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जंगली जानवरों के लिए काल बन गयी है रेल लाइन

Updated at : 15 Jul 2018 12:58 AM (IST)
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जंगली जानवरों के लिए काल बन गयी है रेल लाइन

चामुर्ची : डुआर्स रेलमार्ग पर गत छह महीने में चार हाथियों की लगातार मौत के पीछे कहीं न कहीं कमजोर व्यवस्था ही जिम्मेदार है. गत 6 जुलाई को रेडबैंक चाय बागान के समीप दो हाथियों की मौत के बाद रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों को धीमी गति से चलाने का फरमान जारी तो कर दिया है, […]

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चामुर्ची : डुआर्स रेलमार्ग पर गत छह महीने में चार हाथियों की लगातार मौत के पीछे कहीं न कहीं कमजोर व्यवस्था ही जिम्मेदार है. गत 6 जुलाई को रेडबैंक चाय बागान के समीप दो हाथियों की मौत के बाद रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों को धीमी गति से चलाने का फरमान जारी तो कर दिया है, परंतु ऐसे आदेश पहले भी कई बार देने के बावजूद ट्रेन से वन्य प्राणियों के कटकर मौत का सिलिसला बंद नहीं हो पा रहा है. बार-बार हाथियों की मौत को लेकर पर्यावरणप्रेमियों ने चिंता जाहिर की है.
डुआर्स जागरण संस्था के अनिमेष बसु विक्टर बसु ने बताया कि गत जून में ठीक रेडबैंक चाय बागान के पास ही एक गर्भवती हाथी की मौत हो गयी थी. इसी वर्ष फरवरी महीने में चपरामारी जंगल रेलमार्ग पर हाथी की मौत हुई थी. कुल मिलाकर पिछले छह महीने में इस रेलमार्ग पर चार हाथियों की मौत हो जाना चिंता का विषय है. परिवेश प्रेमियों का कहना है कि रेल दुर्घटना से हाथियों को बचाने के लिए वन विभाग कई बार उच्चस्तरीय बैठक कर चुका है, परंतु इसका ठोस नतीजा नहीं निकल सका.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 2004 में सिलीगुड़ी- अलीपुरद्वार रेल मार्ग को बड़ी लाइन करने के बाद से आज तक कुल 68 हाथियों की मौत ट्रेन का धक्का लगने से हो गयी है. इसके अलावा पांच बाइसन, तीन तेंदुआ और बारह छोटे आकार के वन्य जीवों की मृत्यु हो चुकी है. साथ ही अजगर समेत विभिन्न सांपों की मौत आम बात है. मृत सभी वन्य प्राणी वन्य जीव संरक्षण कानून के मुताबिक एक नंबर लुप्तप्राय प्रजातियों के प्राणियों के रूप में चिह्नित किये गये हैं.
अलीपुरद्वार रेलवे डिवीजनल रेल मैनेजर चंद्रवीर रमन की रिपोर्ट के अनुसार, एलीफेंट जोन में जहां घटना घटी है, उस स्थान पर ट्रेन की गति कम करने की घोषणा की गयी है. स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि आखिरकार हाथी जायें तो जायें कहां. भोजन की तलाश में जंगली पशु रिहायशी इलाके में प्रवेश करते हैं. जंगलों में वन विभाग द्वारा केला, कटहल के पेड़ लगाये जायें. रेल पटरी के किनारे हल्के करंट की बाड़ भी की जाये, जो वन विभाग की स्वीकृति से ही संभव है. हाथियों एवं अन्य वन्य प्राणियों की लगातार मौत से पर्यावरणप्रेमियों में क्षोभ है.
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