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डुआर्स का उत्पाती ‘कानहेला’ सिलीगुड़ी के सौर्या पार्क लाया गया

जंगल का आतंक बनी पार्क की शोभा सिलीगुड़ी : डुआर्स के जंगलों में रहने वाला उत्पाती ‘कानहेला’ को आखिरकार पकड़ लिया गया. इसे सिलीगुड़ी के सौर्या पार्क में रखा गया है. सौर्या पार्क को राज्य सरकार की परियोजना के अनुसार उत्तर बंगाल वन्य जीव सफारी उद्यान बनाया जा रहा है. यह कानहेला एक गैंडा है […]

जंगल का आतंक बनी पार्क की शोभा

सिलीगुड़ी : डुआर्स के जंगलों में रहने वाला उत्पाती ‘कानहेला’ को आखिरकार पकड़ लिया गया. इसे सिलीगुड़ी के सौर्या पार्क में रखा गया है. सौर्या पार्क को राज्य सरकार की परियोजना के अनुसार उत्तर बंगाल वन्य जीव सफारी उद्यान बनाया जा रहा है. यह कानहेला एक गैंडा है जिसने वन विभाग की नाक में दम कर रखा था. कानहेला ने डुआर्स के जंगलों में उत्पात मचा रखा था. उसे जंगल से निकल कर दूसरे इलाकों में भी घूमते देखा जाता था.

अपने गरम मिजाज की वजह से अक्सर ही मीडिया में उसका नाम आता रहता था. आबादीवाले इलाके में घुसकर आतंक मचाना, तोड़-फोड़ करना, जंगल के दूसरे गैंडों के साथ भिड़ना उसकी दिनचर्या बन गयी थी. अब इस गरममिजाज गैंडे को सौर्या पार्क में सींखचों के पीछे कर दिया गया है.सिलीगुड़ी के निकट इस सौर्या पार्क को राज्य का एकमात्र सफारी पार्क बनाने की घोषणा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बहुत दिन पहले ही कर चुकी हैं एवं इस दिशा में काम भी चालू भी.

सौर्या पार्क को उत्तर बंगाल वन्य जीव सफारी उद्यान बनाने के कार्य को पांच चरण में विभाजित किया गया है जिसमें प्रथम चरण का काम करीब समाप्त की ओर है. सबकुछ ठीक रहा तो नये वर्ष के जनवरी माह में इस सफारी पार्क का उद्घाटन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथों होगा. पांचों चरण का कार्य वर्ष 2018 तक समाप्त होगा. राज्य सरकार की यह परियोजना 78 करोड़ रुपये की है. इस सफारी पार्क में विगत कुछ दिन पहले ही एक सौ के करीब हिरण को छोड़ा गया था, अब गैंडा भी लाया गया है.

कानहेला को इस सफारी पार्क में लाने की योजना वनाधिकारियों की पहले से ही थी, लेकिन इसे पकड़ना ही इनके लिए परेशानी थी. उसे पकड़ने के लिये डुआर्स के जंगल से दो हाथियों को लाया गया. इसके बाद असम वन विभाग व पश्चिम बंगाल वन विभाग की ओर से संयुक्त अभियान चलाकर कानहेला को पकड़ा गया. उसके आसपास दोनों हाथियों को खड़ाकर उसे घेरकर ट्रैंक्विलाइजर गन से नींद की दवा देकर पकड़ा गया. नये स्थान पर लाये जाने से कानहेला के शरीर में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन नहीं देखा गया है, लेकिन कानहेला ने कई बार खांचा को तोड़ने का प्रयास किया. हालांकि वह इसमें असफल रहा. इस दौरान कानहेला के शरीर पर कई जगह जख्म भी हुए हैं.

इस जख्म के इलाज के लिये चिकित्सक भी लगाये गये हैं. पार्क में मौजूद हिरणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे दूर रखा गया है. कानहेला के भोजन के लिए जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान से घास मंगायी जा रही है. उस पर विशेष निगरानी भी रखी जा रही है. उसे देखने के लिए रविवार की सुबह से कई बार परियोजना निदेशक अरुण मुखर्जी भी उपस्थित हुए. कानहेला एक नर गैंडा है, उसके साथ रहने के लिए एक मादा गैंडा को लाये जाने का भी विचार किया जा रहा है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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