तबाही की सरकार से मुक्ति चाहते हैं लोग : दिलीप सिंह

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सिलीगुड़ी: डाबग्रमा-फूलबाड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पिछली बार वह इसी सीट से चुनाव लड़े थे और तृणमूल उम्मीदवार गौतम देव से हार गये थे. इस बार के चुनाव में भी उनका मुकाबला गौतम देव के साथ ही है. दिलीप सिंह वर्ष […]

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सिलीगुड़ी: डाबग्रमा-फूलबाड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पिछली बार वह इसी सीट से चुनाव लड़े थे और तृणमूल उम्मीदवार गौतम देव से हार गये थे. इस बार के चुनाव में भी उनका मुकाबला गौतम देव के साथ ही है. दिलीप सिंह वर्ष 1994 से लगातार नगरपालिका चुनाव जीतते आये हैं. वह दो बार सिलीगुड़ी नगर निगम के चेयरमैन रह चुके हैं और एक बार मेयर पार्षद की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली है. चुनावी मुद्दे पर आज उनके कार्यालय में विशेष बातचीत हुई. पेश है उसी बातचीत के मुख्य अंश-
प्रश्न : आपका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज तथा मंत्री गौतम देव के साथ है. ऐसे में आप किस तरह से चुनाव प्रचार कर रहे हैं और आम लोगों से आपको कितना समर्थन मिल रहा है.
उत्तर : चुनाव में कोई बड़ा नहीं होता. मुकाबला बराबर की होती है. राज्य के लोग तबाही की सरकार से मुक्ति चाहते हैं. इसी वजह से मुझे चुनाव प्रचार में आम लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. मैं सुबह अकेले ही घर से चुनाव प्रचार के लिए निकल जाता हूं. रास्ते में आम लोग मेरे साथ हो जाते हैं. वाम मोरचा के साथ-साथ कांग्रेस के समर्थक भी मेरा चुनाव प्रचार कर रहे हैं.
प्रश्न : कहते हैं कि डाबग्राम-फूलबाड़ी में तो विकास का काफी काम हुआ है. मंत्री गौतम देव दिन-रात विकास कार्यों का गुणगान करते हैं.
उत्तर : विकास का कोई भी काम नहीं हुआ है. विकास के नाम पर लोगों को ठगा गया है. पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है. मंत्री 300 करोड़ रुपये के पेयजल परियोजना लगाने की बात कर रहे थे. पांच साल हो गये, पेयजल परियोजना पर तीन पैसे भी खर्च नहीं हुए हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में एक भी नये अस्पताल का निर्माण नहीं हुआ है. स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई है. हाईस्कूल बनीं बनाये गये. दिन पर दिन आबादी बढ़ रही है और स्कूल नहीं बनाये जा रहे हैं. एशियन हाईवे के नाम पर लोगों को ठगा गया है.
प्रश्न : एशियन हाईवे प्रोजेक्ट में तो लोगों को मुआवजा मिला है?
उत्तर : बहुत ही कम लोग मुआवजा पा सके हैं. एशियन हाईवे के नाम पर लोगों को बेघर कर दिया गया है. मुआवजे की मांग को लेकर ऐसे लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश लोग गरीब हैं और तृणमूल सरकार उनकी कोई मदद नहीं कर रही है. मैंने 641 लोगों को जमीन का पट्टा देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था. जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
प्रश्न : आपके इलाके में तो बंगाल सफारी पार्क बन गया है?
उत्तर : बंगाल सफारी पार्क से गरीबों का कोई भला नहीं हो रहा है. जो गरीब जंगलों से लकड़ी चुनकर अपनी चूल्हा जलाते थे उनके जंगल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है. वन-बस्ती के लोगों को खदेड़ दिया गया है. बंगाल सफारी पार्क से सिर्फ तृणमूल से जुड़े ठेकेदारों को फायदा हुआ है.
प्रश्न : ममता बनर्जी तथा तृणमूल कांग्रेस तो विकास के नाम पर ही चुनाव लड़ रही है?
उत्तर : विकास कहां है? कल-कारखाने नहीं खुल रहे हैं. राज्य में बेरोजगारी बढ़ी है. नौकरी के नाम पर युवाओं को ठगा गया है. सरकारी नौकरी देने के नाम पर फार्म भराने के मद में बेरोजगार युवाओं से सिर्फ पैसे लिये गये. उन्हें नौकरियां नहीं दी गईं. तृणमूल सरकार में बस यही विकास हुआ है. भ्रष्टाचार का विकास हुआ है. सारधा तथा रोजवैली जैसे कांड हुए हैं.
प्रश्न : निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण चुनाव को लेकर आप कितने आश्वस्त हैं?
उत्तर : मुझे चुनाव आयोग पर पूरा भरोसा है. मुझे उम्मीद है कि चुनाव निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण होंगे. घटते जनाधार तथा चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी की वजह से तृणमूल नेताओं के पैरों तले ही जमीन खिचक गई है. मुझे उम्मीद है कि इस बार के चुनाव में मेरी ही जीत होगी.
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