Lok Sabha Elections: भारत में चुनाव को लेकर अमेरिकी सीनेटर ने सोशल मीडिया कंपनियों से पूछा- क्या तैयारी है आपकी

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 18 Mar 2024 3:04 PM

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Lok Sabha Elections: अमेरिकी सीनेटर माइकल बेनेट ने कहा है कि दुष्प्रचार और गलत सूचना लोकतंत्र के लिए जहर है. सोशल मीडिया लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सहयोग करे.

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Lok Sabha Elections : भारत में आम चुनाव (General Election 2024) को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. आज (शनिवार – 16 मार्च, 2024) दोपहर तीन बजे लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2023) की तारीखों का ऐलान किया जाएगा. इसके साथ ही, राज्यों (ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश) में विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा होगी. चुनाव आयोग की इस घोषणा के साथ ही देश भर में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. इस बीच, एक अमेरिकी सीनेटर ने सोशल मीडिया कंपनियों से भारत में होनेवाले चुनाव के मद्देनजर तैयारियों को लेकर सवाल पूछा है. मालूम हो कि मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप सहित सोशल मीडिया प्लैटफाॅर्म्स अफवाहें और गलत जानकारी को फैलानेवाले मंच के रूप में भी बदनाम रहे हैं. इन्हीं मुद्दों के मद्देनजर अमेरिकी सीनेटर ने सवाल उठाये हैं.

अमेरिका के एक प्रभावशाली सीनेटर ने मेटा के मालिकाना हक वाले व्हाट्सऐप समेत सोशल मीडिया कंपनियों से पूछा है कि उन्होंने भारत में चुनाव के मद्देनजर क्या तैयारियां की हैं. सीनेटर माइकल बेनेट के मुताबिक, भारत में सोशल मीडिया मंच का इस्तेमाल कर फर्जी और झूठी सामग्री साझा करने का रिकॉर्ड रहा है.

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अमेरिकी चुनावों पर नजर रखने वाली सीनेट की खुफिया और नियम समिति के सदस्य सीनेटर बेनेट ने सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनियों को भारत में चुनाव की घोषणा से पहले पत्र लिखकर उक्त जानकारी मांगी है. पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, बेनेट ने ‘अल्फाबेट’, ‘मेटा’ (फेसबुक), ‘टिकटॉक’, ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के अधिकारियों को पत्र लिखा है जिसमें इन कंपनियों से भारत समेत विभिन्न देशों में चुनाव को लेकर उनकी तैयारियों के बारे में पूछा गया है.

बेनेट ने पत्र में कहा, आपके मंचों से चुनावों में होने वाले खतरे नये नहीं हैं – पिछले चुनावों में उपयोगकर्ताओं ने ‘डीपफेक’ और डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर सामग्री को पोस्ट किया था – लेकिन अब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक स्थिरता दोनों के लिए जोखिम बढ़ाएगा.

अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि उन्नत एआई उपकरणों के माध्यम से अब कोई भी वास्तविक दिखने वाली तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो का निर्माण कर सकता है जो चिंताजनक है.

साल 2024 में 70 से ज्यादा देशों में चुनाव होने हैं और दो अरब से ज्यादा लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं. साल 2024 ‘लोकतंत्र का वर्ष’ है. इस साल ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, यूरोपीय संघ, फिनलैंड, घाना, आइसलैंड, भारत, लिथुआनिया, नामीबिया, मेक्सिको, मोल्दोवा, मंगोलिया, पनामा, रोमानिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और अमेरिका में चुनाव होने हैं.

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‘एक्स’ के एलन मस्क, ‘मेटा’ के मार्क ज़ुकरबर्ग, टिकटॉक के शो जी च्यू और ‘अल्फाबेट’ के सुंदर पिचाई को लिखे पत्र में बेनेट ने इन मंचों की चुनाव संबंधी नीतियों, सामग्री नियंत्रण (मॉडरेशन) दल और एआई से बनायी गई सामग्री की पहचान करने के लिए अपनाये गए उपकरणों की जानकारी मांगी गई है.

साथ में इसकी भी जानकारी मांगी गई है कि सामग्री नियंत्रण दल कितनी भाषाओं में हैं. उन्होंने कहा, दुष्प्रचार और फर्जी सूचना तथ्य और कल्पना के बीच के अंतर को धुंधला करके लोकतांत्रिक चर्चा में जहर घोलते हैं. आपके मंचों को लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए, उसे कमजोर नहीं करना चाहिए.

सीनेटर ने कहा, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के प्रमुख सोशल मीडिया मंचों में ‘मेटा’ के स्वामित्व वाला व्हाट्सऐप भी शामिल है और इनका भ्रामक व झूठी सामग्री को बढ़ावा देने का एक लंबा ट्रैक रिकॉर्ड है. राजनीतिक तत्व जो अपने लाभ के लिए जातीय आक्रोश को बढ़ावा देते हैं, उन्हें आपके मंचों पर दुष्प्रचार नेटवर्क तक आसान पहुंच मिल गई है.

इसके बाद बेनेट ने उनकी नई नीतियों और भारत चुनावों के लिए तैनात किये गए लोगों के विवरण के बारे में पूछा. उन्होंने पूछा कि आपने 2024 के भारतीय चुनाव की तैयारी को लेकर कोई नयी नीतियां अपनाई हैं? बेनेट ने यह भी पूछा, आपने असमी, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संताली, मैथली और डोगरी में कितने सामग्री नियंत्रकों को फिलहाल तैनात किया हुआ है.

सीनेटर ने सोशल मीडिया कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से यह भी कहा कि उनके मंच एआई से बनी सामग्री को रोकने के साथ-साथ पारंपरिक फर्जी सामग्री को रोकने में भी नाकाम साबित हुए हैं. सीनेटर के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी खुफिया विभागों के प्रमुखों से सुना है कि रूसी, चीनी और ईरानी सरकारें अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर सकती हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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