पहाड़ में अप्रत्यक्ष रूप से एनआरसी लागू कर चुकी हैं ममता : लामा

Published at :23 Dec 2019 2:55 AM (IST)
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पहाड़ में अप्रत्यक्ष रूप से एनआरसी लागू कर चुकी हैं ममता : लामा

दार्जिलिंग : एनआरसी व सीएए का विरोध करने वाली तृणमूल कांग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर पर्वतीय इलाके में एनआरसी लागू कर चुकी है. उक्त बातें जन आंदोलन पार्टी के केंद्रीय वरिष्ठ नेता एवं अधिवक्ता अमर लामा ने रविवार को कही. दार्जिलिंग प्रेस गिल्ड में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाप नेता अमर लामा ने कहा कि […]

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दार्जिलिंग : एनआरसी व सीएए का विरोध करने वाली तृणमूल कांग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर पर्वतीय इलाके में एनआरसी लागू कर चुकी है. उक्त बातें जन आंदोलन पार्टी के केंद्रीय वरिष्ठ नेता एवं अधिवक्ता अमर लामा ने रविवार को कही. दार्जिलिंग प्रेस गिल्ड में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाप नेता अमर लामा ने कहा कि एनआरसी लागू होने पर सभी को पूर्वजों का दस्तावेज अनिवार्य रूप से दिखाना पड़ता है.

जबकि राज्य की तृणमूल सरकार ने भी दार्जिलिंग वासियों को जन्मृ-मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए पूर्वजों का दस्तावेज दिखाना अनिवार्य कर दिया है. जबतक कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों का दस्तावेज पेश नहीं करता है, तब तक उन्हें जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता है.
श्री लामा ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में सदियों से निवास कर रहे लोगों को पूर्वजों का दस्तावेज दिखाना अनिवार्य करने का मतलब क्या है. उन्होंने कहा कि एनआरसी व नागरिकता संशोधन एक्ट का मैं समर्थन नहीं करता हूं.
लेकिन मैं पहाड़ के एक राजनीतिक दल के नेता की तरह कोलकाता से जो बोलने कहा जायेगा, वो बोलने के लिए मजबूर नहीं हूं. नागरिक संशोधन एक्ट ने देश की धर्म निरपेक्षता को आघात पहुंचाया है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है. बातचीत के दौरान जाप नेता ने कहा कि भाजपा हो या तृणमूल दोनों दार्जिलिंग और गोर्खाओ के हित में कभी नहीं सोचती.
पिछले कुछ दिनों पहले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एनआरसी और नागरिक संशोधन एक्ट पर बोलने के दौरान गोर्खाओं को एनआरसी से डरने की कोई बात नहीं कही थी. उन्होंने 1950 के भारत-नेपाल संधि का स्मरण कराया था. केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान गोर्खाओं को गम्भीरता से सोचने के लिए मजबूर कर रही है.
श्री लामा ने कहा कि तृणमूल भी दार्जिलिंग और गोर्खाओं के हित में नही है. पिछले कुछ माह पहले सम्पन्न हुए लोकसभा और दार्जिलिंग विधानसभा उपचुनाव के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय श्रमिकों से लेकर वन-बस्ती और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर और जमीन का पर्चा पट्टा देने का वादा किया था.
चुनाव सम्पन्न होने के आठ माह हो चुका है. लेकिन अभी तक दार्जिलिंग पार्वतीय क्षेत्र के चाय श्रमिक, वन बस्ती और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर और जमीन का पर्चा पट्टा नहीं मिला है. नागरिक संशोधन एक्ट के खिलाफ क्या लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है.
इसी तरह से तृणमूल के एक सांसद ने भी नागरिक संशोधन एक्ट के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है. दार्जिलिंग के गोर्खाओं को अब यह देखना है कि बंगाल के तृणमूल सांसद ने उक्त याचिका गोर्खा के संदर्भ में उल्लेख किया है या नहीं. भाजपा के शीर्ष नेतृत्वगणों से लेकर केन्द्रीय मंत्री तक ने एनआरसी और सीएए का गोर्खाओं पर असर नहीं होने का जो भी दावा करे, परंतु कहीं न कहीं एनआरसी और सीएए से गोर्खाओं की समस्या बढ़ा सकते हैं.
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