जमाई षष्ठी कल, मछलियों की बढ़ी मांग
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सिलीगुड़ी,मालदा : जमाई षष्ठी में मछलियों की बड़ी मांग रहती है. जमाई राजा को ससुराल में गंगा या पद्मा नदी का हिलसा मछली खिलाये जाने की परंपरा है. रविवार को जमाई षष्ठी का पर्व है. जमाई षष्ठी के पहले बाजार में स्वादिष्ट मछलियों की किल्लत नजर आ रही है. हिलसा, चिंगड़ी, पाबदा व चितल मछली […]
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सिलीगुड़ी,मालदा : जमाई षष्ठी में मछलियों की बड़ी मांग रहती है. जमाई राजा को ससुराल में गंगा या पद्मा नदी का हिलसा मछली खिलाये जाने की परंपरा है. रविवार को जमाई षष्ठी का पर्व है. जमाई षष्ठी के पहले बाजार में स्वादिष्ट मछलियों की किल्लत नजर आ रही है. हिलसा, चिंगड़ी, पाबदा व चितल मछली नदारद है.
जिन दुकानों में थोड़ी बहुत स्वादिष्ट मछलियां मौजूद है, वहां कीमत आसमान पर है. ऐसी महंगाइ में मछलियों को खरीद पाना सभी के वश की बात नहीं है. इस बार ससुरालवाले जमाई राजा को मछली के बदले मांस व मुरगी खिला कर संतुष्ट करने की सोच सोच रहे हैं. मालदा मत्स्यजीवी व्यवसायी समिति के सचिव आबू तालाहा ने बताया कि मालदा से उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर, सिलीगुड़ी व जलपाईगुड़ी में मछलियों की आपूर्ति की जाती है. मालदा में रोज औसतन छह से सात मेट्रिक टन मछलियों की जरूरत पड़ती है. हिलसा व चिंगड़ी जैसी मछलियों की भारी कमी है. स्टोर में रखीं मछिलयां बेच कर क्रेताओं की मांग पूरी करनी पड़ रही है. मत्स्यजीवी संगठन के सदस्य जहांगीर शेख ने हिलसा मछली की कीमत 800 रुपये से लेकर एक हजार रुपये किलो है.
एक किलो व उससे ज्यादा वजन के हिलसा का दाम 1500 से दो हजार रुपये किलो है. प्रति किलो चिंगड़ी मछली 500 रुपये से हजार रुपये में बिक रही है. हावड़ा से मंगाए जा रहे ढाई से तीन किलो वजन के कतला व रोहू मछली की कीमत 230 रुपये से 250 रुपये किलो है. आर मछली 500 से 700 रुपये किलो, पाबदा मछली 400 से 450 रुपये किलो, चितल मछली 800 से एक हजार रुपये किलो बिक रही है. मालदा के बाजार में ओड़िसा के हिलसा मछली की अब बिक्री की जा रही है. फरक्का के गंगा नदी में एक-दो जो हिलसा मछली जाल में फंस रही है, उसे खरीदने के लिए क्रेता घाट में ही भीड़ लगा रहे हैं.
मालदा में कोलाघाट व पद्मा का हिलसा नहीं आता है. ज्यादातर ओड़िशा की हिलसा मछली आती है. इस साल हिलसा, चिंगड़ी, चितल व पाबदा मछलियों की आपूर्ति कम हो गयी है.
इसलिए दाम भी बढ़ा दिये गये है. दूसरी ओर, क्रेताओं का कहना है कि अधिक मुनाफे की आस में चिंगड़ी, पाबदा मछलियों को छोड़ कर कम रुपये लगा कर बाटा, गैसकॉर्प, अमेरिकन रोहू पाल रहे हैं. जिस कारण हिलसा, चिंगड़ी जैसी स्वादिष्ट मछलियां बाजार से गायब हो रही है और आम क्रेताओं पर इसका असर पर रहा है. दूसरी ओर, सिलीगुड़ी में भी जमाई षष्ठी को लेकर बाजार गरम है. शहर के विधान मार्केट, हैदर पाड़ा के विभिन्न मछली बाजारों में बड़ी मछलियां कम मिल रही है. जहां मिल रहे है, वहां दाम आसमान पर है.
शनिवार और रविवार को मछलियों के दाम में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना स्थानीय लोगों ने जतायी है. मछली के साथ साथ शहर के बाजारों में फल भी काफी महंगे बिक रहे हैं. जमाई षष्ठी के दिन जमाई राजा की खातिरदारी में ससुरालवालों की जेब अवश्य ही खाली हो जायेगी. सबसे ज्यादा समस्या मध्यम वर्गीय परिवार के सामने है.
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