माना जाता है. सही क्षमता, अच्छी कूलिंग पैड्स और साफ पानी का इस्तेमाल करके आप कम खर्च में पूरी गर्मी आराम से निकाल सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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