लगा आरोप: कुम्हार टोली के मूर्तिकारों के रास्ते का रोड़ा बनी जीआरपी, आंदोलन के मूड में मूर्तिकार
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :19 Jul 2017 9:24 AM
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सिलीगुड़ी. सावन महीने के लगते ही मूर्तिकारों के कारोबार का मौसम शुरू हो जाता है. यह मौसम तकरीबन चार महीने सावन, भादो, आश्विन व कार्तिक तक लगातार जारी रहता है. लेकिन सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के मूर्तिकारों के रास्ते में गवर्मेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) बीते दो वर्षों से रोड़ा बना हुआ है. वजह रेलवे की जमीन […]
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सिलीगुड़ी. सावन महीने के लगते ही मूर्तिकारों के कारोबार का मौसम शुरू हो जाता है. यह मौसम तकरीबन चार महीने सावन, भादो, आश्विन व कार्तिक तक लगातार जारी रहता है. लेकिन सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के मूर्तिकारों के रास्ते में गवर्मेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) बीते दो वर्षों से रोड़ा बना हुआ है. वजह रेलवे की जमीन को चहारदीवारी से घेर कर एप्रोच रोड को बंद कर दिया जाना है. जीआरपी पर यह आरोप सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के मूर्तिकारों के संगठन के अध्यक्ष अधीर पाल ने लगाया है.
उनका कहना है कि मूर्तिकारों का वर्ष भर में सबसे व्यस्त चार महीना होता है. इस चार महीनों के दौरान ही मनसा पूजा, गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा व जगद्धात्री पूजा एक के बाद एक लगातार प्रत्येक वर्ष आयोजित होते हैं. इस दौरान पूजा आयोजक कमेटियों को मूर्ति डिलवरी करने में मूर्तिकारों बीते दो वर्षों से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह रेलवे जमीन को चहारदीवारी से घेर दिये जाने के बाद हर्ट ऑफ सिटी एयरव्यू मोड़ से कुम्हार टोली तक पहुंचने का एप्रोच रोड (जीआरपी के जिला पुलिस अधीक्षक के दफ्तर के सामने की सड़क) को बंद कर दिया जाना है.
श्री पाल का कहना है कि इस सड़क को जीआरपी द्वारा बंद कर दिये जाने के बाद मूर्तियों की डिलेवरी करने में तरह-तरह की परेशानियों से मूर्तिकारों जूझना पड़ रहा है. मूर्ति डिलेवरी करने में मूर्तिकारों को सबसे अधिक परेशानी दुर्गा पूजा और काली पूजा के समय होता है. इस दौरान कुम्हार टोली में मूर्ति लेने के लिए आयोजक कमेटियों के वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती है. रेलवे द्वारा एप्रोच रोड को बंद कर दिये जाने के बाद महानंदा किनारे के लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट के सामने की सड़क से ही वाहन कुम्हार टोली तक पहुंचते हैं और इसी रास्ते से ही मूर्ति लादकर वाहन वापस जाते हैं. इसके लिए स्थानीय लोग प्रत्येक वर्ष विरोध करते हैं. सड़क अवरोध कर वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने के लिए उग्र प्रदर्शन करते हैं. इतना ही नहीं मूर्ति लदे वाहनों से कुछ असामाजिक तत्व अवैध वसूली करने के फिराक में भी रहते हैं.
श्री पाल का कहना है कि इस समस्या के निदान हेतु कुम्हार टोली के मूर्तिकार दो वर्ष से रेलवे से गुजारिश कर रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही. उनका कहना है कि सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के पौने पांच बीघा जमीन में 30 से भी अधिक मूर्तिकारों का कारखाना 50 वर्ष से भी अधिक से स्थापित है और कुम्हार टोली तक पहुंचने का मुख्य रास्ता भी जीआरपी दफ्तर के सामने का ही रास्ता था. कुम्हार टोली और आस-पास के लोग हमेशा से ही इसी रास्ते का ही इस्तेमाल करते आ रहे थे. लेकिन तकरीबन दो वर्ष पहले जीआरपी ने रेलवे जमीन को घेर कर सभी को परेशानी में डाल दिया है. जो कानून अपराध है. श्री चौधरी ने बताया कि जीआरपी का इस धांधली के विरुद्ध वे लोग दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के सांसद एसएस अहलूवालिया से गुजारिश किये थे. उन्होंने हाथोंहाथ रेल मंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप कर समस्या हल करने को कहा था. लेकिन रेलवे जीआरपी दफ्तर में भारी तादाद में अस्त्र-आग्नेयास्त्र होने का हवाला देकर एप्रोच रोड किसी भी कीमत पर न खोलने की जिद पर अड़ा पड़ा है. जबकि रेलव की जमीन पर ही प्रत्येक साल दो-दो महीनों तक बैशाखी मेला, सर्कस व अन्य मेले आयोजित होते रहते हैं. इन मेलों से जीआरपी को कोई समस्या नहीं होती. श्री चौधरी ने कहा कि मूर्ति का मौसम शुरू होने से ठीक पहले एप्रोच रोड खुलवाने के लिए सांसद व रेल मंत्रालय से वापस गुजारिश की जायेगी. अगर इसबार भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो मूर्तिकार जीआरपी के विरुद्ध आंदोलन पर उतरने के लिए बाध्य होंगे.
श्री पाल का कहना है कि इस समस्या के निदान हेतु कुम्हार टोली के मूर्तिकार दो वर्ष से रेलवे से गुजारिश कर रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही. उनका कहना है कि सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के पौने पांच बीघा जमीन में 30 से भी अधिक मूर्तिकारों का कारखाना 50 वर्ष से भी अधिक से स्थापित है और कुम्हार टोली तक पहुंचने का मुख्य रास्ता भी जीआरपी दफ्तर के सामने का ही रास्ता था. कुम्हार टोली और आस-पास के लोग हमेशा से ही इसी रास्ते का ही इस्तेमाल करते आ रहे थे. लेकिन तकरीबन दो वर्ष पहले जीआरपी ने रेलवे जमीन को घेर कर सभी को परेशानी में डाल दिया है. जो कानून अपराध है. श्री चौधरी ने बताया कि जीआरपी का इस धांधली के विरुद्ध वे लोग दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के सांसद एसएस अहलूवालिया से गुजारिश किये थे. उन्होंने हाथोंहाथ रेल मंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप कर समस्या हल करने को कहा था. लेकिन रेलवे जीआरपी दफ्तर में भारी तादाद में अस्त्र-आग्नेयास्त्र होने का हवाला देकर एप्रोच रोड किसी भी कीमत पर न खोलने की जिद पर अड़ा पड़ा है. जबकि रेलव की जमीन पर ही प्रत्येक साल दो-दो महीनों तक बैशाखी मेला, सर्कस व अन्य मेले आयोजित होते रहते हैं. इन मेलों से जीआरपी को कोई समस्या नहीं होती. श्री चौधरी ने कहा कि मूर्ति का मौसम शुरू होने से ठीक पहले एप्रोच रोड खुलवाने के लिए सांसद व रेल मंत्रालय से वापस गुजारिश की जायेगी. अगर इसबार भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो मूर्तिकार जीआरपी के विरुद्ध आंदोलन पर उतरने के लिए बाध्य होंगे.
जीआरपी के पुलिस अधीक्षक ने दी सफाई
सिलीगुड़ी कुम्हार टोली के मूर्तिकारों के आरोपों का जीआरपी के पुलिस अधिक्षक (एसपी) इ अन्नाप्पा ने अपनी सफाई में कहा है कि जो लोग महानंदा नदी के किनारे को दखल कर अवैध रूप से बसे हुए हैं उस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. रेलवे हाइ ऑथोरिटी के निर्देशानुसार ही हम अपना कर्तव्य निभा रहे हैं. रेलवे ने अपनी निजी संपत्ति की सुरक्षा हेतु जमीन का घेराव किया है. इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. वैसे भी रेलवे जमीन को घेरने की वजह असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाना है. उन्होंने बताया कि जीआपी एसपी दफ्तर के आस-पास की रेलवे जमीन डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है.
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