चांचल के मधाईहाट गांव में भूत का भय
मालदा. मालदा जिला अंतर्गत चांचल थाना के मधाई हाट गांव के लोग इन दिनों भूत के आतंक को लेकर काफी आतंकित हैं. स्थिति यह है कि इस गांव में रहने वाले दर्जनों लोग अपने परिवार के साथ गांव छोड़ कर चले गये हैं. स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस […]
11 साल की एक किशोरी भूत के आतंक से अपना घर-वार छोड़कर अपने दीदी के घर चली गई है. चांचल थाना के चन्द्रपाड़ा ग्राम पंचायत स्थित इस गांव में भूत के आतंक को लेकर हर ओर हड़कंप मचा हुआ है. इस बात की जानकारी विज्ञान मंच के सदस्यों को भी दे दी गई है. विज्ञान मंच के सदस्यों ने भी इसे अंधविश्वास करार दिया है. विज्ञान मंच के सदस्यों का कहना है कि इस गांव में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके मौत के कारणों का पता करना होगा. इधर, स्थानीय पंचायत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 11 वर्षीय बालिका नमिता हांसदा के परिवार में पिछले 10 महीने के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई है.
नमिता के पिता गोपन हांसदा (58), मां लक्ष्मी हासंदा (50) तथा दीदी सुनाई हांसदा (13) की मौत हो चुकी है. परिवार में तीन अकाल मौत की घटना के बाद नमिता हांसदा अपनी बड़ी बहन माधवी किस्कू के घर चली गई है. इस गांव के एक अन्य व्यक्ति कानू किस्कू भी अपना घर छोड़कर अन्यत्र चला गया. तीन महीने पहले उसके बेटे की भी अकाल मौत हो गई है. इसके अलावा इस गांव से और भी कई लोग अपना घर-वार छोड़कर दूसरे स्थान पर चले गये हैं. जो लोग गांव छोड़कर दूसरी जगह गये हैं, उनका कहना है कि पूरे गांव में भूत का प्रभाव है. भूत की वजह से ही कई लोगों की मौत हुई है और उन लोगों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है. पूरी तरह से बिजलीहीन इस गांव में रहने वाले अधिकांश परिवार आदिवासी समुदाय के हैं. भूत के आतंक से पीडि़त कानू किस्कू ने आरोप लगाते हुए कहा कि उसके बेटे की मौत पहले ही हो चुकी है. अब 10 वर्षीय बेटी मेनका को भी जान का खतरा है. भूत के डर से वह बीमार रहने लगी है. इसी वजह से वह अपनी पत्नी और बेटी को साथ लेकर अपने एक रिश्तेदार के घर शरण लेने चले गये. नमिता हांसदा की बीवी माधवी किस्कू का कहना है कि रात होते ही भूत का आतंक शुरू हो जाता है. भूत के डर की वजह से लोग अपने-अपने घरों से बाहर नहीं निकल पाते हैं. इसी वजह से उसकी छोटी बहन गांव छोड़कर यहां शरण लेने आ गई है. मधाई हाट गांव छोड़कर जाने वाले चार-पांच परिवारों की संख्या तो ऐसी है कि जो दोबारा अपने गांव लौटना नहीं चाहते.
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