अंतिम वक्त में तय हुआ रंजन सरकार का नाम

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष पद से उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव को हटाये जाने के बाद यहां अटकलों का बाजार गरम है. सिर्फ पार्टी के अंदर ही नहीं, बल्कि आम लोगों में भी इस बात की चर्चा है कि आखिरकार कैसे रंजन सरकार ने बड़े-बड़े दिग्गजों को पटकनी देकर इतना महत्वपूर्ण पद […]

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष पद से उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव को हटाये जाने के बाद यहां अटकलों का बाजार गरम है. सिर्फ पार्टी के अंदर ही नहीं, बल्कि आम लोगों में भी इस बात की चर्चा है कि आखिरकार कैसे रंजन सरकार ने बड़े-बड़े दिग्गजों को पटकनी देकर इतना महत्वपूर्ण पद पाने में सफलता हासिलक की.

तृणमूल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार जब ममता बनर्जी उत्तर बंगाल दौरे पर आयीं तो उन्होंने गौतम देव को उनके पद से हटाने का पहले से ही निर्णय ले लिया था. यही वजह है कि बगैर गौतम देव को बताये ममता बनर्जी ने अपने विश्वासपात्र अरुप विश्वास को जिला नेताओं से बातचीत कर एक रिपोर्ट बनाने के लिए कहा. ममता बनर्जी जब डुवार्स दौरा खत्म कर बुधवार को सिलीगुड़ी की सुकना लौटीं तो अरुप विश्वास ने उन्हें यह रिपोर्ट सौंप दिया. सूत्रों ने बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम तथा सिलीगुड़ी महकमा परिषद में हार की मुख्य वजह पार्टी में गुटबाजी को बताया गया.

उसके बाद ही गौतम देव को हटाने का प्लॉट बनकर तैयार हो गया था. सूत्रों ने आगे बताया कि गौतम देव को हटाये जाने की भनक तृणमूल के एक अन्य हेवीवेट नेता तथा सिलीगुड़ी नगर निगम में विपक्ष के नेता नान्टू पाल को मिल गई थी. वह भी अध्यक्ष पद पाने के लिए सक्रिय हो गये थे. कहा जाता है कि अरुप विश्वास के साथ उनकी बातचीत भी हुई थी. सूत्रों के अनुसार नान्टू पाल पहले से ही सिलीगुड़ी नगर निगम में विपक्ष के नेता हैं. इसके अलावा गौतम देव एवं उनके समर्थकों के साथ उनकी नहीं पटती है.

यही उनके विरोध में गया. ऐसे बताया जाता है कि आईएनटीटीयूसी नेता आलोक चक्रवर्ती ने भी जुगाड़ लगाने की कोशिश की थी. कुछ महीने पहले ही कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आने की वजह से उनकी दाल नहीं गली. हालांकि दोनों नेताओं को तृणमूल कांग्रेस के नयी जिला कमेटी में स्थान दिया गया है. दोनों को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि जिला उपाध्यक्ष बनाये जाने के बाद दोनों नेता शांत पड़ गये. इस बीच, बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर गौतम देव से बातचीत की. ममता बनर्जी किसी ऐसे व्यक्ति को जिला अध्यक्ष बनाना चाहती थी, जो किसी भी गुट का न हो. माना जा रहा है कि गौतम देव ने ही ममता बनर्जी को रंजन सरकार का नाम सुझाया. उसके बाद रंजन सरकार के नाम पर मुहर लग गई. ममता बनर्जी ने रंजन सरकार को बुलाया और कहा कि तुम्हें बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी गई है और सबको साथ लेकर काम करना होगा.

इस मुद्दे पर तृणमूल के कोई भी नेता खुलकर कुछ भी नहीं कहना चाह रहे. जिला अध्यक्ष बनाये जाने के बाद रंजन सरकार का कहना है कि ममता बनर्जी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है वह उसे पूरी ईमानदारी से निभायेंगे. गौतम देव भी कहते हैं कि वह पिछले 11 वर्षों से जिला अध्यक्ष के पद पर थे. उन्होंने स्वेच्छा से अपना पद छोड़ दिया है. इस बीच, रंजन सरकार को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी सीट से तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार माना जा रहा है.

वर्तमान में डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य सिलीगुड़ी से पार्टी के विधायक हैं. एसजेडीए घोटाले में नाम आने के बाद से रूद्रनाथ भट्टाचार्य धीरे-धीरे पार्टी से दरकिनार किये जा रहे हैं. यह घोटाला तब हुआ था जब वह एसजेडीए के चेयरमैन थे. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले विधानसभा चुनाव में रूद्रनाथ भट्टाचार्य को शायद ही दुबारा टिकट मिले. ऐसे में सिलीगुड़ी से टिकट पाने के लिए रंजन सरकार के अलावा नान्टू पाल, कृष्णचन्द्र पाल तथा आलोक चक्रवर्ती प्रमुख दावेदार होंगे. ऐसे में जिला अध्यक्ष होने की वजह से रंजन सरकार का दावा ज्यादा मजबूत है.

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