Spoof Call: भारत सरकार ने कस ली कमर, खास तकनीक से 24 घंटे में 1.35 करोड़ फर्जी कॉल रोकी

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 24 Oct 2024 9:44 AM

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DoT Anti-Spoof Calls Mechanism

Spoof Calls: भारत सरकार ने एक स्पैम-ट्रैकिंग डिटेक्शन सिस्टम लॉन्च किया है. इस सिस्टम की मदद से उन सभी कॉल्स का पता लगाया जाएगा जो स्पैम की श्रेणी में आते हैं.

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Spoof Call: मोबाइल कॉल के जरिये देश में हो रहे फ्रॉड की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. कई अंतरराष्ट्रीय धोखेबाज भारतीय नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं. इस समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक स्पैम-ट्रैकिंग डिटेक्शन सिस्टम लॉन्च किया है. इस सिस्टम की मदद से उन सभी कॉल्स का पता लगाया जाएगा जो स्पैम की श्रेणी में आते हैं.

दूरसंचार विभाग ने कहा है कि वित्तीय धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारियों का वेष धारण कर लोगों को धमकाने के लिए विदेश से की जाने वाली स्पूफ कॉल को पहचान कर उसे ब्लॉक करने की प्रणाली लागू कर दी गई है. विभाग ने एक बयान में कहा कि नयी अंतरराष्ट्रीय इनकमिंग स्पूफ कॉल निवारक प्रणाली ने सक्रिय होने के महज 24 घंटों में ही लगभग 1.35 करोड़ कॉल को स्पूफ कॉल के रूप में पहचाना और ब्लॉक किया है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रणाली की शुरुआत की

दूरसंचार विभाग ने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने से भारतीय दूरसंचार ग्राहकों को इस तरह की स्पूफ कॉल आने में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संचार और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री पी चंद्रशेखर की मौजूदगी में इस प्रणाली की शुरुआत की.

बयान के मुताबिक, साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबर को प्रदर्शित करके अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल के जरिये साइबर अपराध कर रहे हैं. ये कॉल देश के भीतर से ही की गई लगती हैं लेकिन असल में इन्हें कॉलिंग लाइन पहचान (सीएलआई) में हेराफेरी करके विदेश से किया जा रहा है.

दूरसंचार विभाग ने कहा कि इन स्पूफ कॉल का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी, सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करने और दहशत पैदा करने के लिए किया जा रहा है. इसके जरिये दूरसंचार विभाग और ट्राई के अधिकारी बनकर मोबाइल नंबरों को काटने, फर्जी डिजिटल गिरफ्तारी, कूरियर में ड्रग्स/नशीले पदार्थों की मौजूदगी, खुद को पुलिस अधिकारी बताकर धमकाने, सेक्स रैकेट में गिरफ्तारी की धमकी देने जैसे साइबर अपराधों के मामले सामने आये हैं.

भारतीय फोन नंबरों से आने वाले 90 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय कॉल्स नकली

विभाग ने कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर एक ऐसी प्रणाली बनायी गई है, जो इस तरह की अंतरराष्ट्रीय नकली कॉल की पहचान कर सके और उन्हें भारतीय दूरसंचार ग्राहकों तक पहुंचने से रोका जा सके.

इस प्रणाली को चालू किये जाने के 24 घंटे में ही भारतीय फोन नंबरों से आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय कॉल्स में से लगभग 1.35 करोड़ यानी 90 प्रतिशत को नकली कॉल के रूप में पहचाना गया और दूरसंचार कंपनियों ने उन्हें ग्राहकों तक पहुंचने से रोक दिया.

ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले धोखेबाज बेखबर लोगों को ठगने के लिए डिजिटल टूल और कृत्रिम मेधा (एआई) का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं. अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन नकली कॉल को पकड़ पाना काफी मुश्किल हो गया है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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