जान जोखिम में डाल पार करनी पड़ती है डायना नदी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jul 2016 3:30 AM
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जलपाईगुड़ी: नागराकाटा ब्लॉक के खेरकाटा के विद्यार्थी और स्थानीय लोग तेज प्रवाह वाली डायना नदी को पैदल पार करके आने-जाने के लिए मजबूर हैं. इसके लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है. नतीजतन, बीच-बीच में हादसे होते रहते हैं. बारिश के मौसम में नदी पार करने के लिए एक नाव की व्यवस्था थी […]
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जलपाईगुड़ी: नागराकाटा ब्लॉक के खेरकाटा के विद्यार्थी और स्थानीय लोग तेज प्रवाह वाली डायना नदी को पैदल पार करके आने-जाने के लिए मजबूर हैं. इसके लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है. नतीजतन, बीच-बीच में हादसे होते रहते हैं. बारिश के मौसम में नदी पार करने के लिए एक नाव की व्यवस्था थी जो अब टूटी पड़ी है.
इधर खेरकाटा में एक अपर प्राइमरी स्कूल बनकर तैयार है, लेकिन अभी तक उसमें पढ़ाई शुरू नहीं हुई है. एक नंबर आंगराभाषा ग्राम पंचायत की खेरकाटा बस्ती में कोई हाईस्कूल, बाजार आदि नहीं है, जिसके चलते सभी लोगों को विभिन्न कामों के लिए जीवन को जोखिम में डालकर नदी पार करके नाथुआ जाना पड़ता है. विद्यार्थियों को भी नाथुआ जाना पड़ता है. इस तरह नदी पार करते हुए कई बार नदी में साइकिल, किताबें, बाजार से खरीद कर लाया जा रहा चावल, दाल, सब्जी का थैला आदि बह जाते हैं. कभी-कभी तो इंसानों के बह जाने की घटनाएं भी हो जाती हैं.
इन मुश्किलों को देखते हुए ग्रामीण बस्ती में बनकर तैयार स्कूल को जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं. टूटी पड़ी नाव की मरम्मत की भी मांग की जा रही है. लेकिन इन सबसे बढ़कर मांग यह है कि धूमपाड़ा और खेरकाटा के बीच डायना नदी पर पुल बनाकर समस्या का स्थायी समाधाना किया जाये. प्रशासन ने भी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है.
इलाके के छात्र-छात्रा विश्वनाथ राय, मालती राय, संगीता राय ने एकस्वर में कहा कि खेरकाटा में प्राइमरी स्कूल को छोड़ कोई हाईस्कूल वगैरह नहीं है. इसकी वजह से हमें पढ़ने के लिए नाथुआ जाना पड़ता है. अभी परीक्षा चल रही है. घाट पर एक नाव थी जो टूटी पड़ी है. कंधे पर साइकिल लादकर नदी पार करना पड़ता है. इस दौरान कभी साइकिल, तो कभी किताबें बह जाती हैं. हमें रोज इस तरह के खतरनाक इम्तिहान से गुजरना पड़ता है.
एक अभिभावक मुन्नी राय ने कहा कि गांव में हाईस्कूल नहीं होने की वजह से इस तरह छात्र-छात्राओं को आना-जाना पड़ता है. इस नदी पर एक पुल बन जाये, तो सभी समस्याओं का समाधान हो जाये. इलाके में रहनेवाले दशई उरांव और मोहम्मद लतीफ समेत अनेक लोगों ने इसी तरह की मांग की. तृणमूल की नागराकाटा पंचायत कमिटी के अध्यक्ष हेमंत राय ने कहा कि दो इलाकों के लोगों ने डायना नदी पर पुल की मांग की है. मैंने उनकी मांग एसडीओ के पास भेज दी है.
माल की महकमा अधिकारी ज्योर्तिमय तांती ने कहा कि हमें पता चला है कि छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों को खतरनाक हालात में नदी पार करके आना-जाना पड़ता है. फिलहाल सबसे पहले बीडीओ को नाव की मरम्मत कराने के लिए कहा गया है. औ तैयार स्कूल को जल्द चालू कराने का निर्देश दिया गया है. जहां तक पुल की मांग है तो इस मांग को ऊपरी अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि एन नंबर और तीन नंबर आंगराभाषा ग्राम पंचायत इलाके में करीब पांच हजार लोग रहते हैं. इन दोनों इलाके के लोगों को नागराकाटा आना पड़ता है. क्योंकि नागराकाटा में ही बिजली विभाग, बीडीओ, बीएलआर, सीएलआरसी समेत विभिन्न सरकारी कार्यालय हैं. बहुत से लोग नाथुआ से डायन नदी पार करके वामनडांग चाय बागान होकर आते हैं. धूमपाड़ा, केलाबाड़ी, शिकारीपाड़ा के लोग डायना नदी पाकर करके खेरकाटा होकर नागराकाटा आते हैं. इस मौसम में नदी में पानी बढ़ने पर अगर वे बानारहाट होकर वापस नागराकाटा आते हैं तो उन्हें 80 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ेगा. अगर धूमपाड़ा और खेरकाटा के बीच आधा किलोमीटर लंबा पुल बन जाये तो यह दूरी सिर्फ 18 किलोमीटर रह जायेगी. इससे पैसा और समय दोनों बचेगा. इसीलिए सभी लोग चाहते हैं कि पुल का निर्माण जल्द हो.
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