गुड न्यूज. मंत्री ने ली लकवाग्रस्त छात्रा के इलाज की जिम्मेदारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jul 2016 2:16 AM

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सिलीगुड़ी. ममता सरकार के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने लकवाग्रस्त एक छात्रा दीपाली राय (16) के इलाज की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने पीड़िता का कोलकाता या बेंगलुरू में बेहतरीन इलाज कराने का वादा किया है. यह वादा श्री देव ने बुधवार को सिलीगुड़ी से सटे चंपासारी के ढकनीकाटा स्थित पीड़िता के घर पर जाकर किया. […]

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सिलीगुड़ी. ममता सरकार के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने लकवाग्रस्त एक छात्रा दीपाली राय (16) के इलाज की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने पीड़िता का कोलकाता या बेंगलुरू में बेहतरीन इलाज कराने का वादा किया है. यह वादा श्री देव ने बुधवार को सिलीगुड़ी से सटे चंपासारी के ढकनीकाटा स्थित पीड़िता के घर पर जाकर किया. उन्होंने पीड़िता से बातचीत की और बीमारी की विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने पीड़िता के पिता व पेशे से राजमिस्त्री विमल राय को भी उनकी बेटी का पूरा इलाज कराने का आश्वासन दिया.

उन्होंने उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में पीड़िता का एमआरआइ और सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में सीटी स्कैन कल ही करने के लिए स्वास्थ्य अधीक्षक को निर्देश भी दिया. मंत्री के इस सहयोग के लिए दीपाली के पिता, परिजनों, पड़ोसियों और इलाकेवासियों ने आभार प्रकट किया है. विदित हो कि चार साल पहले 2012 के 27 सितंबर की शाम को दीपाली अपने साइकिल से चंपासारी स्थित श्री गुरू विद्या मंदिर स्कूल से घर लौट रही थी. तभी वह सेतु पार करने के दौरान सड़क दुर्घटना की शिकार हो गयी.

उसे हाथोंहाथ उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भरती कराया गया. दीपाली के कमर पर गंभीर चोट पहुंची और उसी रात इलाज के दौरान उसके कमर का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया. वह तभी से बिस्तर पर पड़ी है. पिता की आर्थिक अवस्था काफी दयनीय होने के कारण उसका आजतक बेहतर इलाज नहीं हो सका. इस वजह से दीपाली का चार पहले ही पढ़ाई छूट गया. वह मात्र छठी कक्षा तक ही पढ़ाई कर सकी है. मासूम दीपाली के दर्द भरे आंसू ने केवल यहीं तक थमने का नाम नहीं लिया. उसके सर से मां की ममता भी खत्म हो गयी. मां जयंती दो साल पहले 2014 में कैंसर से मारी गयी. आंसू भरे आंखों से विमल ने कहा कि आर्थिक मजबूरी के वजह से वह न तो अपनी पत्नी को बचा पाये और न ही मझली बेटी दीपाली का बेहतरीन इलाज करा पा रहे हैं. विमल का कहना है कि वह खुद अपने हाथों से लोगों के लिए मकान बनाने का काम करते हैं लेकिन खुद अपने परिवार के लिए मकान नहीं बना पाये.

वह अपनी तीन बेटियों सुवर्णा, दीपाली व मिताली के साथ ढकनीकाटा में सपन सरकार के घर में भाड़ा में रहने को मजबूर हैं. इस साल कॉलेज में प्रथम वर्ष में दाखिला लेनेवाली दीपाली की बड़ी बहन सुवर्णा पर भी लकवाग्रस्त बहन व छोटी बहन की देखभाल करने के साथ-साथ घर के कामकाज का भी पूरा बोझ आ पड़ा है.

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