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मालदा में 300 से 400 रुपये विजिटिंग फीस ले रहे डॉक्टर, डॉक्टरी फीस पर मुखर हुए मानवाधिकार संगठन

मालदा: मालदा के अधिकतर डॉक्टर मरीज देखने की फीस (विजिटिंग फीस) लगातार बढ़ाते जा रहे हैं, जिसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है. जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों के इस मसले से हाथ खींच लेने के बाद विभिन्न मानवाधिकार संगठन आंदोलन में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. साथ […]

मालदा: मालदा के अधिकतर डॉक्टर मरीज देखने की फीस (विजिटिंग फीस) लगातार बढ़ाते जा रहे हैं, जिसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है. जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों के इस मसले से हाथ खींच लेने के बाद विभिन्न मानवाधिकार संगठन आंदोलन में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. साथ ही राज्य और जिला प्रशासन से अधिकतम विजिटिंग फीस तय करने के लिए ज्ञापन देने का भी निर्णय लिया गया है.

इस बारे में जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर दिलीप मंडल ने बताया कि निजी चिकित्सकों की विजिटिंग फीस के संबंध में कोई सरकारी निर्देशिका नहीं है. यह उन डॉक्टरों का व्यक्तिगत विषय है. हालांकि अगर उनके पास कोई शिकायत आती है, तो वह उसे देखेंगे.

मालदा शहर का केजे सान्याल रोड और मकदूमपुर इलाका डॉक्टर लेन के रूप में जाना जाता है. इसके अलावा भी शहर के कई इलाकों में डॉक्टरों के निजी पैक्टिश के चेंबर हैं. रोगियों और उनके परिजनों का कहना है कि कई डॉक्टरों ने अपनी विजिटिंग फीस 300 से 400 रुपये कर दी है. कोई-कोई तो 500 रुपये भी ले रहा है. कई जगहों पर मरीज का नाम लिखे जाते समय 20 रुपये अलग से रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में वसूले जा रहे हैं. जबकि कुछ महीने पहले शहर के अधिकतर डॉक्टरों के विजिटिंग फीस 200 से 250 रुपये थी. लेकिन दिन-पर-दिन फीस बढ़ने से इलाज कराना काफी महंगा होता जा रहा है.

गणतांत्रिक अधिकार रक्षा समिति के जिला सचिव जिशु राय चौधरी ने कहा कि एक गरीब व्यक्ति के लिए डॉक्टर को दिखाने के लिए 400 रुपये का इंतजाम करना मुश्किल है. आम लोगों के लिए इलाज उनकी पहुंच से दूर होता जा रहा है. बहरमपुर के सांसद अधीर चौधरी डॉक्टरों के फीस के सवाल पर आंदोलन में गये थे. उनके इलाके में डॉक्टरों की विजिटिंग फीस तय कर दी गयी है. हाल ही में दिनहाटा के तृणमूल विधायक उदयन गुहा ने डॉक्टरों की फीस को लेकर आवाज उठायी है. लेकिन मालदा में तृणमूल के नेता इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि गरीब मरीजों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरी फीस कम की जाये. इस विषय को हमलोग प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने भी उठायेंगे.

गौड़ बांग्ला ह्यूमन राइट्स अवेयरनेस सेंटर के जिला सचिव मृंत्युजय दास ने कहा कि आम लोगों के मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है. लोगों पर जोर-जुल्म हो रहा है. जिस तरीके से डॉक्टर आये दिन अपनी फीस बढ़ा रहे हैं और आम आदमी मुश्किल में पड़ रहा है, उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता. डॉक्टरों की अधिकतम फीस तय करने के लिए हमलोग प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लिखित रूप से अपनी शिकायत देंगे.

तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डॉक्टर मोअज्जम हुसैन ने बताया कि एक राजनीतिक दल के रूप में इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है. कौन डॉक्टर किस हिसाब से फीस लेगा, यह प्रशासन को देखना होगा. वहीं आइएमए की जिला अध्यक्ष डॉक्टर सुष्मिता सरकार ने कहा कि कौन डॉक्टर कितनी विजिटिंग फीस लेगा, इस बारे में कोई नियमावली नहीं है. फिर भी अगर कोई हमारे संगठन को लिखित शिकायत देता है, तो हम इसे लेकर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ चर्चा में बैठेंगे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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