Google Ads: लोकसभा चुनाव के लिए तेज हुई राजनीतिक लड़ाई, लेकिन नतीजों से पहले जीत गई गूगल

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 19 Apr 2024 8:42 AM

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Google Ads: लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है. इस बार के आम चुनावों के लिए सात चरणों में वोटिंग 19 अप्रैल से शुरू है. इससे पहले गूगल ने अपनी ऐडवर्टाइजिंग ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट जारी कर बताया है कि राजनीति में उसकी जरूरत कितनी बढ़ गई है.

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Google Ads: लोकसभा चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मतदान प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है. हर पार्टी ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा चुकी है. इसमें विज्ञापनों की बड़ी जगह है. ‘मोदी की गारंटी’ और ‘हाथ बदलेगा हालात’ जैसे नारों से अखबार और टीवी ही नहीं, नये जमाने का डिजिटल मीडिया भी पट गया है. अब चार जून को चुनावी नतीजे चाहे जो भी आयें, लेकिन चुनावी विज्ञापनों से कमाई के मामले में गूगल बाजी मार ले गया है. गूगल के अपने ऐडवर्टाइजिंग ट्रांसपेरेंसी डेटा के अनुसार, 1 जनवरी से 16 अप्रैल, 2024 के बीच 135 करोड़ रुपये की कमाई कर कंपनी स्पष्ट विजेता बनकर उभरी है.

BJP – DAVP सबसे आगे

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा गूगल ऐड्स में 45.1 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ सबसे आगे है. इसके बाद भारत सरकार का डीएवीपी-विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय का स्थान है, जिसने गूगल को विज्ञापनों के लिए 32.3 करोड़ रुपये दिये हैं. डीएवीपी के अधिकांश विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फीचर किया गया और ये विज्ञापन विभिन्न भाषाओं में चलाये गए. एक्सचेंज फॉर मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा से ठीक पहले, भाजपा और डीएवीपी के विज्ञापन खर्च का एक बड़ा हिस्सा जनवरी से 15 मार्च के बीच खर्च किया गया था.

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कांग्रेस चौथे नंबर पर

देश की संसद में मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 10.4 करोड़ रुपये के खर्च के साथ गूगल को विज्ञापन देने वालों में चौथे स्थान पर है. पार्टी के अधिकांश विज्ञापनों में सांसद राहुल गांधी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को स्थान दिया गया. बताते चलें कि कथित तौर पर नीति उल्लंघनों की वजह से गूगल ने कांग्रेस के कई विज्ञापनों को अपने प्लैटफॉर्म से हटा भी दिया था.

राजनीतिक परामर्श समूह भी पीछे नहीं

चेन्नई स्थित पॉपुलस एम्पावरमेंट नेटवर्क (PEN) और मुंबई स्थित आई-पैक (I-PAC) जैसे राजनीतिक परामर्श समूह भी गूगल के खजाने में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ मिलकर काम करनेवाले और कथित तौर पर स्टालिन के दामाद वी सबरीसन के स्वामित्व वाले PEN ने 2024 में 14.4 करोड़ रुपये खर्च किये हैं.

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गूगल का खजाना इन्होंने भी भरा

वहीं, प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित देश का पहला और सबसे बड़ा क्रॉस-पार्टी राजनीतिक परामर्श समूह I-PAC गूगल के विज्ञापनों पर 7.5 करोड़ रुपये खर्च कर इस सूची में जगह बनाने में कामयाब रहा. दूसरी ओर, ओडिशा सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसी अन्य संस्थाएं भी तुलनात्मक रूप से छोटे बजट के बावजूद, गूगल ऐड्स के मामले में बड़ी विज्ञापनदाता रहीं.

राजनीति में बढ़ी गूगल की भूमिका

गूगल ऐड्स पर खर्च करने की राजनीतिक दलों की यह प्रवृत्ति चुनाव अभियानों में तकनीकी प्लैटफाॅर्म्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है. राजनीतिक दल के नेताओं की मानें, तो बड़ी पहुंच और सटीक लक्ष्य को साधने की क्षमताओं के साथ, गूगल जैसे प्लैटफॉर्म राजनीतिक दलों और संगठनों को बड़े पैमाने पर मतदाताओं से जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं.

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ऑनलाइन आउटरीच स्ट्रैटेजी का बढ़ता महत्व

गूगल ऐड्स में पर्याप्त निवेश जनता की राय को आकार देने और चुनावी जीत हासिल करने में ऑनलाइन आउटरीच स्ट्रैटेजीज के बढ़ते महत्व को दर्शा रहा है. इस डिजिटल युग में, जहां सूचना प्रकाश की गति से चलती है, ऑनलाइन प्रचार की कला में महारत हासिल करना निर्णायक फैक्टर साबित हो सकता है.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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