विकास बोर्ड पर गरमायी राजनीति

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न जनजाति के लिए राज्य सरकार द्वारा विकास बोर्ड के गठन के बाद से पहाड़ पर राजनीतिक माहौल में जो तल्खी थी वह और बढ़ गई है. खासकर बिमल गुरूंग के नेतृत्व वाली गोजमुमो राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ काफी हमलावर है. पिछले कुछ वर्षों के दौरान […]

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न जनजाति के लिए राज्य सरकार द्वारा विकास बोर्ड के गठन के बाद से पहाड़ पर राजनीतिक माहौल में जो तल्खी थी वह और बढ़ गई है. खासकर बिमल गुरूंग के नेतृत्व वाली गोजमुमो राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ काफी हमलावर है. पिछले कुछ वर्षों के दौरान ममता बनर्जी ने पर्वतीय क्षेत्र में चार जनजातियों के लिए विकास बोर्ड का गठन किया है.


उन्होंने पहले इसकी शुरूआत लेप्चा बोर्ड से की और उसके बाद भुटिया, तामांग तथा मंगर विकास बोर्ड का गठन कर दिया. भुटिया बोर्ड के गठन के बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि पहाड़ पर और किसी नये बोर्ड का गठन नहीं होगा. हाल ही में जब वह दार्जिलिंग दौरे पर आयी थीं तब उन्होंने मंगर बोर्ड का गठन कर दिया. उसके बाद से बिमल गुरूंग तथा उनके साथी नेता ममता बनर्जी से और अधिक चिढ़े हुए हैं. बिमल गुरूंग ने ममता बनर्जी से आदिवासियों तथा राजवंशियों के लिए विकास बोर्ड बनाने की मांग मुख्यमंत्री से की है. बिमल गुरूंग का कहना है कि आदिवासी तथा राजवंशी समुदाय के लोग काफी पिछडे़ हुए हैं. उनके विकास की भी आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ध्यान इन लोगों के तरफ नहीं है. यदि वह सही में सभी जाति का विकास करना चाहती हैं, तो उन्हें आदिवासियों तथा राजवंशियों के लिए भी विकास बोर्ड का गठन करना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगी. वह सिर्फ पहाड़ पर विकास बोर्ड का गठन कर रही हैं. दरअसल मुख्यमंत्री की मंशा पहाड़ पर विकास नहीं, बल्कि गोरखा जाति को बांटने की है. लेकिन मुख्यमंत्री जनजाति के विकास के लिए इतना ही गंभीर हैं तो समतल पर भी विभिन्न जनजातियों के लिए विकास बोर्ड का गठन करना चाहिए.


श्री गुरूंग ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि राज्य सरकार ने पहाड़ के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया है. पहाड़ पर विकास के जो भी काम हो रहे हैं वह केन्द्र सरकार की योजनाओं से हो रहे हैं. ममता बनर्जी तो जीटीए को ठीक से चलने ही नहीं दे रही है. ऐसे में भला विकास का क्या काम होगा. राज्य सरकार ने अब तक बार-बार अनुरोध के बाद भी कई विभागों जीटीए को नहीं सौंपा है. राज्य सरकार ने जीटीए का गठन तो कर दिया, लेकिन काम करने की स्वतंत्रता नहीं दी जा रही है. उन्होंने एक बार फिर से गोरखालैंड आंदोलन शुरू करने की धमकी भी दी.

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