DigiYatra का गड़बड़झाला, एयरपोर्ट पर जुड़वां यात्रियों को Access Denied, आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें?

DigiYatra Twins Access Denied: मुंबई एयरपोर्ट पर डिजीयात्रा की फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी जुड़वां भाइयों को पहचानने में असफल रही. वीडियो वायरल, DigiYatra ने दिया जवाब. जानिए ऐसी स्थति में क्या है समाधान
DigiYatra Twins Access Denied: मुंबई एयरपोर्ट पर डिजीयात्रा की हाईटेक फेस रिकग्निशन सिस्टम ने हाल ही में एक अनोखी स्थिति पैदा कर दी.जुड़वां भाइयों ने जब एक साथ एंट्री करने की कोशिश की तो सिस्टम ने दोनों को एक ही चेहरे के रूप में पहचान लिया और गेट पर “Access Denied” दिखा दिया. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई और टेक्नोलॉजी की सीमाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.
वीडियो से उठा मामला
प्रशांत मेनन नामक यात्री ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि वे और उनके जुड़वां भाई दोनों DigiYatra में रजिस्टर्ड हैं. लेकिन गेट पर सिस्टम ने दोनों को एक ही चेहरे के रूप में पहचानकर एंट्री रोक दी. वीडियो में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा- “देखिए DigiYatra का कमाल, जुड़वां होने की वजह से हमें अंदर जाने से रोक दिया गया.”
यात्रियों की प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मजेदार कमेंट्स किए. किसी ने लिखा- “सीता और गीता को ट्रेनिंग मॉडल में शामिल करना भूल गए.” वहीं कुछ ने इसे टेक्नोलॉजी की कमजोरी बताते हुए चिंता भी जताई. कई यूजर्स ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में सिस्टम को तुरंत मैनुअल वेरिफिकेशन की सुविधा देनी चाहिए.
DigiYatra का जवाब
DigiYatra फाउंडेशन ने इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने प्रशांत मेनन को रिप्लाई करते हुए कहा- “आपके द्वारा उठाए गए मुद्दे की सराहना करते हैं. हमने आपको डीएम में संपर्क किया है ताकि और जानकारी देकर मदद कर सकें.” इस जवाब से साफ है कि DigiYatra टीम इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है.
टेक्नोलॉजी की सीमा
फेस रिकग्निशन सिस्टम आमतौर पर यात्रियों के चेहरे को उनके बोर्डिंग पास और आईडी से मैच करता है. लेकिन जुड़वां जैसे मामलों में जहां चेहरे लगभग एक जैसे होते हैं, वहां सिस्टम गड़बड़ा सकता है. यही वजह है कि DigiYatra में मैनुअल चेक का विकल्प भी रखा गया है ताकि यात्रियों को परेशानी न हो.
भविष्य की चुनौती
यह घटना दिखाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी कितनी भी एडवांस क्यों न हो, इंसानी चेहरे की जटिलताओं को पूरी तरह समझना अभी भी मुश्किल है.DigiYatra को अब जुड़वां यात्रियों जैसे मामलों के लिए खास समाधान तैयार करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने.
DigiYatra कैसे काम करता है?
DigiYatra भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य हवाई यात्रा को और आसान, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है. इस सिस्टम में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, जो यात्री की पहचान और यात्रा से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से सत्यापित करती है. इसके चलते यात्रियों को बार-बार अलग-अलग चेकपॉइंट्स पर फिजिकल डॉक्यूमेंट दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती.
यह तकनीक सुरक्षा जांच और बोर्डिंग की प्रक्रिया को तेज करती है, जिससे लंबी कतारों और इंतजार का समय कम होता है. साथ ही यह कॉन्टैक्टलेस सिस्टम यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक अनुभव प्रदान करता है.
जुड़वां या मिलते-जुलते चेहरे पर सिस्टम की प्रतिक्रिया
जब DigiYatra को दो चेहरे बहुत ज्यादा मिलते-जुलते दिखाई देते हैं, जैसे कि जुड़वां भाई-बहन, तो सिस्टम इसे एक एज केस मानकर अलग तरीके से हैंडल करता है.
यह टेक्नोलॉजी भारतीय चेहरों पर ट्रेन की गई है और बहुत उच्च स्तर की सटीकता से काम करती है. फिर भी यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति दूसरे के टिकट का इस्तेमाल न कर सके.
हर यात्री का चेहरा केवल उसके अपने टिकट से लिंक होता है. इसलिए जुड़वां भाई-बहन को भी अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है.
इस तरह DigiYatra यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा अनुभव देता है, लेकिन जुड़वां जैसे मामलों में मैनुअल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है.
जब फेस स्कैन फेल हो जाए तो क्या होता है?
DigiYatra सिस्टम आमतौर पर चेहरे की पहचान से ही यात्री को एंट्री देता है. लेकिन अगर गेट पर फेस स्कैन साफ न हो पाए या पहचान में गड़बड़ी आ जाए, तो प्रक्रिया तुरंत मैनुअल चेक पर शिफ्ट हो जाती है.
इस स्थिति में यात्री से कहा जाता है कि वह अपना फिजिकल आईडी दिखाए- जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट. साथ ही बोर्डिंग पास भी प्रस्तुत करना होता है. एयरपोर्ट स्टाफ इन दस्तावेजों को देखकर पहचान की पुष्टि करता है.
एक बार पहचान सत्यापित हो जाने पर यात्री को बिना किसी रुकावट के अंदर जाने की अनुमति मिल जाती है. यह बैकअप स्टेप सुरक्षा को मजबूत बनाता है और यह भी सुनिश्चित करता है कि केवल फेस रिकग्निशन की गड़बड़ी की वजह से कोई यात्री अपनी यात्रा से वंचित न हो.
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