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दुर्गा पूजा भी कटाव से प्रभावित

मालदा. मालदा जिले के मानिकचक इलाके में सैकड़ों कटाव प्रभावितों की तरह ही दुर्गा देवी भी कटाव प्रभावित हैं. गंगा नदी ने आम लोगों के घरों के साथ-साथ देवी के मंदिर को भी लील लिया है. इस बार मानिकचक दियारा सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी के लोग पूजा आयोजन के लिए जमीन की तलाश में जुट गये […]

मालदा. मालदा जिले के मानिकचक इलाके में सैकड़ों कटाव प्रभावितों की तरह ही दुर्गा देवी भी कटाव प्रभावित हैं. गंगा नदी ने आम लोगों के घरों के साथ-साथ देवी के मंदिर को भी लील लिया है. इस बार मानिकचक दियारा सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी के लोग पूजा आयोजन के लिए जमीन की तलाश में जुट गये हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ इस साल इस तरह की समस्या आ रही है.

पिछले 15-17 सालों से यह समस्या बनी हुई है. 1999 में गंगा नदी के कटाव में दुर्गा मंदिर के समा जाने के बाद हर वर्ष ही जहां-तहां जमीन मिलने पर पूजा का आयोजन होता है. आयोजन समिति के संयुक्त सचिव अरुण रजक का कहना है कि मानिकचक के दालू टोला ग्राम पंचायत के अधीन जमींदारी गांव में पिछले 125 साल से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है.

वर्ष 1999 तक इसी गांव में स्थित एक दुर्गा मंदिर में पूजा का आयोजन होता था. 1999 में इस मंदिर के गंगा नदी में समा जाने के बाद से जगह-जगह पूजा का आयोजन होता है. 1999 के बाद मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर बेचू टोला गांव में इस पूजा की शुरूआत हुई. वर्ष 2007 में बेचू टोला गांव भी गंगा नदी में विलीन हो गया. उसके बाद मदन टोला गांव में दुर्गा पूजा की शुरूआत हुई. एक स्थायी मंदिर का निर्माण किया गया. वर्ष 2010 में यह इलाका भी नदी कटाव में डूब गया. श्री रजक ने आगे कहा कि 2010 के बाद मानिकचक स्टैंड के निकट पूजा की शुरूआत की गई. उसके बाद रमेश मंडल नामक एक व्यक्ति के आम बागान में भी पूजा का आयोजन किया गया. बाद में रमेश मंडल को लगा कि पूजा के बहाने उनके जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है. वह पूजा के आयोजन में बाधा देने लगे. फिर भी 2013 तक वहां पूजा का आयोजन किया गया.

उसके बाद और दो साल छोटे स्तर पर पूजा का आयोजन हुआ. इस बार श्री मंडल किसी भी कीमत पर अपने आम बागान में पूजा करने देने को तैयार नहीं हैं. एक बार फिर से देवी दुर्गा की पूजा के लिए नयी जगह की तलाश शुरू हो गई है. पूजा आयोजन समिति के अन्य सदस्य तारक चन्द्र दास, माया मंडल आदि का कहना है कि नदी के कटाव से वह लोग भी विस्थापित हैं और देवी दुर्गा भी विस्थापित हो गई हैं.

दालू टोला गांव में सभी के घर-वार थे. गंगा के भीषण कटाव में सबकुछ खत्म हो गया. तब से लेकर अब तक वह सभी लोग अपने स्थायी घर की तलाश में जुटे हुए हैं. जिस तरह से उन्हें कोई स्थायी शरण नहीं मिला है, उसी तरह से दुर्गा देवी भी एक तरह से शरणार्थी हैं. ऐसा लगता है कि दुर्गा देवी भी हमलोग की तरह ही बेघर हैं. एक साल किसी जगह पर पूजा का आयोजन हो गया, तो जमीन मालिक दूसरे साल पूजा नहीं करने देते हैं. इस बीच, इन तमाम परेशानियों के बाद भी सभी लोग इस साल भी दुर्गा पूजा की तैयारी में जोर-शोर से लगे हुए हैं. कटाव प्रभावितों का कहना है कि भले ही उन्हें घर-वार नहीं मिले, लेकिन दुर्गा जी के लिए एक मंदिर की व्यवस्था वह सभी लोग करेंगे.

Prabhat Khabar Digital Desk
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