एबीटीए टेस्ट पेपर की धड़ल्ले से हो रही कालाबाजारी

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सिलीगुड़ी. पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा आगामी 15 फरवरी से शुरू हो रही है. परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिये छात्र जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. परीक्षा की अच्छी तैयारी के लिये छात्र टेस्ट पेपर का सहारा लेते हैं. छात्रों के इसी मौके का फायदा पुस्तक कारोबारी उठा रहे है़ […]

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सिलीगुड़ी. पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा आगामी 15 फरवरी से शुरू हो रही है. परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिये छात्र जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. परीक्षा की अच्छी तैयारी के लिये छात्र टेस्ट पेपर का सहारा लेते हैं. छात्रों के इसी मौके का फायदा पुस्तक कारोबारी उठा रहे है़ काफी अधिक कीमत पर टेस्ट पेपर बेचे जा रहे हैं. एबीटीए टेस्ट पेपर की अधिकतम कीमत 85 रूपये है़ उसके बाद भी दुकानदार छात्रों से 130 से 150 रूपये तक वसूल रहे हैं. सब कुछ जानने के बाद भी प्रशासन के लोग चुप्पी साधे बैठे हैं.

यहां उल्लेखनीय है कि वामदल समर्थित ऑल बंगाल टीचर्स एसोशिएसन(एबीटीए) पहले से ही एबीटीए टेस्ट पेपर का प्रकाशन करती आ रही है. इसके अतिरिक्त कांग्रेस समर्थित शिक्षक संगठन वेस्ट बंगाल टीचर्स एसोशिएसन(डब्लूबीटीए) नामक संगठन भी टेस्ट पेपर निकाल रही है. समस्या यह है कि एबीटीए टेस्ट पेपर का अधिकतम मूल्य 85 रूपया छपा हुआ है, जबकि डब्लूटीए टेस्ट पेपर का अधिकतम मूल्य 130 रूपया है. एबीटीए के टेस्ट पेपर पर छात्र ज्यादा भरोसा करते हैं. फलस्वरूप इसकी कालाबाजारी अधिक हो रही है.

इधर राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक के छात्रों को टेस्ट पेपर मुफ्त में दिये जाते हैं. इस वर्ष उच्च माध्यमिक के भी छात्र मुफ्त में टेस्ट पेपर पाने की ओर टकटकी लगाये हुए थे़ इस मामले में उन्हें लेकिन निराशा हाथ लगी. इसबीच,राज्य सरकार माध्यमिक को जो टेस्ट पेपर मुफ्त में देती है वह बांग्ला में होता है़ हिंदी माध्यम के विद्यालयों में भी यही टेस्ट पेपर दिया जाता है़ ऐसे में हिंदी माध्यम के छात्रों को एबीटीए टेस्ट पेपर खरीदना पड़ता है. जाहिर है इनलोगों को भी टेस्ट पेपर की उंची कीमत चुकानी पड़ती है़

इधर,उच्च माध्यमिक के छात्रों के लिये बाजार में एबीटीए व डब्लूबीटीए दोनों टेस्ट पेपर उपलब्ध हैं लेकिन मांग ज्यादा होने की वजह से दुकानदारों ने एबीटीए टेस्ट पेपर की कालाबाजारी शुरू कर दी है. जिस एबीटीए टेस्ट पेपर की कीमत 85 रूपये है उसे दुकानदार 130 से 150 रूपये में बेच रहे हैं. सबसे मजे की बात यह है कि वहलोग छात्रों को 85 रूपये का ही बिल दे रहे हैं. किताब के अधिकतम मूल्य से भी अधिक कीमत में इसे बेचना गैरकानूनी है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोइ कार्यवाही नहीं की जा रही है.

क्या कहते हैं सचिव

इस संबध में एबीटीए के दार्जिलिंग जिला सचिव तमाल चंद से बात करने पर उन्होंने बताया कि कांग्रेस के डब्लूबीटीए से अधिक छात्र एबीटीए टेस्ट पेपर पर भरोसा करते हैं. इसी का फायदा दुकानदार उठाते हैं. वह अधिक कीमत पर छात्रों को बेचते हैं जो कि गैरकानूनी है. राज्य सरकार को इस पर अविलंब कदम उठाना चाहिये. अगर कोई छात्र इसकी शिकायत उपभोक्ता कार्यालय से करे तो इस पर अवश्य कार्यवायी होगी. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो दुकानदार इस तरह की कालाबाजारी से जुड़े हुये हैं अगले वर्ष से उन्हें एबीटीए का टेस्ट पेपर आवंटित नहीं किया जायेगा बल्कि उस दुकानदार का नाम ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जायेगा.

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