कुरीतियों का तिलिस्म तोड़ने निकलीं किशोरियां
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :14 Jul 2017 10:06 AM
विज्ञापन

पुरुलिया: एक छोटी सी चिंगारी भी शोला बन सकती है. इसकी बानगी पुरुलिया जिले के झालदा इलाके में देखने को मिल रही है. यहां की कुछ स्कूली छात्राओं ने बाल विवाह के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. उनका यह आंदोलन अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. पुरुलिया, झारखंड से सटा पश्चिम बंगाल का […]
विज्ञापन
पुरुलिया: एक छोटी सी चिंगारी भी शोला बन सकती है. इसकी बानगी पुरुलिया जिले के झालदा इलाके में देखने को मिल रही है. यहां की कुछ स्कूली छात्राओं ने बाल विवाह के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. उनका यह आंदोलन अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. पुरुलिया, झारखंड से सटा पश्चिम बंगाल का एक जिला है. यह बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित है. देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार पुरुलिया में साक्षरता की दर भी बहुत कम है.
गरीबी एवं अशिक्षा के कारण जिले में बाल विवाह का चलन है. लेकिन जिले के झालदा इलाके की तस्वीर कुछ अलग है. यहां माया मुखर्जी, श्वेता सिंह, आराधना महतो जैसी कई छात्राएं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलनरत हैं. इन बच्चियों के विरोध से जो चिंगारी निकली है वह धीरे-धीरे शोला बनती जा रही है. इनके आंदोलन से अब अन्य छात्राएं भी जुड़ती जा रही हैं.
पुरुलिया जिले में बाल विवाह, दहेज प्रथा, टोना-टोटका, डायन जैसी कुरीतियां चरम पर हैं. माया, श्वेता और आराधना के साथ काम करनेवाली किशोरियां इसके खिलाफ मुहिम चला रही हैं. इनकी मुहिम में यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेंस फंड (यूनीसेफ) का पूरा सहयोग मिल रहा है. बता दें कि राज्य सरकार की कन्याश्री योजना के तहत यूनीसेफ की ओर से पुरुलिया जिले में करीब 173 कन्याश्री क्लब संचालित किये जा रहे हैं. इस क्लब में शिक्षा संबंधी जानकारियों के साथ किशोरियों को शारीरिक एवं सामाजिक ज्ञान भी दिया जा रहा है. कन्याश्री क्लब से ही माया, श्वेता एवं आराधना को एक नयी दिशा मिली. अब वह समाज सुधारक की राह पर निकल पड़ी हैं.
झालदा निवासी माया मुखर्जी दसवीं की छात्रा है. उसने बताया : मेरी कक्षा में पढ़नेवाली एक लड़की की पढ़ाई-लिखाई उसके माता-पिता ने पांचवीं कक्षा में ही छुड़ा दी थी. मैंने इस बारे में उसके माता-पिता से बात की. काफी समझाने के बाद वह अपनी बच्ची को पढ़ाने को राजी हुए. माया बाल विवाह के खिलाफ भी लड़ाई लड़ रही है. उसने बताया कि कन्याश्री क्लब के माध्यम से बहुत सारी किशोरियां स्वावलंबी बन रही हैं. आराधना भी इन बच्चियों के साथ समाज सुधार के कार्य में जुड़ी है.
बाल विवाह रोकने पर होना पड़ता है अपमानित
श्वेता सिंह ने बताया कि बाल विवाह का विरोध करने पर कई बार बच्चों के अभिभावक उनसे उलझ पड़ते हैं. हमें अपमानित किया जाता है. लेकिन इससे वे डरने वाली नहीं हैं. वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाती रहेंगी. श्वेता ने कहा कि इस मुहिम में कन्याश्री क्लब का पूरा सहयोग मिलता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










