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सिलीगुड़ी : रेगुलेटेड मार्केट घोटाला-2, भूटान के सरकारी स्टॉल पर भी लटका ताला

Updated at : 08 Feb 2019 4:43 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :   रेगुलेटेड मार्केट घोटाला-2, भूटान के सरकारी स्टॉल पर भी लटका ताला

भूटान के अधिकारी बातचीत करने आये, नहीं बनी बात भूटानी स्टॉल पर किराये का मात्र 5300 रुपये बकाया दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ता बिगड़ने की संभावना सिलीगुड़ी : लीज एग्रीमेंट की मियाद पूरी होने के छह वर्ष बाद बिना किसी नोटिस व नियमों का उल्लंघन कर स्टॉल में ताला लटकाने का मामला सामने आया […]

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  • भूटान के अधिकारी बातचीत करने आये, नहीं बनी बात
  • भूटानी स्टॉल पर किराये का मात्र 5300 रुपये बकाया
  • दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ता बिगड़ने की संभावना
सिलीगुड़ी : लीज एग्रीमेंट की मियाद पूरी होने के छह वर्ष बाद बिना किसी नोटिस व नियमों का उल्लंघन कर स्टॉल में ताला लटकाने का मामला सामने आया है. सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में एक के बाद एक राज के खुलासे से हड़कंप है. पड़ोसी देश भूटान के फूड कॉर्पोरेशन के स्टॉल में ताला लगाने से दो देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी बिगड़ने की संभावना है.
दस्तावेजों के मुताबिक मात्र 5300 रूपए के लिए भूटान के स्टॉल का शटर बंद कर दिया गया. वहीं दूसरी तरफ इस स्टॉल को अवैध तरीके से हड़फने की कोशिश भी सिंडिकेट के लोग कर रहे हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1987 में पड़ोसी मित्र देश भूटान के फूड कॉर्पोरेशन ने सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट (एसआरएमसी) में एक स्टॉल लीज पर लिया. एसआरएमसी कमेटी व फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के बीच 25 वर्ष का लीज एग्रीमेंट हुआ. एग्रीमेंट के मुताबिक वर्ष 2012 तक के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान को फल व सब्जी कॉम्प्लेक्स में टीए-2 नंबर स्टॉल आवंटित किया. व्यवसाय के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान ने स्थानीय एक व्यवसायी अदालत प्रसाद को नियुक्त किया.
अदालत प्रसाद ही भूटान फूड कॉर्पोरेशन का व्यवसाय यहां संभालते आ रहे हैं. एग्रीमेंट के मुताबिक वर्ष 2012 में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के स्टॉल के लीज एग्रीमेंट की मियाद पूरी हो गयी. लेकिन इसके बाद भी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान ने एग्रीमेंट के नवीणीकरण में दिलचस्पी नहीं दिखायी. दूसरी ओर एसआरएमसी कमेटी ने भी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान प्रबंधन को नोटिस जारी नहीं किया. आरोप है कि एग्रीमेंट की मियाद समाप्त होने के बाद भी छह वर्षों तक फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान का स्टॉल नंबर टीए-2 से व्यवसाय चलता रहा.
वर्ष 2018 में एसआरएमसी कमेटी के नव नियुक्त सचिव देवज्योति सरकार ने 4 सितंबर को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के स्टॉल पर ताला मार दिया.साथ ही अदालत प्रसाद को काम करने से मना कर दिया. जानकारी मिलते ही 6 सितंबर को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के प्रतिनिधि एसआरएमसी के कार्यालय पहुंचे और बातचीत की.
इसके अगले दिन यानी 7 सितंबर को उमा शंकर नाम के एक व्यक्ति ने वर्तमान काबिज की हैसियत से एसआरएमसी कमेटी द्वारा निर्धारित स्टॉल का कलेक्शन व मालिकाना नियमितिकरण आवेदन फॉर्म भरकर जमा कराया. इसी फॉर्म में भरे गये आकंड़े के मुताबिक 7 सितंबर से 11 महीने तक का 3700 रूपया किराया और 8 वर्ष का लाइसेंस फीस 1600 रूपया बकाया बताया गया. अर्थात मात्र 5300 रूपए के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान का स्टॉल नंबर टीए-2 में कमेटी ने ताला जड़ दिया.
इस फॉर्म को भरकर जमा स्टॉल पर वर्तमान मालिकाना हक जताने वाला यह व्यक्ति उमा शंकर कौन है, यह एसआरएमसी कमिटी को भी पता नहीं है. एसआरएमसी में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान का स्टॉल बंद होने से दोनों देशों के बीच होने वाले व्यवसाय पर असर पड़ा है.
इधर एसआरएमसी कमिटी के अधिकारी का कहना है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के साथ किये गये स्टॉल नंबर टीए-2 एग्रीमेंट की मियाद वर्ष 2012 में समाप्त हुयी है, लेकिन स्टॉल का किराया वर्ष 1999 से बकाया है. एसआरएमसी कमिटी के सचिव देवज्योति सरकार ने बताया कि पदभार संभालने के बाद उन्होंने बकाया किराया वसूलना शुरू किया. नहीं देने वाले व्यवसायियों के स्टॉल में ताला लगाया गया. उसी क्रम में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के स्टॉल में भी ताला लगाया गया.
ताला लगाने के पहले नोटिस जारी करने के प्रश्न का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. बल्कि कलेक्शन व मालिकाना नियमितिकरण आवेदन फॉर्म पर स्टॉल टीए-2 का वर्तमान काबिज मालिक के स्थान पर हस्ताक्षर करने वाले उमा शंकर के संबंध में भी उन्हें कुछ मालूम नहीं है. उन्होंने कहा कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान के स्टॉल की पूरी रिपोर्ट विदेश मंत्रीलय को भेज दी गयी है. मंत्रालय का जवाब आने पर आगे की कार्यवायी की जायेगी.
जिला शासक सह एसआरएमसी की चेयरपर्सन जयशी दास गुप्ता ने कहा कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ भूटान प्रबंधन ने स्टॉल किसी अन्य को दे रखा था. एग्रीमेंट की मियाद समाप्त होने के बाद ही स्टॉल में ताला लगाया गया है. स्टॉल बंद होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पर कोई असर नहीं पड़ा है. केवल कुछ स्थानीय बिचौलिए इससे प्रभावित हुए हैं.
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