पहाड़ पर अशांति से पर्यटक दहशत में

Updated at :09 Jun 2017 9:02 AM
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पहाड़ पर अशांति से पर्यटक दहशत में

सिलीगुड़ी. बांग्ला भाषा को लेकर हो रही राजनीति से पहाड़ अशांत हो उठा है. इस अशांति का खमियाजा सैलानियों को भुगतना पड़ रहा है. गुरुवार को दार्जिलिंग में राजभवन के सामने आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुई भिड़ंत के बाद हजारों देसी-विदेशी सैलानी दहशत में हैं. सभी जल्द से जल्द पहाड़ छोड़ना चाह रहे हैं. […]

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सिलीगुड़ी. बांग्ला भाषा को लेकर हो रही राजनीति से पहाड़ अशांत हो उठा है. इस अशांति का खमियाजा सैलानियों को भुगतना पड़ रहा है. गुरुवार को दार्जिलिंग में राजभवन के सामने आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुई भिड़ंत के बाद हजारों देसी-विदेशी सैलानी दहशत में हैं. सभी जल्द से जल्द पहाड़ छोड़ना चाह रहे हैं.

साथ ही आंदोलनकारियों द्वारा शुक्रवार को 12 घंटे के पहाड़ बंद के एलान से सैलानी असमंजस में हैं कि आखिर करें तो क्या करे. दूसरी तरफ दार्जिलिंग जिला और पुलिस प्रशासन पर मुख्यमंत्री की सुरक्षा और सैलानियों की सुरक्षा को लेकर दोहरा दबाव बना हुआ है. वहीं, टूर ऑपरेटरों के प्रतिनिधि भी काफी चिंतित हैं और सैलानियों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रशासन से संपर्क साध रहे हैं.

क्या कहना है पर्यटन विभाग के अधिकारी का : पर्यटन मंत्रालय के उत्तर बंगाल इकाई के संयुक्त निदेशक सुनील अग्रवाल का कहना है कि पहाड़ की वर्तमान परिस्थिति पर नजर रखी जा रही है. सभी सैलानियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. सैलानियों की सुरक्षा को लेकर जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. साथ ही सैलानियों को सुरक्षित पहाड़ से उतारने के लिए बस व अन्य सुविधाएं भी बढ़ायी जा रही है. सैलानियों को लेकर पर्यटन मंत्रालय लगातार टूर ऑपरेटर मालिकों के साथ भी संपर्क साध रही है.
क्या कहना है टूर ऑपरेटर संगठन काः इस्टर्न हिमालय ट्रेभल्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन (एथवा) नामक संगठन के प्रवक्ता सम्राट सान्याल ने काफी तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि राजनैतिक दलों ने पहाड़ों की रानी ‘दार्जिलिंग’ को राजनैतिक अखाड़ा बना लिया है. राजनीति के नाम पर सैलानियों का मजाक उड़ाया जा रहा है. पहाड़ की वर्तमान राजनैतिक परिस्थिति को लेकर संगठन लगातार नजर रखे हुए है. सैलानियों की सुरक्षा को लेकर जहां संगठन की ओर से मीटिंग की जा रही है वहीं पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा जिला प्रशासन के साथ भी लगातार संपर्क साधा जा रहा है. जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के साथ मीटिंग भी की जायेगी.
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