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बानरहाट में दिखा रॉयल बंगाल टाइगर, तलाश में जुटा वन विभाग

Updated at : 01 Dec 2019 1:12 AM (IST)
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बानरहाट में दिखा रॉयल बंगाल टाइगर, तलाश में जुटा वन विभाग

पैसेंजर ट्रेन के चालक ने किया दावा बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले में एक बार फिर काफी समय के बाद डुआर्स के बानरहाट इलाके में रॉयल बंगाल टाइगर देखे जाने का दावा किया गया है, लेकिन इस दावे पर कई लोगों ने शक भी जाहिर किया है. विदित हो कि अलीपुरद्वार से सिलीगुड़ी जाने वाले पैसेंजर […]

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पैसेंजर ट्रेन के चालक ने किया दावा

बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले में एक बार फिर काफी समय के बाद डुआर्स के बानरहाट इलाके में रॉयल बंगाल टाइगर देखे जाने का दावा किया गया है, लेकिन इस दावे पर कई लोगों ने शक भी जाहिर किया है. विदित हो कि अलीपुरद्वार से सिलीगुड़ी जाने वाले पैसेंजर ट्रेन के चालक ने बानरहाट एवं केरन स्टेशन के बीच रेल लाइन पार करते हुए बाघ को देखने का दावा किया है.
इस सूचना के बाद वन विभाग ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. वन विभाग का कहना है कि डुआर्स के चाय बागान में बाघ होने का प्रमाण मिलने से बहुत खुशी की बात होगी. इसके साथ ही बाघ की सुरक्षा को लेकर भी वन विभाग चिंतित है.
गौरतलब है कि 20 साल पहले डुआर्स के गोरूमारा, मोराघाट, जल्दापारा सहित विभिन्न जंगल व चाय बागान के संलग्न बस्तियों में बाघ घुसकर यहां के पालतू पशु को उठा ले जाते थे. लेकिन पिछले एक दशक से इन समस्त इलाकों में बाघ मिलने की कोई खबर नहीं है. वहीं डुआर्स के डायना व रेडबैंक चाय बागान के बीच अर्जुनवाड़ी के संलग्न इलाके में गुरुवार की रात को ट्रेन चालक ने बाघ देखने का दावा किया है.
इधर केरन के वन विभाग अधिकारी कुणाल सिंह राव ने अपनी नेतृत्व में एक टीम इसकी छानबीन के लिए गठित कर दिया है. रेलवे के अलीपुरद्वार के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर अमर ठाकुर ने बताया कि ट्रेन के पायलट ने कहा है कि उसने एक बड़ा बाघ देखा है. उसी आधार पर हमलोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी है.
बाघ के होने का प्रमाण जब तक ठोस रूप से नहीं मिलता है. इसके बारे में वन विभाग कुछ भी नहीं बोलना चाहता. हालांकि इलाके के स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी चाय श्रमिक या इलाके के लोगों ने एक दशक से बंगाल टाइगर देखने का दावा नहीं किया है. इस विषय पर स्थानीय विनोद रजक एवं कृष्णा राय ने बताया कि हमलोग पिछले कई दशकों से इलाके में घूमते हैं, लेकिन तेंदुआ, चीता एवं जंगली हाथी तथा वाइसन और हिरण के अलावा कभी बंगाल टाइगर देखने का सौभाग्य नहीं हुआ.
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