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चाय बागानों में भुखमरी की समस्या गंभीर संकट

हालात : कानूनी सहायता देने के कार्यक्रम में बोलीं हाइकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संकटग्रस्त बागानों को चिह्नित कर लगायें लोक अदालत इससे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक सहायता भी मिलेगी सिलीगुड़ी. रविवार को ग्रामीणों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के एक कार्यक्रम में शिरकत करने आयीं कलकत्ता उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ मंजुला चेल्लूर […]

हालात : कानूनी सहायता देने के कार्यक्रम में बोलीं हाइकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश
संकटग्रस्त बागानों को चिह्नित कर लगायें लोक अदालत
इससे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक सहायता भी मिलेगी
सिलीगुड़ी. रविवार को ग्रामीणों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के एक कार्यक्रम में शिरकत करने आयीं कलकत्ता उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ मंजुला चेल्लूर चाय श्रमिकों की दुर्दशा पर बोलने से खुद को रोक नहीं पायीं. अपने वक्तव्य के दौरान चाय बागानों व चाय श्रमिकों की बदहाली पर उन्होंने गहरी चिंता जतायी.
न्यायमूर्ति डॉ मंजुला चेल्लूर ने कहा कि चाय श्रमिकों के सामने भुखमरी एक गंभीर संकट है. इसका सबको मिलकर जल्द निदान करने की जरूरत है. उन्होंने दार्जिलिंग जिला के ऐसे चाय बागानों को चिह्नित कर बागानों में भी लोक अदालत लगाने की सलाह दी. डॉ मंजुला ने कहा कि इससे चाय श्रमिक खुलकर अपनी समस्यों को सामने रख सकेंगे. उनकी अधिकांश समस्याएं प्रकाश में ही नहीं आतीं.
ऐसी अदालतों से श्रमिकों को केवल कानूनी सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक सहायता भी मिलेगी. इन अदालतों के मार्फत राशन, आधार कार्ड, पहचान-पत्र, बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, आवासीय समस्याओं का भी समाधान होगा. साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों की शिक्षा, प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आयेंगी और श्रमिकों को जल्द इंसाफ मिलना संभव हो पायेगा.
इसका फायदा केवल चाय श्रमिकों की नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगा.सिलीगुड़ी महकमा शासक (एसडीओ) दफ्तर व दागापुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज की संयुक्त पहल पर चंपासारी ग्राम पंचायत को विशेष कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए गोद लिये जाने की कलकत्ता उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ मंजुला चेल्लूर ने काफी तारीफ की.
यह तारीफ उन्होंने शहर से सटे दागापुर चाय बागान के मैदान में आयोजित लोक अदालत के दौरान की. मुकदमों के निपटारे की वैकल्पिक प्रणाली हेतु इस लोक अदालत को संबोधित करते हुए डॉ मंजुला ने एसडीओ, लीगल एड फोरम, बार एसोसिएशन व इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के अधिकारियों को हरेक तीन महीने पर ग्रामीणों को कानूनी सहायता देने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि ऐसी लोक अदालतों से ग्रामीणों को जल्द इंसाफ व काफी सुविधाएं मिलेंगी.
साथ ही थानों व अदालतों पर मुकदमा-मामलों का दबाव भी कम होगा. इस अदालत के दौरान डॉ मंजुला के अलावा न्यायाधीश इंद्रा बनर्जी, न्यायाधीश जयमाल्या बागची, दार्जिलिंग जिला के अधिकारी (डीएम) अनुराग श्रीवास्तव, सिलीगुड़ी कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त (सीपी) मनोज वर्मा, सिलीगुड़ी के एसडीओ राजनवीर सिंह कपूर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के चेयरमैन जयजीत चौधरी ने भी कानून की तालीम लेनेवाले विद्यार्थियों व अन्य लोगों को कई अहम कानूनी जानकारियां दीं और अपना अनुभव साझा किया.
Prabhat Khabar Digital Desk
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