नहीं रहे चाय श्रमिक नेता चित्त दे

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जलपाईगुड़ी. 22 चाय श्रमिक यूनियन के को-ऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ टी प्लांटेशन के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव व श्रमिक नेता चित्त दे की हार्ट अटैक से मौत हो गयी़ वह 87 वर्ष के थे. बीस वर्षों से अधिक समय से वह को-आर्डिनेशन कमिटी के सचिव थे.उनके निधन से पूरे डुवार्स में शाक की लहर है़ चाय […]

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जलपाईगुड़ी. 22 चाय श्रमिक यूनियन के को-ऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ टी प्लांटेशन के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव व श्रमिक नेता चित्त दे की हार्ट अटैक से मौत हो गयी़ वह 87 वर्ष के थे. बीस वर्षों से अधिक समय से वह को-आर्डिनेशन कमिटी के सचिव थे.उनके निधन से पूरे डुवार्स में शाक की लहर है़ चाय श्रमिक नेताओं का कहना है कि चित्त दे की मौत से चाय श्रमिकों के आंदोलन को भारी क्षति हुयी है.

चित्त दे ने अपने जीवनकाल में चाय श्रमिकों के लिये कई आंदोलन किये और गरीबों को हक दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे़ बोनस एवं मजदूरी वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण आंदोलन में चित्त दे ने हमेशा अपना योगदान दिया है.वह राम मनोहर लोहिया के शिष्य थे . इसके अतिरिक्त जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में भी कइ आंदोलन में वह शरीक हुए थे. वाम शासनकाल में ही चाय श्रमिकों की समस्या को लेकर को-ऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ प्लांटेशन वर्कस का गठन हुआ था.

वर्ष 1995 से स्वर्गीय चित्त दे इस कमिटी के सचिव के पद पर आसीन थे. सभी पार्टियों के लिए वह ग्रहणशील थे. उनकी मौत पर शोक व्यक्त करते हुये सीपीआईएम के पूर्व सांसद तथा सिटू के पूर्व जिला सचिव मानिक सन्याल ने बताया कि चाय श्रमिक आंदोलन के इतिहास में एक अपूरणीय क्षति हुयी है. डिफेंस कमिटी ऑफ टी प्लांटेशन कमिटी के सचिव समीर राय ने बताया कि चाय श्रमिकों के बोनस एवं मजदूरी वृद्धि जैसे कई महत्वपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने किया था़.

समाजवादी जन परिषद के पश्चिम बंगाल सचिव कमल बनर्जी ने बताया कि स्वर्गीय चित्त दे राम मनोहर लोहिया के शिष्य थे. जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में इंदिरा गांधी के समय में चल रहे आंदोलन में भी उनकी भागीदारी रही है. कइ आंदोलनों में शामिल होने की वजह से वह कई बार जेल की सजा भी काट चुके हैं.
अधिवक्ता सोमनाथ पाल ने बताया कि स्वर्गीय चित्त दे सुविधावादी चाय श्रमिक नेता नहीं थे. वर्तमान के सुविधावादी श्रमिक नेताओं से वह पूरी तरह भिन्न थे. उनकी मौत ने चाय श्रमिक आंदोलन को काफी बड़ा झटका लगा है. श्रमिकों की समस्या को जानने के लिये वह स्वयं श्रमिकों के साथ रहकर उनके साथ खाना खाकर उनके दुख को महसूस करते थे.
स्वर्गीय चित्त दे के नाती अर्जुन सरकार ने बताया कि रविवार की शाम करला वैली चाय बागान में श्रमिकों के साथ उन्होंने बैठक की थी. सोमवार की सुबह हार्ट अटैस से उनकी मौत हो गयी. चाय बागान मालिक संगठन कन्सलटेटिव कमिटी ऑफ टी प्लांटर्स एसोसिएशन के सचिव अमृतांशु चक्रवर्ती ने बताया कि एक निस्वार्थ चाय श्रमिक नेता के रूप में स्वर्गीय चित्त दे जाने जाते थे.उनकी मौत से पूरा चाय उद्योग मर्माहत है.
कइ चाय श्रमिकों ने बताया कि आज के चाय श्रमिक नेताओं के पास गाड़ी, घर कीमती मोबाईल आदि है़ जबकि किसी बैठक में शामिल होने के लिए कोलकाता जाने हेतु चित्त बाबू को दूसरे के उपर निर्भर रहना पड़ता था़ उनके पास इलाज तक के लिए पैसान नहीं होता था़ परिजनो से मिली जानकारी के मुताबिक एक सप्ताह पहले दिनबाजार इलाके में एक सड़क दुर्घटना में उनका बांया हाथ टूट गया था. प्लेट लगाने के लिये चिकित्सकों ने डेढ़ लाख रूपये का खर्च बताया था. सब की सहायता करने वाले चाय श्रमिक नेता ने किसी से आर्थिक सहायता नहीं ली. उनकी पत्नी आरती दे ने बताया कि वह काफी साधारण जीवन यापन करते थे.
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