जगत बनानेवाले को बना रही है श्यामली

Published at :03 Oct 2017 9:18 AM (IST)
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जगत बनानेवाले को बना रही है श्यामली

सिलीगुड़ी: कहते हैं भगवान ने जगत को बनाया है और सिलीगुड़ी की श्यामली उसी जगत बनाने वाले की मूर्ति बना रही है.ढलती उम्र और आंखें कमजोर,इसके बावजूद श्यामली पाल के हाथों में देवी-देवताओं की मूर्ति गढ़ने की गजब की जादूगरी आज भी बरकरार है. सिलीगुड़ी के चार नंबर वार्ड के ज्योतिनगर के पालपाड़ा में रहनेवाली […]

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सिलीगुड़ी: कहते हैं भगवान ने जगत को बनाया है और सिलीगुड़ी की श्यामली उसी जगत बनाने वाले की मूर्ति बना रही है.ढलती उम्र और आंखें कमजोर,इसके बावजूद श्यामली पाल के हाथों में देवी-देवताओं की मूर्ति गढ़ने की गजब की जादूगरी आज भी बरकरार है. सिलीगुड़ी के चार नंबर वार्ड के ज्योतिनगर के पालपाड़ा में रहनेवाली श्यामली द्वारा मूर्ति गढ़ने की कहानी 30 साल पुरानी है.

उसने मूर्ति गढ़ने की कारिगरी मायके में नहीं बल्कि विवाह के बाद पति निरंजन पाल से सिखी. अपने ही घर में कोजागरी लक्ष्मी जी की मूर्तियों को अंतिम रुप देने में व्यस्त श्यामली पाल ने एक विशेष भेंट वार्ता में प्रभात खबर को बताया कि उम्र की इस दहलीज में भी देवी-देवताओं की मूर्तियां गढ़ने पर दिल को सुकून मिलता है. वह मूर्तियां धंधे के लिए नहीं गढ़ रही बल्कि उसका लक्ष्य अपने ससुराल की पुश्तैनी कलाकारी की अस्तित्व को बचाये रखना है.

आज की युवा पीढ़ी के लिए श्यामली मिसाल
आज के तकनीकी युग में अपने पुश्तैनी धंधे को छोड़कर भावी युवा पीढ़ी इंजीनियर, डॉक्टर, एमबीए, आइपीएस, आइएएस जैसे पेशों के रेस में दौड़ लगा रहे हैं. ऐसी युवा पीढ़ी के लिए आज श्यामली मिसाल पेश कर रही है. वह अपने पुश्तैनी धंधे के तहत देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाकर अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण ही नहीं कर रही बल्कि आज की भावी युवा पीढ़ी को जागरुक करने का प्रयास भी कर रही है. श्यामली का कहना है कि वह और उसके पति अपने इसी पुश्तैनी धंधे से दोनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अच्छे घराने में शादी करवायी. आज अपना पक्का का अच्छा-खासा मकान भी है. श्यामली का कहना है कि कोई भी धंधा छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि जरुरत है उस धंधे के प्रति लगन, जुनून और ईमानदारी की.
शादीशुदा बेटी पम्पा भी करती है सहयोग
श्यामली को कोजागरी लक्ष्मी जी की मूर्तियों व मिट्टी के प्लेट (सोरा) पर उनकी चित्रकारी के अलावा मनसा देवी, सरस्वती, विश्वकर्मा व गणेश की मूर्तियां गढ़ने में भी महारत हासिल है. उसके इस पेशे में शादीशुदा बेटी पम्पा भी भरपूर सहयोग करती है. पति निरंजन पाल अब काफी बूढ़े हो चले इसलिए अब सहयोग नहीं कर सकते.
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