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iPhone के कैमरा मॉड्यूल के अंदर क्यों होता है ये काला डॉट? 90% यूजर्स नहीं जानते इसका काम

Updated at : 16 Jan 2026 10:05 AM (IST)
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iPhone LiDAR Sensor

iPhone LiDAR Sensor

iPhone के कैमरा मॉड्यूल में मौजूद काला डॉट दरअसल LiDAR सेंसर है. यह इंफ्रारेड लेजर लाइट की मदद से दूरी और सतहों की बनावट मैप करता है. LiDAR फोटो क्वालिटी सुधारने, AR ऐप्स चलाने और चीजों या लोगों की माप लेने में iPhone की मदद करता है.

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आपके हाथ में मौजूद iPhone के पीछे आमतौर पर दो या तीन कैमरे होते हैं. नॉन-प्रो मॉडल में ज्यादातर दो कैमरे मिलते हैं, जबकि प्रो मॉडल में तीन कैमरे होते हैं. अगर आपके iPhone में तीन कैमरे हैं, तो आपने कैमरा मॉड्यूल के अंदर एक थोड़ा बड़ा काला ‘डॉट’ भी देखा होगा. क्या कभी आपने सोचा है कि यह डॉट किस काम का है और इससे फोन को क्या फायदा मिलता है. आइए आपको बताते हैं. 

LiDAR सेंसर होता है वो काला डॉट 

कैमरा मॉड्यूल में काला डॉट दरअसल LiDAR सेंसर होता है, यानी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग. यह तकनीक इंफ्रारेड लेजर लाइट की मदद से आसपास की चीजों की दूरी और उनकी बनावट को मैप करती है. यही तकनीक सेल्फ-ड्राइविंग कारों में भी इस्तेमाल होती है. iPhone में LiDAR सेंसर फोटो की क्वालिटी सुधारने, AR (ऑगमेंटेड रियलिटी) ऐप्स चलाने और चीजों या लोगों की माप लेने में मदद करता है.

आपको बता दें कि LiDAR सेंसर हर iPhone में नहीं मिलता. Apple ने इसे साल 2020 में iPhone 12 Pro और iPhone 12 Pro Max के साथ पेश किया था. इसके बाद से आए सभी Pro और Pro Max मॉडल्स में यह सेंसर कैमरा मॉड्यूल के अंदर मौजूद है. समय के साथ Apple ने इसे बेहतर जरूर बनाया है, लेकिन यह ऐसा फीचर नहीं है जिसे कंपनी कैमरे के मेगापिक्सल या लेंस साइज की तरह जोर-शोर से प्रमोट करती हो. LiDAR चुपचाप बैकग्राउंड में काम करता है और ज्यादातर समय आपको पता भी नहीं चलता कि यह मौजूद है.

कैसे काम करता है LiDAR सेंसर?

LiDAR सेंसर के अंदर एक लाइट भेजने वाला हिस्सा और एक रिसीवर होता है. इसमें इस्तेमाल होने वाला एमिटर VCSEL लेजर सेल्स से बना होता है, जो बहुत तेजी से रोशनी की किरणें छोड़ता है. ये रोशनी कैमरे के सामने मौजूद चीजों पर पड़ती है और वहां से इंफ्रारेड लाइट वापस रिसीवर तक लौट आती है. इसके बाद सिस्टम यह मापता है कि रोशनी को आने-जाने में कितना समय लगा. इसी आधार पर कैमरे और सामने मौजूद ऑब्जेक्ट के बीच की दूरी का पता चलता है, जिसे टाइम-ऑफ-फ्लाइट तकनीक कहा जाता है. 

चूंकि हर पॉइंट की दूरी अलग होती है, इसलिए LiDAR iPhone को अपने आसपास का पूरा 3D मैप बनाने में मदद करता है. इसी डेप्थ मैप का इस्तेमाल यह जानने के लिए किया जाता है कि सब्जेक्ट कैमरे से कितनी दूर है, और यही तकनीक AR ऐप्स में भी काम आती है.

आप iPhone के LiDAR सेंसर को खुद से ऑन नहीं कर सकते और न ही फोटो लेते वक्त या AR ऐप इस्तेमाल करते समय इसे अलग से चुनने का कोई ऑप्शन होता है. जब सॉफ्टवेयर को लगता है कि दूरी नापने या किसी कमरे को AR के लिए मैप करने की जरूरत है, तब यह सेंसर अपने आप काम करने लगता है. स्क्रीन पर इसे चालू करने के लिए कोई अलग बटन नहीं होता.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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