कर्मचारियों की कमी से हो रहे हैं रेल हादसे : सैकिया

Updated at :07 May 2017 9:20 AM
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कर्मचारियों की कमी से हो रहे हैं रेल हादसे : सैकिया

सिर्फ ट्रेनों के बढ़ाने से नहीं होगा रेलवे का विकास भारतीय रेलवे में दो लाख से भी अधिक पर अभी भी खाली कर्मचारियों पर काम का बोझ अधिक, खाली पद जल्दी भरे जाएं सिलीगुड़ी : ट्रेन हादसों की मुख्य कर्मचारियों की कमी है. ट्रेनों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी ड्राइवरों और गार्ड के कंधों पर […]

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सिर्फ ट्रेनों के बढ़ाने से नहीं होगा रेलवे का विकास
भारतीय रेलवे में दो लाख से भी अधिक पर अभी भी खाली
कर्मचारियों पर काम का बोझ अधिक, खाली पद जल्दी भरे जाएं
सिलीगुड़ी : ट्रेन हादसों की मुख्य कर्मचारियों की कमी है. ट्रेनों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी ड्राइवरों और गार्ड के कंधों पर ही होती है. लेकिन रेलवे में ड्राइवरों और गार्ड की कमी है. जो हैं उनसे क्षमता से भी अधिक समय तक काम करवाया जाता है. काम के बोझ से ही देश भर में आये दिन ट्रेन हादसे होते रहते हैं. यह दावा किया है पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे कर्मचारी संगठन (एनएफआरइयू) के महासचिव मुनिंद्र सैकिया ने. वह शनिवार को सिलीगुड़ी में रेलवे कर्मचारी संगठन के एक कार्यक्रम के दौरान प्रेस को संबोधित कर रहे थे.
श्री सैकिया का कहना है कि ट्रेन हादसों तब-तक कमी नहीं आ सकती, जब-तक मैन पावर नहीं बढ़ाये जाते. हर साल जिस स्तर पर नयी ट्रेने बढ़ायी जाती हैं उसके अनुपात रिक्त पदों पर बहाली नहीं होती है. ट्रेनों के बढ़ाने से रेलवे का विकास संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पूरे देश में 22 हजार से भी अधिक ट्रेने हर रोज दौड़ती है.
जबकि भारतीय रेलवे में दो लाख से भी अधिक विभिन्न पदों पर अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी है. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए श्री सैकिया ने स्वीकार किया कि उत्तर बंगाल का डुवार्स इलाका वन क्षेत्र है. रेलवे के विकास हेतु डुवार्स के लाटागुड़ी व अन्य क्षेत्रों में अंधाधुंध पेड़ काटे जाने संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इसकी सटीक जानकारी उनके पास नहीं है. अगर ऐसा हुआ है तो यह केवल वन्य-प्राणियों के लिए ही नहीं बल्कि मानवता के हिसाब से भी सही नहीं है. पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में है. ऐसे में पेड़-पौधों को काटने के बजाय इनकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.
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