ePaper

बीमारी से छुटकारा पाने के लिए बनाया मंदिर

Updated at : 22 Jul 2024 1:03 AM (IST)
विज्ञापन
बीमारी से छुटकारा पाने के लिए बनाया मंदिर

कांकसा का आडा शिवतला शिव मंदिर सेन वंश के राजा बल्लाल ने बनवाया था, आज भी होती है भीड़

विज्ञापन

मुकेश तिवारी, पानागढ़

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के गोपालपुर ग्राम पंचायत अधीन आड़ा शिवतला में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर में श्रावण माह के आरंभ होते ही भक्तों की भीड़ पूजा अर्चना और जलाभिषेक के लिए जुटने लगती है. इस वर्ष भी इस पावन और चमत्कारी मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ उमड़ने की आशा है. करीब 850 वर्ष पुराने इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण सेन वंश के दूसरे राजा बल्लाल सेन ने करवाया था. स्थानीय लोगों ने बताया कि इसके पीछे एक लंबी कहानी है. राजा बल्लाल सेन का अजय नदी के तट पर कांकसा वन पर आधिपत्य था. उपद्रवियों को दबाने के लिए एक सेना का भी गठन किया गया था. बल्लाल सेन एक बार असाध्य रोग से पीड़ित हो गये थे तो काफी इलाज करवाने के बाद भी तबीयत ठीक नहीं हो रही थी. इस बीच कई वैद्य राज को भी दिखाया गया. लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ. कहा जाता है कि एक रात राजा बल्लाल सेन को महादेव का स्वप्न आया कि वह आड़ा के कालदिघी तालाब के बगल में शिव मंदिर बनवायें और प्रतिदिन तालाब में स्नान कर उक्त मंदिर में जलाभिषेक करें तो वह ठीक हो जायेंगे. इस स्वप्न के बाद राजा बल्लाल सेन ने आड़ा में महादेव शिव का कालदिघी तालाब के पास पूर्वी भारत के बालू और झामा पत्थर से शिव मंदिर बनवाया. राजा बल्लाल सेन ने उस मंदिर के अंदर शिवलिंग रखकर महादेव की पूजा शुरू कर दी. तब उनका असाध्य रोग ठीक हो गया. तभी से नित्य पूजा की जाने लगी.

आज भी उमड़ती है मंदिर में काफी भीड़

विशेष अवसरों पर भक्तगण काफी संख्या में इस मंदिर के अनुष्ठान में उपस्थित होते हैं. विशेष कर श्रावण माह में इस प्राचीन मंदिर में प्रत्येक सोमवार को भारी संख्या में भक्त आज भी उपस्थित होते हैं. जिले के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु जल लाकर बाबा के मस्तक पर चढ़ाते हैं. 22 जुलाई को श्रावण मास का पहला सोमवार है. मंदिर को बांस से घेरने का काम शुरू हो चुका है. भक्तों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए सोमवार सुबह से कांकसा थाने की पुलिस की कड़ी निगरानी उक्त मंदिर में रहेगी. मंदिर के स्वयंसेवक भी तैनात रहेंगे. भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जायेगी. इस मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारी कहानियां मौजूद हैं. कहा जाता है कि यदि भक्त श्रद्धा और गहरे विश्वास के साथ पूजा करते हैं तो उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह प्राचीन मंदिर वर्तमान में स्मारक मंदिर के रूप में पुरातत्व विभाग के अधीन है. पुलिस के अलावा मंदिर समिति भी श्रद्धालुओं पर नजर रखती है ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola