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Dark Web Explainer: ड्रग्स से लेकर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और लाइव मर्डर तक, क्राइम का नया अड्डा कैसे बना डार्क वेब?

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Surface Web vs Deep Web vs Dark Web explainer
Surface Web vs Deep Web vs Dark Web explainer
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What is Dark Web, Explainer: उत्तर प्रदेश (UP) के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (Junior Engineer) को सीबीआई (CBI) ने गिरफ्तार किया है. इंजीनियर पर आरोप है कि वह 5 से 16 साल के बच्चों के साथ कुकृत्य कर उसके पोर्न वीडियो बना, डार्क वेब (Dark Web) पर बेचता था. वह बीते दस वर्षों से यह काम कर रहा था.

इंजीनियर के पास से लैपटॉप और आठ फोन भी बरामद किये गए हैं. अब उसके वीडियो (Video) खरीदने वाले भी सीबीआई के निशाने पर हैं. वह डार्क वेब पर यह अवैध कारोबार करता था. इसलिए डार्क वेब एक बार फिर चर्चा में आ गया है. आइए जानें क्या होता है डार्क वेब, जो अपराध की दुनिया का नया अड्डा बन गया है.

फलफूल रहा अवैध कारोबार

डार्क वेब में इन दिनों कई तरह के अवैध कारोबार फलफूल रहे हैं. इनमें ड्रग्स, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, लाइव मर्डर, मानव अंगों की तस्करी, बायोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट्स और अवैध हथियारों का धंधा प्रमुख है. इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि डार्क वेब पर अवैध कारोबार करने वालों को पकड़ना आसान नहीं होता है, क्योंकि पुलिस को आरोपी का नाम और डीटेल जल्दी पता नहीं चल पाता है.

सरफेस वेब, डीप वेब और डार्क वेब

इंटरनेट तीन प्लेटफॉर्म पर काम करता है. इनके नाम हैं सरफेस वेब, डीप वेब और डार्क वेब. सरफेस वेब (surface web) इंटरनेट का वह भाग होता है जिस पर हम लोग आमतौर पर काम करते हैं. यह गूगल, याहू जैसे सर्च इंजन होते हैं. इसके लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होती है. कोई भी इसका इस्तेमाल आसानी से इंटरनेट पर कर सकता है.

डीप वेब (Deep Web)

डीप वेब में किसी डॉक्यूमेंट तक पहुंचने के लिए उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉगइन करना होता है. इसके लिए यूजर को पासवर्ड और यूजर नेम की जरूरत होती है. जीमेल, ब्लॉगिंग वेबसाइट्स या किसी संस्थान के पोर्टल पर काम करना डीप वेब कहलाता है.

डार्क वेब (Dark Web)

सबसे खतरनाक होता है डार्क वेब आमतौर पर यूज होने वाले सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता है. डार्क वेब की साइट्स को टॉर (TOR) एन्क्रिप्शन टूल के प्रयोग से हाइड (छिपा) कर दिया जाता है.

आसान नहीं पहुंचना

डार्क वेब में अगर किसी को किसी तक पहुंचना है, तो उसे टॉर (TOR) का प्रयोग करना होता है. इसमें नोड्स के एक नेटवर्क का उपयोग होता है. एक्सेस करते समय इसके डेटा का एन्क्रिप्शन एक-एक करके होता है. इससे इसके यूजर की प्राइवेसी सेफ रहती है.

इसलिए समझा जाता है सेफ

डार्क वेब को साधारण ब्राउजर से ऐक्सेस नहीं किया जा सकता. इसके लिए टॉर या इसकी तरह के दूसरे खास ब्राउजर का ही इस्तेमाल करना पड़ता है. टॉर और खास ब्राउजर इस तरह एक-एक परत दर परत प्याज की तरह खुलता है. यही वजह है कि इसके अंत में .Com, .In की बजाय .Onion होता है.

ट्रेस करना लगभग नामुमकिन

डार्क वेब इसलिए भी सेफ समझा जाता है क्योंकि इसमें वेबसाइट होस्ट करने वाला और सर्च करने वाला, दोनों गुमनाम होते हैं. साइबर एक्सपर्ट्स की मानें, तो यहां लेनदेन भी बिटकॉइन या ऐसी ही किसी दूसरी वर्चुअल करंसी में होता है. यूजर का IP यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल अड्रेस लगातार बदलता रहता है, जिससे इन्हें ट्रेस करना लगभग नामुमकिन होता है.

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