सॉफ्टवेयर आने से आयोग के पास शिकायतों की आयी बाढ़

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सिलीगुड़ी. पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से दो नये सॉफ्टवेयर ‘सुविधा’ व ‘समाधान’ लांच किये गये है. इन सॉफ्टवेयरों से राजनीतिक दलों को काफी लाभ मिल रहा है, लेकिन वे अपने राजनीतिक फायदे के लिए दूसरी पार्टियों के खिलाफ झूठे मामले और बेवजह की शिकायतें भी दर्ज करा रहे हैं. […]

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सिलीगुड़ी. पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से दो नये सॉफ्टवेयर ‘सुविधा’ व ‘समाधान’ लांच किये गये है. इन सॉफ्टवेयरों से राजनीतिक दलों को काफी लाभ मिल रहा है, लेकिन वे अपने राजनीतिक फायदे के लिए दूसरी पार्टियों के खिलाफ झूठे मामले और बेवजह की शिकायतें भी दर्ज करा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि पहले किसी भी प्रकार की समस्या या आरोप की लिखित जानकारी चुनाव आयोग को भेजने पड़ती थी. इस पर उठाये गये कदमों को लेकर राजनीतिक पार्टियां प्रशासन व आयोग पर रह-रह कर सवाल खड़े करती रहती थीं. इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर इस चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से सुविधा और समाधान नामक दो सॉफ्टवेयर लांच किये गये. राजनीतिक पार्टियों को आयोग से हमेशा ही एक शिकायत रही है कि आयोग ने जानबूझ कर सभा या रैली करने की अनुमति नहीं दी या अनुमति देने में देरी की. इसके अतिरिक्त आयोग भी सत्ताधारी पार्टी का होकर काम रहा है.

इन सब आरोपों को दूर करने के लिए सुविधा को लाया गया है. इस सॉफ्टवेयर के जरिए कोई भी राजनीतिक पार्टी सभा, रैली आदि करने की अनुमति का आवेदन आयोग से कर सकता है. आवेदन का उत्तर 24 घंटे में देने के लिए आयोग प्रतिबद्ध है. किसी भी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ शिकायत या किसी भी समस्या की जानकारी समाधान के जरिए आयोग तक पहुंचायी जा सकती है. लेकिन इसके जरिए राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर बेवजह के आरोप भी लगाने लगी हैं. गत 17 मार्च को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुडविल रैक को सिलीगुड़ी के निकट रानीडांगा से बांग्लादेश के लिए रवाना किया. इस कार्यक्रम की मंजूरी केंद्रीय चुनाव आयोग ने दी थी. लेकिन 18 मार्च को दार्जिलिंग जिला तृणमूल के एक नेता ने समाधान के जरिए इस कार्यक्रम को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए शिकायत की है.

जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सिलीगुड़ी के हाशमी चौक पर एक सभा को संबोधित करने के लिए बनाये गये स्टेज को लेकर एक माकपा के युवा नेता ने 14 मार्च को मामला दर्ज कराया है. राजनीतिक पार्टियों की बैनर, होर्डिंग को मामले तो रोजाना आ रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कई नेता तो ऐसे हैं जो केवल सॉफ्टवेयर की जांच के लिए मामला दर्ज कराते हैं.

चुनाव की घोषणा होने के बाद से अब तक का ब्योरा खंगालने के बाद सबसे मजेदार बात यह पता चली है कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद चुनाव के समय सबसे ज्यादा अशांत रहने वाला माटीगाड़ा, नक्सलबाड़ी इलाका अब तक शांत है. इन इलाकों से अब तक एक भी शिकायत दर्ज नहीं करायी गयी है.

फांसीदेवा के एक चाय बागान में तृणमूल के झंडे लगे होने की शिकायत माकपा के महबूब आलम ने करायी है. इसके अलावा इन इलाकों से अब तक अन्य समस्या व शिकायत सामने नहीं आयी है. इधर सिलीगुड़ी विधानसभा इलाके में अब तक कुल 22 मामले दर्ज कराए जा चुके है. अधिकारियों के मुताबिक इनमें से कई आधारहीन पाये गये है. इसके अलावा अन्य वास्तविक मामलों का निपटारा 24 घंटे के भीतर कर आवेदक को प्रतिउत्तर देकर संतुष्ट कर दिया गया है.

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