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सिलीगुड़ी : गुरुंग के करीबी कर्नल रमेश आले थाना तलब, दार्जिलिंग सदर थाने में दो घंटे तक पुलिस ने की पूछताछ

Updated at : 13 Dec 2018 1:46 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :  गुरुंग के करीबी कर्नल रमेश आले थाना तलब, दार्जिलिंग सदर थाने में दो घंटे तक पुलिस ने की पूछताछ

सिलीगुड़ी : गोजुममो के भूमिगत नेता विमल गुरुंग के करीबी कर्नल रमेश आले से पुलिस ने पूछताछ की है. हालांकि इस मामले में पुलिस का कोई अधिकारी कुछ कहना नहीं चाह रहा है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोजुममो नेता कर्नल रमेश आले को बुधवार को दार्जिलिंग सदर थाने बुलाया गया. करीब दो […]

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सिलीगुड़ी : गोजुममो के भूमिगत नेता विमल गुरुंग के करीबी कर्नल रमेश आले से पुलिस ने पूछताछ की है. हालांकि इस मामले में पुलिस का कोई अधिकारी कुछ कहना नहीं चाह रहा है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोजुममो नेता कर्नल रमेश आले को बुधवार को दार्जिलिंग सदर थाने बुलाया गया. करीब दो घंटे तक थाने में पुलिस अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की. इस दौरान राज्य खुफिया विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे.
उल्लेखनीय है कि पिछले साल गोरखालैंड आंदोलन के दौरान हिंसा एवं आगजनी को लेकर विमल गुरुंग सहित कई गोजमुमो नेताओं के खिलाफ पुलिस ने एफआइआर दर्ज किया है. कर्नल रमेश आले के खिलाफ भी थाने में कई मामले दर्ज हैं. माना जा रहा है कि इसी सिलसिले में उनसे पूछताछ की गयी है. करीब दो घंटे की पूछताछ के बाद वह थाने से निकल आये.
यहां यह भी बता दें कि गोजमुमो दोफाड़ हो चुका है. पार्टी का बड़ा हिस्सा विनय तमांग के साथ है, जबकि कर्नल रमेश आले अब भी विमल गुरुंग के साथ बने हुए हैं. अपनी गैरहाजिरी में जिन नेताओं के जरिये विमल गुरुंग पहाड़ पर अपनी पैठ फिर से बनाना चाह रहे हैं, उनमें कर्नल आले भी शामिल हैं.
सर्वोच्च न्यायालय से रोशन गिरि को फौरी राहत
सिलीगुड़ी. गोजमुमो (विमल गुट) के भूमिगत चल रहे नेता रोशन गिरि को सर्वोच्च न्यायालय से फौरी राहत मिली है. अदालत ने एनआइए कानून के अधीन आनेवाले मामलों में जनवरी महीने के दूसरे सप्ताह तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है.
उल्लेखनीय है कि रोशन गिरि ने एनआइए एक्ट, 2008 के तहत आनेवालें अपराधों में अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती दी है
जस्टिस अरुण मिश्र और जस्टिस विनीत सरन की बेंच ने गत सोमवार को रोशन गिरि की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि राज्य सरकार एक हलफनामा दाखिल कर बताये कि एनआइए एक्ट की धारा 6(1) के तहत जो केस एनआइए के तहत आते हैं उनकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गयी है या नहीं.
इस कानून की धारा 6(2) के तहत केंद्र को रिपोर्ट भेजना बाध्यकारी है. अदालत ने इस बीच एनआइए के मामलों में याचिकाकर्ता के खिलाफ यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया. अब याचिका पर अगली सुनवाई जनवरी, 2019 के दूसरे सप्ताह में होगी.
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