लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा के लिए विशेष स्कॉलरशिप

Published at :02 Aug 2017 8:43 AM (IST)
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लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा के लिए विशेष स्कॉलरशिप

कोलकाता. पढ़ाई की ओर लड़कियों को आकर्षित करने के लिए उनको एक विशेष आर्थिक सहायता दी जायेगी. एकेडमिक वर्ष 2017-18 के लिए नेशनल इनसेनटिव फॉर गल्स फॉर सेकेंडरी एजुकेशन (एनएसआइजीएसइ ) योजना के तहत लगभग 3,000 रुपये की सहायता की जायेगी. केन्द्र सरकार की इस योजना का लाभ पश्चिम बंगाल राज्य के सभी स्कूलों की […]

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कोलकाता. पढ़ाई की ओर लड़कियों को आकर्षित करने के लिए उनको एक विशेष आर्थिक सहायता दी जायेगी. एकेडमिक वर्ष 2017-18 के लिए नेशनल इनसेनटिव फॉर गल्स फॉर सेकेंडरी एजुकेशन (एनएसआइजीएसइ ) योजना के तहत लगभग 3,000 रुपये की सहायता की जायेगी. केन्द्र सरकार की इस योजना का लाभ पश्चिम बंगाल राज्य के सभी स्कूलों की लड़कियों को भी मिलेगा. इसके लिए राज्य के सभी सरकारी अनुदान प्राप्त व सरकारी स्कूलों में इसकी जानकारी दी गयी है. सभी स्कूलों में यह योजना शीघ्र लागू होगी.
इस मामले में स्कूलों के जिला इन्सपेक्टरों को यह सूचना जारी की गयी है कि वे इस योजना को शीघ्र लागू करवाएं. एक शिक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि जो लड़कियां आठवीं कक्षा पास कर चुकी हैं. अभी नाैंवी में नामांकन करवाया है, वे इस मुआवजा राशि के लिए योग्य हैं. इसमें अनुदान प्राप्त स्कूलों, सरकारी स्पोन्सर्ड स्कूल व मदरसा से कक्षा 9वीं में नामांकन करने वाली लड़कियां भी आवेदन कर सकती हैं. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 8वीं पास करने वाली लड़कियां भी यह राशि पा सकती हैं. इसमें लड़की का अविवाहित होना जरूरी है. उसकी उम्र 31 मार्च, 2017 तक 16 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
खास बात यह है कि इस राशि के लिए छात्राओं को सीधे इसकी वेबसाइट www.scholarships.gov.in पर अावेदन करना होगा. पहले स्कूल बच्चों की स्कॉलरशिप के लिए विवरण डीआइ को भेजते थे. अब छात्राओं को आवेदन करना होगा. इसको चेक करने के बाद स्कूल संबंधित विभागों को यह विवरण भेजेंगे. इस विषय में बंगीय शिक्षक-ओ-शिक्षाकर्मी के संयुक्त सचिव सपन मंडल का कहना है कि लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप की आइडिया बुरी नहीं है, इससे उनका काफी भला होगा. पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बढ़ेगी लेकिन कई लड़कियां एेसी हैं जिन्हें ऑनलाइन आवेदन करने नहीं आता है, या कंप्यूटर की जानकारी नहीं है. ऐसी लड़कियों को स्कूलों द्वारा पहले प्रशिक्षण देने की जरूरत है. उसके बाद वे आवेदन कर सकती हैं. पहले इसकी व्यवस्था स्कूलों को या जिला स्तर पर डीआइ को करनी चाहिए.
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