सीएम के तेवर से मेडिकल कॉलेज अस्पातल में भी हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग कर रहा जांच

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सिलीगुड़ी. बालुरघाट के जिला अस्पताल में आठ महीने की एक बच्ची की नर्स द्वारा अंगूठा काट दिये जाने की घटना के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तेवर तल्ख हैं, उससे सिलीगुड़ी के निकट उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी हड़कंप मच गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्ची का अंगूठा […]

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सिलीगुड़ी. बालुरघाट के जिला अस्पताल में आठ महीने की एक बच्ची की नर्स द्वारा अंगूठा काट दिये जाने की घटना के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तेवर तल्ख हैं, उससे सिलीगुड़ी के निकट उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी हड़कंप मच गया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्ची का अंगूठा काट दिये जाने की घटना के बाद परिवार के लोग बच्ची की चिकित्सा कराने पहले मालदा मेडिकल कॉलेज आये और वहां से उन्हें उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सिलीगुड़ी भेज दिया गया. आरोप है कि डॉक्टरों ने यहां भी बच्ची की चिकित्सा नहीं की और उसे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल रेफर कर दिया. इस घटना के बाद अब तक दो दिन का समय बीत चुका है और इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है.

खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े तेवर के कारण मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन की नींद उड़ी हुई है. ममता बनर्जी ने इस मामले में आरोपी नर्स राखी सरकार के खिलाफ न केवल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं, बल्कि उन्होंने यह भी कहा है कि नर्स को नौकरी से हटा देना चाहिए. ममता बनर्जी के इस मंतव्य के बाद मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर एवं अधिकारी अपने ऊपर गाज गिरने की डर से डरे हुए हैं. ये लोग अब अपने आपको बचाने में जुट गये हैं. विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने स्तर से इस मामले में मेडिकल कॉलेज के भूमिका की जांच शुरू कर दी है. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

इस बारे में मेडिकल कॉलेज के कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के उस डॉ की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने इलाज किये बगैर ही बच्ची को कोलकाता रेफर कर दिया. इस बीच, विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में प्लास्टिक सजर्न का अभाव है. प्लास्टिक सजर्न के नहीं होने की वजह से ही बच्ची को कोलकाता रेफर किया गया था. सूत्रों ने आगे कहा कि यह घटना बच्ची के अंगूठा काटे जाने की थी और अंगूठे को जोड़ने के लिए प्लास्टिक सजर्न डॉ का होना अत्यंत जरूरी है. अस्पताल में प्लास्टिक सजर्न के नहीं होने की वजह से ही परेशानी बढ़ी. सूत्रों ने आगे बताया कि इस अस्पताल के एकमात्र प्लास्टिक सजर्न का करीब एक साल पहले तबादला हो गया. उसके बाद से अब तक यहां नये प्लास्टिक सजर्न की नियुक्ति नहीं हुई है. उल्लेखनीय है कि बच्ची दक्षिण दिनाजपुर जिला अंतर्गत बालुरघाट थाना के दासूल निवासी मामनी मंडल ने डायरिया की शिकायत के बाद अपनी बच्ची को बालुरघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स ने स्लाइन का चैनल काटते वक्त बच्ची का अंगूठा काट दिया और अंगूठे को डस्टबीन में फेंक दिया. इस मामले ने अभी काफी गंभीर रूप धारण कर लिया है. आरोपी नर्स को सस्पेंड कर दिया गया है और पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है.

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