सभी विपक्षी हुए गोलबंद, गोजमुमो के साथ मुख्य मुकाबले की उम्मीद, शांता छेत्री को ममता का सहारा
सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों में से एक कर्सियांग विधानसभा सीट पर न केवल आम लोग, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं. इस सीट से तृणमूल कांग्रेस ने कभी गोरामुमो की नेता रही शांता छेत्री को तृणमूल कांग्रेस ने मैदान में उतारा है. तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए भी […]
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए भी इस सीट के लिए काफी अहमियत है. यही वजह है कि वह अपने उत्तर बंगाल दौरे के दौरान कर्सियांग में भी चुनावी जनसभा कर रही हैं. तृणमूल समर्थकों का मानना है कि ममता बनर्जी की इस जनसभा से सिर्फ कर्सियांग में ही नहीं, बल्कि पूरे पर्वतीय क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण में काफी बदलाव होने की संभावना है. जाहिर तौर पर शांता छेत्री भी ममता बनर्जी की इसी जनसभा के सहारे चौथी बार विधानसभा पहुंचने की उम्मीद लगाये बैठी हैं. कर्सियांग विधानसभ सीट दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के अधीन है. कर्सियांग के अलावा मिरिक, गोराबाड़ी, लोअर सोनादा, मुंडाकोठी, अपर सोनादा, जोरबंगलो सुकियापोखरी, रगली-रंगलियट आदि इलाके को लेकर इस विधानसभा सीट का गठन किया गया है. तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार शांता छेत्री इससे पहले गोरामुमो की टिकट पर तीन बार यहां से चुनाव जीत चुकी हैं. वर्ष 1996, 2001 तथा 2006 में शांता छेत्री यहां से विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुई थीं. तब से लेकर अब तक पहाड़ की राजनीति में काफी बदलाव आ चुका है.
जिस गोरामुमो के दमखम पर शांता छेत्री विधानसभा पहुंची थी, वही गोरामुमो अब पहाड़ पर काफी कमजोर स्थिति में है. पार्टी के संस्थापक सुभाष घीसिंग परलोक सिधार चुके हैं. उनके पुत्र मन घीसिंग पार्टी के अध्यक्ष तो बन गये हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह अपनी पार्टी को मजबूत नहीं कर पा रहे हैं. आलम यह है कि इस बार विधानसभा चुनाव में गोरामुमो के लड़ने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. इस पार्टी ने अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा तक नहीं की है. संभावना यह जतायी जा रही है कि गोरामुमो अंतिम क्षणों में तृणमूल कांग्रेस का समर्थन कर दे. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरामुमो की जगह अब गोजमुमो ने ले ली है. वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में पहाड़ की तीनों सीटों पर गोजमुमो की जीत हुई थी. कर्सियांग में भी तृणमूल उम्मीदवार शांता छेत्री का मुख्य मुकाबला गोजमुमो उम्मीदवार से ही होने की संभावना है. अगले एक-दो दिनों में बिमल गुरूंग अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे. कर्सियांग में तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार शांता छेत्री को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा. उनके खिलाफ विपक्ष पूरी तरह से गोलबंद हो गया है. वाम मोरचा ने पहले ही अपने उम्मीदवार नहीं देने तथा गोजमुमो उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा की है. कांग्रेस द्वारा भी गोजमुमो के ही समर्थन किये जाने की संभावना जतायी जा रही है. पहाड़ के अन्य राजनीतिक दलों अभागोली, क्रामाकपा आदि की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं है. ऐसा माना जा रहा है कि अभागोली तृणमूल का समर्थन कर सकती है.
जबकि क्रामाकपा द्वारा उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है. फिर भी इन दोनों दलों के संबंध में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता. अभागोली नेता प्रताप खाती का कहना है कि विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी पार्टी एक-दो दिनों में निर्णय लेगी. इस बीच, मंगलवार तक कर्सियांग विधानसभा सीट पर दो उम्मीदवार मैदान में हैं. तृणमूल की शांता छेत्री के अलावा गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्रुव देवान मैदान में हैं. अगर वर्ष 2011 के चुनाव परिणामों की बात करें तो गोजमुमो के रोहित शर्मा ने 74 प्रतिशत मत लेकर भारी जीत हासिल की थी.
उनके निकटतम प्रतिद्वंदी गोरामुमो के पेमू छेत्री मात्र 13 प्रतिशत मत ही पा सके थे. रोहित शर्मा ने करीब 90 हजार से भी अधिक वोटों से जीत हासिल की थी. गोजमुमो के रोहित शर्मा कुछ महीने पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मतभेद के बाद गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग ने अपने तीनों विधायकों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था. तब दार्जिलिंग के विधायक ने अपने पद के साथ-साथ गोजमुमो से भी इस्तीफा दे दिया था. जबकि कालिम्पोंग के विधायक हर्क बहादुर छेत्री पार्टी छोड़ दी, लेकिन विधायक पद पर बने रहे. रोहित शर्मा अकेले बचे जिन्होंने पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर विधायक पद से इस्तीफा दिया. माना जा रहा है कि बिमल गुरूंग उन्हें फिर से उम्मीदवार बना सकते हैं.
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