चुनावी दावंपेंच: मतदान से पहले तृणमूल को तगड़ा झटका
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव में मतदान के ठीक पहले सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने सोमवार को पार्टी का साथ छोड़ दिया है. यह दोनों ही अपने कई समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये.सिलीगुड़ी में 17 को मतदान होना है़ प्रमुख चाय श्रमिक नेता तथा […]
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सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव में मतदान के ठीक पहले सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने सोमवार को पार्टी का साथ छोड़ दिया है. यह दोनों ही अपने कई समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये.सिलीगुड़ी में 17 को मतदान होना है़ प्रमुख चाय श्रमिक नेता तथा दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चक्रवर्ती ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. उनके पार्टी छोड़ने की चरचा पिछले कई दिनों से चल रही थी. आखिरकार उन्होंने तृणमूल से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में शामिल हो गये. आलोक चक्रवर्ती उत्तर बंगाल की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं.
इससे पहले वह कांग्रेस में थे. वह आइएनटीटीयूसी के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष भी हैं. तीन साल पहले वह कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे. इस बार विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी सीट से वर्तमान तृणमूल विधायक रूद्रनाथ भट्टाचार्य का टिकट कटना तय था. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस सीट से आलोक चक्रवर्ती टिकट के प्रबल दावेदार थे. उन्होंने टिकट के लिए काफी माथा-पच्ची भी की. बाद में तृणमूल कांग्रेस ने रूद्रनाथ भट्टाचार्य के स्थान पर बाइचुंग भुटिया को टिकट दे दिया. तब से लेकर अब तक आलोक चक्रवर्ती बाइचुंग भुटिया के चुनाव प्रचार में कहीं नहीं दिखे. उसके बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने के कयास लगाये जा रहे थे.
आलोक चक्रवर्ती के साथ ही आदिवासी नेता ज्योति तिरकी ने भी तृणमूल छोड़ दिया है. वह सिलीगुड़ी महकमा परिषद की सभाधिपति भी रह चुकी हैं. कुछ साल पहले वह भी माकपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थी और तृणमूल कांग्रस ने उन्हें महकमा परिषद का सभाधिपति बना दिया था. हाल ही में सपंन्न महकमा परिषद चुनाव में ज्योति तिरकी हार गई. इस हार की वजह उन्होंने तृणमूल के कई नेताओं को बताया था. उन्होंने कहा था कि तृणमूल के ही कई नेता उनको हराने में लगे हुए थे.
महकमा परिषद का चुनाव सामने आने के बाद से ही वह बागी हो गई थी. तब भी उन्होंने पार्टी छोड़ने की धमकी दी थी. उस समय उत्तर बंगाल विकास मंत्री तथा तृणमूल के वरिष्ठ नेता गौतम देव ने समझा-बुझाकर मामले को शांत कर दिया था. आखिरकार आज उन्होंने भी पार्टी को अलविदा कह दिया. आलोक चक्रवर्ती और ज्योति तिरकी सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हो गये. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कांग्रेस का झंडा थमाकर दोनों का पार्टी में स्वागत किया.
क्या कहते हैं अधीर चौधरी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आलोक चक्रवर्ती तथा ज्योति तिरकी का पार्टी में जोरदार स्वागत किया. आलोक चक्रवर्ती के संबंध में उन्होंने कहा कि वह रास्ता भटक कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे. आखिरकार उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और वह पार्टी में वापस लौट गये. पार्टी उन्हें पहले जैसा सम्मान देगी.
क्या कहते हैं आलोक चक्रवर्ती
आलोक चक्रवर्ती का कहना है कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से बातचीत के बाद ही वह तृणमूल कांग्रेस में तीन साल पहले शामिल हुए थे. तृणमूल ने कभी भी उन्हें वह इज्जत नहीं दी, जो उन्हें मिलनी चाहिए थी. उचित सम्मान नहीं मिलने की वजह से वह काफी पहले ही तृणमूल छोड़ना चाहते थे. उन्होंने ममता बनर्जी पर भी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि तृणमूल में शामिल होने से पहले ममता बनर्जी ने उनसे कई वादे किये थे. बाद में वह सभी वादों से मुकर गईं. कांग्रेस में वह एक बार फिर से घर वापसी कर रहे हैं.
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