हावड़ा : आज मिथिला नगरिया निहाल सखियां...
Updated at : 30 Aug 2018 6:06 AM (IST)
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श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से राम-जानकी विवाह के संगीतमय श्रीरामकथा में झूमे भक्तगण हावड़ा : श्याम गार्डेन में आयोजित रामकथा के पांचवें दिन राम-जानकी विवाह की कथा सुनाते हुए राजनजी महाराज ने कहा कि जो राम-जानकी विवाह महोत्सव की कथा को प्रेम पूर्वक गायेगा, उसके हृदय में सदा आनंद भर जायेगा. आज मिथिला […]
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श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से राम-जानकी विवाह के संगीतमय श्रीरामकथा में झूमे भक्तगण
हावड़ा : श्याम गार्डेन में आयोजित रामकथा के पांचवें दिन राम-जानकी विवाह की कथा सुनाते हुए राजनजी महाराज ने कहा कि जो राम-जानकी विवाह महोत्सव की कथा को प्रेम पूर्वक गायेगा, उसके हृदय में सदा आनंद भर जायेगा. आज मिथिला नगरिया निहाल सखियां मनोहारी संगीत ज्योंहि शुरू किया पूरा मंडप श्रद्धाभक्ति में झूम उठा.
कथा को विस्तार देते हुए पूज्य राजन जी ने कहा कि राम-जानकी मईया के विवाहोत्सव में सारे सगुन एक साथ श्रीअवध में उपस्थित हो जाते हैं. पूरे अयोध्या और मिथिला नगरी को दीए से सजाया जाता है. दिव्य अलंकारों से सजी भव्य बारात गाजे-बाजे के साथ मिथिला के लिए प्रस्थान करती है.
उधर मिथिला पति जनकजी बारात के स्वागत में कोई कोरकसर नहीं रखते. राजा जनक ने अयोध्या से लेकर मिथिला तक बारातियों की सुविधा के लिए रास्ते में पड़नेवाली सभी नदियाें पर फुल-बंधन करवा दिया. मिथिला में सजे विवाह मंडप का वर्णन करते हुए राजन जी कहते हैं कि श्रीराम-जानकी जी का विवाह में चारों वेद और सूर्य देवता खुद उपस्थित हुए थे.
विवाह महोत्सव में उपस्थित होने की देवताओं में होड़ मची थी. देवता खुद प्रकट होकर पूजा करते हैं, आशीर्वाद देते हैं और अत्यंत सुख पा रहे हैं. सोने के परातों व कलशों में विवाह पूजन सामग्री रखी हुई थी और पूरा मंडप रत्नों और हीरे-मोतियों से सजाया गया था.
राजन जी कहते हैं कि पुण्य क्या है? धर्म के लिए धन की आवश्यकता होती है लेकिन पुण्य के लिए कौड़ी भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं है.
रामचरित मानस में गोस्वामी जी भी कहते हैं कि पुण्य एक जग महं नहि दूजा, मन क्रम वचन विप्र पद पूजा. विप्र यानी ब्राह्मण, संत, हनुमान के भक्त, गौ मईया, नंदी भगवान, भगवान का मंदिर, तुलसी मईया और विप्र का अर्थ आम, अमरूद, जामुन और भगवान का श्रीविग्रह. यानी इन सब का दर्शन मात्र और श्रद्धा पूर्वक प्रणाम कर लेने से ही पुण्य मिलता है.
राजन जी कहते हैं कि यदि रुपये से पुण्य आता तो केवट पर पुष्प की वर्षा नहीं होती. मेरा आग्रह है कि आप कहीं जा रहे हैं और रास्ते में कोई श्रेष्ठ मिल जाए, कोई मंदिर-देवालय पड़ जाए तो हाथ जोड़ लें. श्रेष्ठ आप को देखे ना देखे आप हाथ जरूर जोड़ लें. ऐसा करने से जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है.
रामकथा के पांचवें दिन के मुख्य यजमान के रुप में विनय दूबे सपत्नीक, धनपत बंसल सपत्नीक और अशोक ठाकुर सपत्नीक उपस्थित रहे. इस दौरान राजनजी महाराज को माल्यार्पण करनेवालों में विजय कुमार बंका, संतोष देवी गुप्ता, सुखराम राय, अखिलेश झां, विनोद कुमार अग्रवाल, अयोध्या जयसवाल, रमा गुप्ता और इंदू राय उपस्थित रहीं.
इस दौरान श्रीरामकथा आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक पं. लक्ष्मीकांत तिवारी और पंडित शिवजी तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे. कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों में समाजसेवी महावीर प्रसाद रावत, भोजपुरी गायिका प्रतिभा सिंह, आनंद प्रकाश गोयल, वेद प्रकाश गर्ग और अमित गुप्ता रहे.
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीरामकथा आयोजन समिति के जय प्रकाश सिंह, संयोजक भोला सोनकर, शशीधर सिंह, अशोक ठाकुर, अमरनाथ ठाकुर, रामलाल राउत, प्रदीप तिवारी, विक्की राज सिकरिया, सुशील ओझा, रंजन चौबे, दीपक मिश्रा, रमेश सिंह, राजेश पांडेय, हरेंद्र दूबे, अतुल डालमिया, धनपाल मिश्रा, गुंजन सिंह और पुनित कुमार सिंह सक्रिय रहे. संचालन समाजसेवी विरेंद्र शर्मा ने किया.
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