धूपगुड़ी विस : एक बार फिर ममता बनाम मिताली की जंग

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भाजपा के अगुन भी मैदान में तृणमूल ने झोंकी पूरी ताकत गंठबंधन नेता भी दिन-रात कर रहे हैं एक जलपाईगुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुड़ी विधानसभा सीट पर एक बार फिर से ममता बनाम मिताली की जंग देखने को मिलेगी. वर्ष 2011 के चुनाव में भी यह दोनों मैदान में थे तब मिताली राय ममता […]

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भाजपा के अगुन भी मैदान में तृणमूल ने झोंकी पूरी ताकत गंठबंधन नेता भी दिन-रात कर रहे हैं एक
जलपाईगुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुड़ी विधानसभा सीट पर एक बार फिर से ममता बनाम मिताली की जंग देखने को मिलेगी. वर्ष 2011 के चुनाव में भी यह दोनों मैदान में थे तब मिताली राय ममता राय से काफी पिछड़ गई थी. 2011 के विधानसभा चुनाव में मिताली राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चौथे स्थान पर रही थी, जबकि माकपा की ममता राय ने बाजी मार ली थी.
इस बार परिस्थिति कुछ अलग है. मिताली राय तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और उनका सीधा मुकाबला ममता राय के साथ होने की संभावना है.
इस विधानसभा सीट पर स्थिति करीब-करीब साफ हो गई है. मुख्य रूप से इन्हीं दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की संभावना दिख रही है. हालांकि भाजपा उम्मीदवार अगुन राय भी मैदान में हैं.
वह मुकाबले को तितरफा बना सकते हैं. इन तीनों को यदि छोड़ दिया जाये, तो और कोई प्रमुख उम्मीदवार मैदान में नहीं है. भाजपा ने भले ही यहां से अगुन राय को मैदान में उतार दिया है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि यह सीट शुरू से ही वाम मोरचा का गढ़ रहा है. कभी भी भाजपा उम्मीदवार को यहां सफलता नहीं मिली. 1977 के बाद से इस सीट पर माकपा का कब्जा है.
1972 में अंतिम बार कांग्रेस के भवानी पाल यहां से चुनाव जीते थे. उसके बाद 1977, 1982, 1987, 1991, 1996, 2001, 2006 तथा 2011 में माकपा की जीत हुई. वर्ष 2011 में परिवर्तन की आंधी में भी माकपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बनाये रखा. 2011 के चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर थी. हालांकि खास बात यह है कि भाजपा उम्मीदवार अमरचन्द्र सरकार करीब दस प्रतिशत से भी अधिक मत लाने में कामयाब रहे थे.
पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बीच धूपगुड़ी इलाके में भी भाजपा करीब 12 प्रतिशत से अधिक मत पाने में कामयाब रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए अगुन राय इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगा रहे हैं. भाजपा उम्मीदवार अगुन राय का कहना है कि लोक सभा चुनाव के बाद से भाजपा की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी है. वह तो धूपगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने तक का दावा कर रहे हैं.
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक ऐसा नहीं मान रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य मुकाबला तृणमूल और वाम मोरचा के बीच है. वाम मोरचा उम्मीदवार ममता राय को कांग्रेस का भी समर्थन हासिल है. वह गठबंधन उम्मीदवार हैं.
उनके समर्थन में गठबंधन के नेता दिन रात एक कर रहे हैं.ममता राय के साथ ही तृणमूल की मिताली राय भी अपनी जीत का दावा कर रही हैं. मिताली राय का कहना है कि मतदाता ममता बनर्जी को देखकर वोट करेंगे. राज्य में परिवर्तन के बाद तृणमूल सरकार ने राज्य का काफी विकास किया है. विकास के लिए ममता बनर्जी दिन-रात एक कर रही हैं.
इधर, वर्ष 2011 के चुनाव परिणाम पर विचार करें तो इस सीट पर मुकाबला कांटे की है. पिछले विधानसभा चुनाव में वाम मोरचा की ममता राय करीब ढ़ाई हजार वोट से जीतने में ही सफल रही थी.
ममता राय को 42.25 प्रतिशत यानि 73 हजार 644 वोट मिला था, जबकि उनकी निकटतम उम्मीदवार तृणमूल की मीना बर्मन भी करीब 40 प्रतिशत वोट पाने में कामयाब रही थी. उन्हें 69 हजार 406 वोट मिले थे. भाजपा के अमरचन्द्र सरकार 18559 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे.
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