नहीं दिख रहा आवेदकों में उत्साह
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2014 8:41 AM
सिलीगुड़ी : दुर्गापूजा से पहले सिलीगुड़ी की सड़कों पर नीली और सफेद रंग की नो रिफ्यूजल टैक्सी चलाने की सरकारी योजना को झटका लग सकता है. क्योंकि इस टैक्सी हेतु ऑफर लेटर लेने के प्रति आवेदकों में उत्साह की कमी देखी जा रही है. सरकार ने सभी 1545 आवेदकों को ऑफर लेटर जारी करने का […]
सिलीगुड़ी : दुर्गापूजा से पहले सिलीगुड़ी की सड़कों पर नीली और सफेद रंग की नो रिफ्यूजल टैक्सी चलाने की सरकारी योजना को झटका लग सकता है. क्योंकि इस टैक्सी हेतु ऑफर लेटर लेने के प्रति आवेदकों में उत्साह की कमी देखी जा रही है. सरकार ने सभी 1545 आवेदकों को ऑफर लेटर जारी करने का निर्णय लिया है. इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा कंचनजंगा स्टेडियम के मेला ग्राउंड में कैंप लगा कर ऑफर लेटर देने का काम शुरू किया गया.
आज कैंप के अंतिम दिन तक 1545 आवेदकों में से 950 आवेदकों को ही ऑफर लेटर दिया गया. करीब 40 प्रतिशत आवेदक ऑफर लेटर लेने ही नहीं आये. इसके अलावा जो आवेदक ऑफर लेटर ले भी रहे हैं, उनमें टैक्सी खरीदने को लेकर उत्साह की कमी देखी गयी. मेला ग्राउंड में कई कंपनियों ने टैक्सी की बिक्री के लिए कैंप लगाये हैं और आवेदकों को आकर्षक छूट देने की घोषणा भी कर रहे हैं. इसके बावजूद मेला ग्राउंड में टैक्सी कंपनियों के स्टॉल को खाली देखा गया. इस संबंध में जब कुछ कंपनियों से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि लोग जानकारी लेने के लिए तो आ रहे हैं, लेकिन बुकिंग वैसी नहीं हो रही है. दूसरी तरफ नो रिफ्यूजल टैक्सी हेतु ऑफर लेटर लेने वाले आवेदकों में तरह-तरह की आशंकाएं देखी जा रही हैं. एक व्यक्ति ने बताया कि नो रिफ्यूजल टैक्सी को चलाने की अपनी सीमाएं हैं.
सीमा के बाहर इस टैक्सी को चला पाना संभव नहीं है. इसके अलावा दाजिर्लिंग पर्वतीय क्षेत्र में भी इस टैक्सी को ले जाने पर रोक है. इन लोगों का कहना था कि न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन अथवा बागडोगरा हवाई अड्डे पर जितने भी पर्यटक आते हैं वह सीधा दाजिर्लिंग या फिर गंगटोक जाना पसंद करते हैं. नो रिफ्यूजल टैक्सियों के इन दोनों ही स्थानों पर जाने की मनाही है. इसके अलावा टैक्सियों की कीमत भी करीब 5 लाख रुपये से ऊपर है. किस्त पर लेने पर हर महीने 12 हजार से 18 हजार रुपये चुकाने पड़ेंगे. किस्त के रुपये चुकाने के बाद उनकी और अधिक आय हो सकेगी, इसमें संदेह है. इसी वजह से वह लोग काफी सोच-समझ कर इस व्यवसाय में उतरना चाहते हैं.
सरकार को भी इस बात अंदेशा है. परिवहन विभाग के अधिकारियों को लग रहा था कि नो रिफ्यूजल टैक्सी के परमिट लेने हेतु लोगों में मारा-मारी लगेगी, लेकिन आवेदकों की उत्साह में कमी को देखते हुए इनके भी पसीने छूट रहे हैं. इसलिए राज्य सरकार ने अब गतिधारा योजना के तहत आवेदकों को एक लाख रुपये देने की घोषणा की है. इस संबंध में परिवहन बोर्ड के सदस्य मदन भट़्टाचार्य ने बताया है कि 25 से 40 वर्ष उम्र तक के लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा. सभी आवेदकों द्वारा ऑफर लेटर नहीं लेने के संबंध में उन्होंने कहा कि जो लोग ऑफर लेटर नहीं लेंगे उन्हें एक रजिस्ट्री चिट्ठी भेजकर ऑफर लेटर लेने के लिए कहा जायेगा. अगर वह सरकारी नियमों के अनुसार गतिधारा योजना के पात्र होंगे, तो उन्हें सरकार की ओर से एक लाख रुपये की मदद भी दी जायेगी.
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