बोनस का हुआ फैसला मिलना अभी तय नहीं

Published at :23 Sep 2017 5:10 AM (IST)
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बोनस का हुआ फैसला मिलना अभी तय नहीं

सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय बागानों के श्रमिकों को बोनस देने पर भले ही राज्य मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में बैठक हो गयी हो, लेकिन उनको बोनस मिलेगा कब, यह अभी तय नहीं है. यहां बता दें कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय बागानों को लेकर गुरुवार को उत्तरकन्या में मैराथन त्रिपक्षीय बैठक हुयी. […]

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सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय बागानों के श्रमिकों को बोनस देने पर भले ही राज्य मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में बैठक हो गयी हो, लेकिन उनको बोनस मिलेगा कब, यह अभी तय नहीं है. यहां बता दें कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय बागानों को लेकर गुरुवार को उत्तरकन्या में मैराथन त्रिपक्षीय बैठक हुयी.

इसमें चाय बागान मालिक, श्रमिक संगठनों के नेता तथा राज्य श्रम विभाग के अधिकारी थे. दिन में करीब दो बजे ही बैठक की शुरूआत हो गयी थी और देर रात 11 बजे के बाद तक चलती रही. उसके बाद 19.75 प्रतिशत बोनस देने पर सहमति बन गयी. हांलाकि श्रमिक संगठन 20 प्रतिशत बोनस देने की मांग कर रहे थे.उसके बाद भी बोनस पर त्रिपक्षीय समझौता हो गया.अब सवाल यह है कि बेमियादी पहाड़ बंद के कारण वहां के चाय बागान पहले से ही बंद हैं.बैठक में भी बागान मालिकों ने साफ कह दिया था कि बागान बंद होने से काफी घाटा हो चुका है. ऐसे में एकबार में पूरा बोनस दे पाना संभव नहीं है. वह सभी किश्तों में बोनस देंगे.

बागान मालिकों के इसी कथन के बाद यह सवाल उठने लगा है कि बागान मालिक आखिरकार बोनस देंगे कैसे.ऐसे समतल क्षेत्र में भी चाय श्रमिकों को 19.75 प्रतिशत ही बोनस मिल रहा है. पिछले दिनों कोलकाता में इसको लेकर त्रिपक्षीय बैठक हुयी और वहीं बोनस पर फैसला हो गया था. पहाड़ के चाय बागान श्रमिक यूनियनों का कहना था कि दार्जिलिंग चाय कि लोकप्रियता पूरे विश्व में है. चाय बागान मालिक काफी मुनाफा कमा रहे हैं. इसी कारण पहाड़ के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को 20 प्रतिशत बोनस मिलना चाहिए.दूसरी तरफ चाय बागान मालिक बागान बंद होने का रोना रो रहे हैं.

इधर,चाय बागान सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बोनस पर भले ही फैसला हो गया हो पर मिलना मुश्किल लग रहा है. क्योंकि बागान बंद होने से चाय का उत्पादन ही नहीं हुआ है. फर्स्ट फ्लश के साथ ही सेकेंड फ्लश चाय का उत्पादन भी गोरखालैंड आंदोलन को भेंट चढ़ गया है. ऐसे में जो चाय बागान मालिक पहले से ही श्रमिकों को वेतन और मजदूरी देने में आनाकानी करते थे,वह भला बोनस कैसे देंगे.विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. विपक्ष का कहना है

कि राज्य सरकार ने सबकुछ सामान्य दिखाने के लिए पहाड़ के ट्रेड यूनियन संगठनों के नेताओं को धमका कर त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करवाया है.भाकपा माले के महासचिव अभिजीत मजुमदार ने बताया है कि राज्य सरकार पहाड़ पर गोरखालैंड आंदोलन को कुचलने के लिए दमन की नीति अपना रही है.वास्विकता यह है कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने पहाड़ पर विभिन्न राजनीतिक दलों के ट्रेड यूनियन संगठनों के नेताओं को मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर बोनस संबंधी त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करवाया है.इसी बैठक में दो किश्तों में बोनस देने पर बातचीत हुयी है. मालिक पक्ष के लोग पहले से आनाकानी कर रहे थे. दरअसल राज्य सरकार ने पहाड़ पर चाय बागानों में भी स्थिति को सामान्य दर्शाने के लिए ही ऐसा करवाया है.

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