सारधा घोटाले में कब हुई थी कुणाल घोष की गिरफ्तारी ?

Published at :02 Aug 2016 7:21 AM (IST)
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सारधा घोटाले में कब हुई थी कुणाल घोष की गिरफ्तारी ?

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम फिर से एक बार राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर है. डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिखित परीक्षा में निगम के प्रश्न पत्र पर विवाद शुरू हो गया है. प्रश्न पत्र में पूछा गया है कि कुणाल घोष कब गिरफ्तार हुए? इस विवादित प्रश्न को लेकर निगम के […]

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम फिर से एक बार राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर है. डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिखित परीक्षा में निगम के प्रश्न पत्र पर विवाद शुरू हो गया है. प्रश्न पत्र में पूछा गया है कि कुणाल घोष कब गिरफ्तार हुए? इस विवादित प्रश्न को लेकर निगम के विरोधी दल तृणमूल ने आंदोलन का आगाज कर दिया है. राज्य के पर्यटन मंत्री व जिला तृणमूल अध्यक्ष गौतम देव ने नगर निगम के खिलाफ जोरदार आंदोलन करने का ऐलान किया है.

गौरतबल है कि सिलीगुड़ी नगर निगम में डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिये लिखित परीक्षा हुयी थी. इस रिक्त पद के लिये जुलाई महीने के पहले सप्ताह में विज्ञापन दिया गया था. इसके बाद उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों से यहां तक कि बिहार के किशनगंज और दक्षिण बंगाल के भी काफी उम्मीदवार परीक्षा देने आये थे. इसके बाद आवेदकों की मौखिक परीक्षा हुयी और टाईपिंग टेस्ट लिया गया. मौखिक और टाईपिंग टेस्ट में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही लिखित परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गयी थी. शनिवार को परीक्षा कक्ष से निकलने के बाद कुणाल घोष संबधित प्रश्न को लकर परीक्षार्थियों के बीच चरचा रही. प्रश्न पत्र के दूसरे नंबर पेज पर यह प्रश्न था. प्रश्न नंबर 13 में पूछा गया कि सारधा घोटाले में शामिल कुणाल घोष कब गिरफ्तार हुए. यह प्रश्न साधारण ज्ञान विषय में शामिल था. सभी प्रश्न बहुविकल्पी थे. इस प्रश्न के लिये भी चार विकल्प दिये गये थे. अदालत में एक विचाराधीन मामले को प्रश्नपत्र में शामिल किये जाने से निगम में विरोधी दल तृणमूल काफी गरम है. तृणमूल ने आंदोलन की तैयारी कर दी है. सिलीगुड़ी नगर निगम के विरोधी दल नेता नांटू पाल ने बताया कि मेयर बहाली के नाम पर भी राजनीति कर रहे हैं. मेयर की ऐसी राजनीति का तृणमूल विरोध करती है. इसको लेकर जोरदार आंदोलन किया जायेगा.

सिलीगुड़ी नगर निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने के लिये मेयर द्वारा तय एक पैनल से शिक्षकों की एक कमिटी गठित की गयी. इस कमिटी ने यह प्रश्न पत्र तैयार किया था.

जिला तृणमूल अध्यक्ष व राज्य पर्यटन मंत्री गौतम देव ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीति करना सिलीगुड़ी वासियों के लिये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. सारधा चिटफंड कांड वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है. अदालत में विचाराधीन एक मामले को किस प्रकार से प्रश्न बनाया जा सकता है? श्री देव ने कहा कि सिलीगुड़ी नगर निगम में एक ओछी मानसिकता पैदा हो रही है और तृणमूल इसकी घोर निंदा करती है. इस मामले को लेकर आगामी दिनों में सिलीगुड़ी नगर निगम के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जायेगा.

इस संबध में सिलीगुड़ी नगर निगम के चेयरमैन दिलीप सिंह ने कहा कि इस प्रश्न से निगम के मेयर या मेयर परिषद सदस्य का कोई लेना देना नहीं है. प्रश्नपत्र बनाने के लिये एक कमिटी गठित की गयी थी. प्रश्नों का चुनाव करना कमिटी का मसला था. प्रश्न बनने के बाद उसकी गोपनीयता बरकरार रखने के लिये मेयर या अन्य किसी मेयर परिषद सदस्य ने उसे नहीं देखा. तृणमूल वेवजह इस मामले को तूल दे रही है. इसे लेकर वे लोग आंदोलन कर सकते हैं लेकिन यह अनुचित होगा.

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